कम लागत और जबरदस्त मुनाफा, अरबी की खेती ने इस किसान को बना दिया मालामाल
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Agriculture: किसान पारंपरिक तरीके से अरबी की खेती आसानी से कर सकते हैं. अरबी की खेती कम मेहनत में अच्छी पैदावार देती है, जिससे किसानों को कम समय में बेहतर मुनाफा मिल जाता है और बाजार में इसकी मांग पूरे साल बनी रहती है. आइए इसकी खेती के फायदों के बारे में जानते हैं.
बाराबंकी: वैसे किसान अब उन फसलों पर अधिक जोर दे रहे हैं, जो उन्हें कम खर्च में अधिक मुनाफा दे. इन्हीं फसलों में एक है अरबी, जिसे घुइयां भी कहा जाता है. इसकी खेती किसानों को अधिक आमदनी देती है और इस फसल को उगाने के लिए ज्यादा पानी या किसी तकनीक की जरूरत नहीं होती. किसान पारंपरिक तरीके से भी इसकी खेती आसानी से कर सकते हैं. अरबी की खेती कम मेहनत में अच्छी पैदावार देती है, जिससे किसानों को कम समय में बेहतर मुनाफा मिल जाता है और बाजार में इसकी मांग पूरे साल बनी रहती है.
अरबी की खेती के लिए बलुई वह दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है. इसकी अच्छी पैदावार लेने के लिए अच्छी जल निकास वाली भूमि होनी चाहिए. वहीं जनपद बाराबंकी के बड़ेल गांव के रहने वाले युवा किसान आकाश पारंपरिक तौर पर होने वाली फसलों के मुकाबले सब्जियों की खेती की शुरुआत की, जिसमें उन्हें अच्छा फायदा देखने को मिला. आज वह करीब ढाई बीघे में अरबी की खेती कर एक फसल पर 90 से 1 लाख रुपये मुनाफा कमा रहे हैं.
सब्जियों की खेती में अधिक मुनाफा
अरबी की खेती करने वाले किसान आकाश का कहना है कि पारंपरिक फसलों के मुकाबले सब्जियों की खेती अधिक मुनाफा देकर जाती है, जिस वजह से हम सीजनल सब्जियों की खेती ज्यादा करते हैं. इस समय मेरे पास ढाई बीघा में अरबी लगी हुई है और निकल भी रही है. इस समय बाजार रेट देखा जाए, तो करीब 50 से 60 रुपए प्रति किलो में जा रही है.
अगर इसकी लागत की बात करें, तो एक बीघे में करीब 7 से 8 हजार रुपये आती है और मुनाफा करीब एक फसल पर 90 से एक लाख रुपए तक हो जाता है. आजकल गर्मियों में इसकी डिमांड बाजार में अधिक रहती है और इस फसल में एक फायदा यह भी है कि इसको एक बार लगाने के बाद करीब 2 से 3 महीने तक फसल मिलती रहती है और इसकी खेती में लागत बेहद कम है, मुनाफा कहीं अधिक है.
गोबर और जैविक खाद का छिड़काव
इसकी खेती करना बहुत ही आसान है. पहले खेत की दो-तीन बार जुताई की जाती है, फिर इसमें गोबर और जैविक खाद का छिड़काव कर खेत समतल करके उसमें थोड़ी-थोड़ी दूर पर अरबी के बीजों की बुआई की जाती है. वहीं जब इसका पौधा निकल आता है, तब इसकी सिंचाई की जाती है. वहीं महज इसकी बुआई करने के 5 से 6 महीने बाद फसल तैयार हो जाती है, जिसकी खुदाई करके इसे बाजार में बिक्री कर सकते हैं.
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आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.