आजम खान को जमानत मिलने के बाद भी फंस जाएगी रिहाई? जानिए कहां फंसा है पेच

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आजम खान को जमानत मिलने के बाद भी फंस जाएगी रिहाई? जानिए कहां फंसा है पेच


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Lucknow News: सीतापुर जेल में बंद आजम खान को आखिरी मामले में जमानत मिलने के बाद भी उनकी रिहाई पर पेच फंस सकता है. पुलिस ने शत्रु संपत्ति कब्जाने के मामलेमे नई धाराएं जोड़ी हैं, जिस पर शनिवार को रामपुर कोर्ट ने उन्हें तलब किया है.

आजम खान को जमानत मिलने के बाद भी फंस जाएगी रिहाई? जानिए कहां फंसा है पेचRampur News: आजम खान की रिहाई में कहां फंसा है पेंच

रामपुर. समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खान को इलाहाबाद हाईकोर्ट से क्वालिटी बार भूमि अतिक्रमण मामले में बड़ी राहत मिली है. हाईकोर्ट ने गुरुवार को उनकी जमानत याचिका पर फैसला सुनाते हुए उन्हें सशर्त जमानत प्रदान कर दी. लेकिन, रामपुर के शत्रु संपत्ति रिकॉर्ड हेराफेरी मामले में गंभीर धाराएं जोड़ी जाने और 20 सितंबर को एमपी-एमएलए कोर्ट में पेशी का आदेश होने से उनकी रिहाई पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं. यदि रामपुर कोर्ट से राहत न मिली, तो आजम खान जेल से बाहर आने में और देरी हो सकती है.

रामपुर जिले के सिविल लाइंस थाने में 2019 में दर्ज इस मामले की जड़ें 2013 से जुडी हैं. आरोप है कि आजम खान ने कैबिनेट मंत्री रहते हुए अपनी पत्नी तजीन फातमा और बेटे अब्दुल्लाह आजम खान के नाम पर क्वालिटी बार नामक संपत्ति का गैरकानूनी आवंटन कराया. मूल शिकायतकर्ता गगन अरोड़ा ने दावा किया कि यह संपत्ति उनके कब्जे में थी, लेकिन प्रभाव के दुरुपयोग से इसे हड़प लिया गया. शुरुआती एफआईआर में आजम खान का नाम नहीं था, लेकिन 2024 में पुनः जांच के बाद उन्हें आरोपी बनाया गया और जनवरी 2025 में चार्जशीट दाखिल की गई.

हाई कोर्ट से मिली जमानत

रामपुर एमपी-एमएलए कोर्ट ने मई 2025 में उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया. जस्टिस समीर जैन की एकलपीठ ने 21 अगस्त को फैसला सुरक्षित रखा था. सुनवाई में आजम के वकील इमरान उल्लाह और मोहम्मद खालिद ने तर्क दिया कि मामला पांच साल पुरानी पुनः जांच पर आधारित है, जो कानूनी रूप से अमान्य है. कोर्ट ने इन तर्कों को स्वीकार करते हुए जमानत मंजूर की. वकील खालिद ने बताया, “इस फैसले से सभी लंबित मामलों में जमानत मिल चुकी है. रिहाई की प्रक्रिया दो-तीन दिन में पूरी हो सकती है.” बता दें कि यह आजम खान को हाईकोर्ट से मिलने वाली तीसरी जमानत है. 10 सितंबर को उन्हें डूंगरपुर जबरन बेदखली मामले में 10 साल की सजा के खिलाफ जमानत मिली थी.

शत्रु संपत्ति केस: रिहाई पर सबसे बड़ा खतरा

दूसरी ओर, रामपुर के शत्रु संपत्ति रिकॉर्ड रूम में हेराफेरी के मामले ने आजम खान की रिहाई को लटका दिया है. यह केस 2020 में सिविल लाइंस थाने में दर्ज हुआ था, जिसमें आरोप है कि आजम खान और उनके सहयोगियों ने शत्रु संपत्ति के अभिलेखों में छेड़छाड़ कर मौलाना अली जौहर विश्वविद्यालय के लिए जमीन हड़पी. सहायक रिकॉर्डकीपर मोहम्मद फरीद की शिकायत पर शुरू हुई जांच में आजम के पूर्व ओएसडी सैयद अफाक अहमद समेत कई नाम सामने आए.

पुलिस ने जोड़ी गंभीर धाराएं

हाल ही में पुलिस ने इस मामले में गंभीर धाराएं जोड़ दी हैं, जिसमें धोखाधड़ी, साक्ष्य नष्ट करने और आपराधिक साजिश जैसे आरोप शामिल हैं. रामपुर एमपी-एमएलए कोर्ट ने शनिवार (20 सितंबर) आजम खान को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया है. यदि कोर्ट ने जमानत न दी, तो यह केस उनकी रिहाई में सबसे बड़ी बाधा बनेगा. सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार ने इस मामले की जांच के लिए विशेष समिति गठित की है, जिसमें अलीगढ़ मंडलायुक्त और आईजी विजिलेंस शामिल हैं.

96 मुकदमों का बोझ: लंबी कानूनी लड़ाई
आजम खान के खिलाफ विभिन्न आरोपों में कुल 96 मुकदमे दर्ज हैं, जिनमें ज्यादातर भूमि हड़पने, धोखाधड़ी और आपराधिक धमकी से जुड़े हैं. 2017 में भाजपा सरकार बनने के बाद से 80 से अधिक नए केस दर्ज हुए हैं, जो मुख्य रूप से मौलाना अली जौहर विश्वविद्यालय से जुड़े भूमि विवादों पर आधारित हैं. समाजवादी पार्टी के नेताओं का कहना है कि ये केस राजनीतिक प्रतिशोध का नतीजा हैं, जबकि प्रशासन इसे कानूनी कार्रवाई बता रहा है.

सीतापुर जेल में बंद हैं आजम खान

आजम खान वर्तमान में सीतापुर जेल में बंद हैं. उनके वकील को उम्मीद हैं कि सभी बाधाएं जल्द दूर हो जाएंगी, लेकिन शत्रु संपत्ति केस का फैसला निर्णायक साबित होगा. एसपी नेता अखिलेश यादव ने ट्वीट कर कहा, “सत्य की हमेशा जीत होती है. आजम साहब की रिहाई नजदीक है.” आजम खान की रिहाई उत्तर प्रदेश की राजनीति में नया मोड़ ला सकती है, जहां आजम खान का प्रभाव रामपुर और आसपास के इलाकों में अभी भी मजबूत है. कोर्ट की अगली सुनवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं.

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Amit Tiwariवरिष्ठ संवाददाता

अमित तिवारी, News18 Hindi के डिजिटल विंग में प्रिंसिपल कॉरेस्पॉन्डेंट हैं. वर्तमान में अमित उत्तर प्रदेश की राजनीति, सामाजिक मुद्दों, ब्यूरोक्रेसी, क्राइम, ब्रेकिंग न्यूज और रिसर्च बेस्ड कवरेज कर रहे हैं. अख़बार…और पढ़ें

अमित तिवारी, News18 Hindi के डिजिटल विंग में प्रिंसिपल कॉरेस्पॉन्डेंट हैं. वर्तमान में अमित उत्तर प्रदेश की राजनीति, सामाजिक मुद्दों, ब्यूरोक्रेसी, क्राइम, ब्रेकिंग न्यूज और रिसर्च बेस्ड कवरेज कर रहे हैं. अख़बार… और पढ़ें

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