एक रामभक्त ऐसा भी… जब रिटायर्ड DSP ने मंदिर के लिए दान कर दी थी अपनी जमीन और जमा पूंजी
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Ram Janki Mandir Story Ballia: बलिया के छोड़हर गांव में बना श्री राम-जानकी मंदिर सिर्फ आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि त्याग और समर्पण की मिसाल है. इस मंदिर के निर्माण के लिए रिटायर्ड डीएसपी स्व. केशव प्रसाद मिश्रा ने अपनी निजी जमीन दान कर दी और वर्षों तक अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा मंदिर निर्माण में लगा दिया. 6 दिसंबर 1992 को रखी गई इस मंदिर की नींव की कहानी आज भी लोगों को प्रेरणा देती है. उनके बेटे ने बताया कि किस तरह एक संकल्प ने इस भव्य मंदिर का रूप लिया और कैसे यहां देश-विदेश से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं.
बलिया: आस्था और समर्पण की कई कहानियां आपने सुनी होंगी, लेकिन बलिया के छोड़हर गांव की यह कहानी कुछ अलग है. यहां एक रामभक्त ने सिर्फ मंदिर बनाने का सपना नहीं देखा, बल्कि उसे पूरा करने के लिए अपनी पूरी जिंदगी और कमाई तक समर्पित कर दी. ये मंदिर बेहद खास इसलिए भी है क्योंकि अयोध्या में राम मंदिर को लेकर देशभर में माहौल बनने के दौरान ही छोड़हर गांव में श्री राम-जानकी मंदिर की नींव रखी गई थी. ये मंदिर बेहद खास है क्योंकि इस मंदिर के निर्माण के लिए रिटायर्ड डीएसपी स्व. केशव प्रसाद मिश्रा ने अपनी निजी जमीन दान कर दी और नौकरी के दौरान मिली पूरी कमाई भी मंदिर निर्माण में लगा दी. उनका उद्देश्य था कि आने वाली पीढ़ियां इस आस्था के केंद्र से जुड़ सकें.
रिटायर्ड पुलिस उपाधीक्षक स्व. केशव प्रसाद मिश्रा के बेटे संजय मिश्रा ने बताया कि वह वर्तमान में इस मंदिर के प्रबंधक की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. उन्होंने बताया कि श्री राम-जानकी मंदिर का शिलान्यास 6 दिसंबर 1992 को किया गया था. मंदिर निर्माण के लिए उनके पिता ने सबसे पहले एक बीघा जमीन खरीदी और उसे पूरी तरह मंदिर के नाम कर दिया.
मंदिर निर्माण में लगा दी अपनी जमा पूंजी
संजय मिश्रा ने बताया कि साल 1992 से लेकर 2001 तक उनके पिता ने अपनी सैलरी और रिटायरमेंट के बाद मिले फंड का बड़ा हिस्सा मंदिर निर्माण में लगा दिया. वह भगवान राम के बहुत बड़े भक्त थे और उनका संकल्प था कि किसी भी परिस्थिति में इस मंदिर का निर्माण पूरा करना है.
जिम्मेदारी के बीच पूरा किया मंदिर निर्माण का सपना
उन्होंने बताया कि परिवार की पूरी जिम्मेदारी उनके पिता के ऊपर थी. सरकारी नौकरी से पहले उनका परिवार पीढ़ियों से खेती करता आया था. मंदिर निर्माण के दौरान कई आर्थिक परेशानियां भी आईं, लेकिन इसके बावजूद उनके पिता ने अपने संकल्प को पूरा किया. संजय मिश्रा ने कहा कि अगर भगवान की कृपा से उनके पिता को और अधिक संसाधन मिलते तो शायद यह मंदिर और भी भव्य रूप ले सकता था. मार्च 2001 में मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम संपन्न हुआ. इसमें उनकी माता जी की भूमिका भी काफी अहम रही.
भूमि पूजन से जुड़ा है बड़ा घटनाक्रम
मंदिर की कहानी का सबसे खास पहलू 6 दिसंबर 1992 की तारीख भी है. संजय मिश्रा बताते हैं कि मंदिर के भूमि पूजन के लिए यह तारीख पंचांग देखकर तय की गई थी. संयोग से इसी दिन अयोध्या में बाबरी ढांचा गिरने की घटना भी हुई थी. उन्होंने कहा कि यह तारीख पहले से मंदिर के भूमि पूजन के लिए तय थी, जबकि अयोध्या की घटना की कोई जानकारी नहीं थी. इसलिए आज भी इस संयोग को लोग अपनी-अपनी आस्था और नजरिए से देखते हैं.
देश-विदेश से दर्शन करने पहुंचते हैं श्रद्धालु
संजय मिश्रा के मुताबिक, श्री राम-जानकी मंदिर से सिर्फ गांव ही नहीं बल्कि दूर-दूर के लोगों की आस्था जुड़ी हुई है. देश के कई राज्यों से श्रद्धालु यहां दर्शन करने आते हैं. उन्होंने बताया कि यहां विदेशी श्रद्धालु भी पहुंचते हैं.
छोड़हर निवासी विपुल चौबे ने बताया कि मंदिर की खूबसूरत नक्काशी को तैयार करने के लिए दक्षिण भारत से दो कारीगर बुलाए गए थे. दोनों कारीगरों की उम्र 90 साल से ज्यादा थी. उन्होंने मंदिर की ऐसी नक्काशी तैयार की, जो आज भी लोगों को आकर्षित करती है. बताया जाता है कि यह उनके जीवन का अंतिम बड़ा निर्माण कार्य था.
कानपुर के जेके टेंपल की तर्ज पर बना है मंदिर
मंदिर के पुजारी बबलू मिश्रा ने बताया कि श्री राम-जानकी मंदिर काफी भव्य है और इसे कानपुर के जेके मंदिर की तर्ज पर तैयार किया गया है. यहां रोजाना पूजा-पाठ होता है और बड़ी संख्या में लोग दर्शन के लिए पहुंचते हैं. लोगों की आस्था और विश्वास के कारण यह मंदिर आज बलिया की पहचान बन चुका है.
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सीमा नाथ 6 साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत शाह टाइम्स में रिपोर्टिंग के साथ की जिसके बाद कुछ समय उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम …
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