आजमगढ़ में ग्रामीण आजीविका मिशन से हजारों महिलाएं बन रहीं आत्मनिर्भर, मिलेगा आर्थिक मदद

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आजमगढ़ में ग्रामीण आजीविका मिशन से हजारों महिलाएं बन रहीं आत्मनिर्भर, मिलेगा आर्थिक मदद


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उपायुक्त स्वरोजगार ग्रामीण आजीविका मिशन, डॉ. आराधना त्रिपाठी ने बताया कि स्वयं सहायता समूह महिलाओं के लिए आत्मनिर्भर बनने का एक जबरदस्त माध्यम बन रहा है और जिले में हजारों महिलाएं इस योजना के अंतर्गत लाभान्वित हो रही है. खुद का रोजगार शुरू करते हुए आर्थिक रूप से मजबूत बन रही है. उन्होंने बताया कि स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के लिए किसी विशेष पात्रता की आवश्यकता नहीं होती है गांव की कोई भी गरीब महिला इसका हिस्सा बन सकती है.

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आजमगढ़ः महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उनके स्वावलंबन के लिए प्रदेश सरकार के द्वारा कई योजनाओं का संचालन किया जा रहा है. प्रदेश में शहर के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्र में भी महिलाओं को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत स्वयं सहायता समूह का संचालन किया जाता है जिसमें महिलाएं समूह का गठन करते हुए उसकी मदद से उद्यमी बन सकती हैं और खुद का स्वरोजगार शुरू कर सकते हैं.

इसके लिए महिलाओं को प्रशिक्षण के साथ-साथ आर्थिक सहायता भी उपलब्ध कराई जाती है. स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं यदि उद्यमी बनना चाहती हैं और स्वरोजगार की दिशा में कार्य करना चाहती हैं तो उन्हें सरकार की तरफ से आर्थिक सहायता भी उपलब्ध कराई जाती है.

हजारों महिलाएं हो रही लाभान्वित

इस विषय पर जानकारी देते हुए उपायुक्त स्वरोजगार ग्रामीण आजीविका मिशन, डॉ. आराधना त्रिपाठी ने बताया कि स्वयं सहायता समूह महिलाओं के लिए आत्मनिर्भर बनने का एक जबरदस्त माध्यम बन रहा है और जिले में हजारों महिलाएं इस योजना के अंतर्गत लाभान्वित हो रही है. खुद का रोजगार शुरू करते हुए आर्थिक रूप से मजबूत बन रही है. उन्होंने बताया कि स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के लिए किसी विशेष पात्रता की आवश्यकता नहीं होती है गांव की कोई भी गरीब महिला इसका हिस्सा बन सकती है.

इसके लिए हर ग्राम पंचायत में समूह सखी के माध्यम से 8 से 10 महिलाओं को जोड़कर एक समूह का गठन किया जाता है, समूह गठन के पश्चात सबसे पहले इनका बैंक खाता खुलवाया जाता है ताकि इसकी मदद से उन्हें आर्थिक सहायता सीधे उन तक पहुंचाई जा सके. इस दौरान महिलाओं को समूह के लिए तय किए गए पांच सूत्र का पालन करना होता है जिनमें नियमित बैठक, बचत, आंतरिक लेनदेन, ऋण वापसी और लेखा-जोखा शामिल होता है. इसके बाद इस समूह को सक्रिय माना जाता है और इसके लिए रिवाल्विंग फंड की ₹30000 की धनराशि प्रदान की जाती है. उन्होंने बताया कि समूह के 6 महीने सफलतापूर्वक पूरे होने पर समूह को 1.5 लाख रुपए का सीआईएफ दिया जाता है.

बैंक से मिलेगा सस्ते दर पर लोन

महिलाएं इस समूह की मदद से अपना खुद का स्वरोजगार स्थापित कर सकती हैं इसमें छोटे व्यवसाय को शुरू करने के लिए कम्युनिटी फंड से पैसा लिया जा सकता है जबकि बड़ा व्यवसाय शुरू करने के लिए सीसीएल यानी क्रेडिट लिंक के माध्यम से ₹3 से ₹5 लाख तक का बैंक रेट आसानी से प्राप्त किया जा सकता है. इसके साथ ही व्यवसाय स्थापित करने की इच्छुक महिलाओं के लिए उद्यम सखी की व्यवस्था की गई है जिसमें सीधे तौर पर महिलाओं को उनकी आवश्यकता अनुसार 1% मासिक दर पर लोन उपलब्ध कराया जाता है जिसका इस्तेमाल करते हुए महिलाएं उद्यम स्थापित कर सकें और स्वरोजगार शुरू करते हुए आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हो सके.

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Rajneesh Kumar Yadav

मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें



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