किसान ध्यान दें! खाद भंडार से यूरिया और डीएपी लेने के बदल गए हैं नियम, अब बिना इसके नहीं मिलेगा

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किसान ध्यान दें! खाद भंडार से यूरिया और डीएपी लेने के बदल गए हैं नियम, अब बिना इसके नहीं मिलेगा


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Agriculture News: अब किसानों को खाद भंडार से यूरिया और डीएपी जोत के अनुसार ही मिलेगा. इसके लिए आधार कार्ड अनिवार्य कर दिया है. सरकार ने रासायनिक उर्वरकों की जगह जैविक उर्वरकों को बढ़ावा देने के लिए यह फैसला लिया…और पढ़ें

आजमगढ़. सरकार के द्वारा फसल की सुरक्षा व बेहतर उपज प्राप्त करने के लिए किसानों को जरूरत के अनुसार यूरिया और डीएपी उपलब्ध कराया जाता है. इसके अलावा खाद भंडारों पर भी सरकार के द्वारा निर्धारित दरों में खाद उपलब्ध होती है, लेकिन इसके लिए अब सरकार की तरफ से जरूरी बदलाव किया जा रहा है. दरअसल सरकार के द्वारा खेतों में रासायनिक उर्वरकों की जगह वैकल्पिक उर्वरकों जैसे जैविक खाद के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है. ऐसे में किसानों को यूरिया व डीएपी जोत के अनुसार मिलेगी, जिसकी खरीदी के लिए खाद भंडारों पर आधार कार्ड अनिवार्य किया गया है.

जैविक खेती को बढ़ावा

जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार की तरफ से महत्वाकांक्षी योजना प्रधानमंत्री प्रणाम योजना भी संचालित की जा रही है. जिसके माध्यम से सरकार के द्वारा रासायनिक खेती के बजाय जैविक खेती पर जोर दिया जा रहा है और जैविक खेती से पैदा होने वाले उत्पादों की मार्केटिंग भी जोर शोर से की जा रही है, जिससे किसानों को इसका सीधा फायदा मिल सके. इसके लिए किसानों के द्वारा खेतों में यूरिया व डीएपी का उपयोग कम करते हुए जैविक खाद का उपयोग करते हुए फसलों को जरूरी पोषण की आपूर्ति की जा सके. जैविक खाद के उपयोग से जहां एक तरफ मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर होगी, वहीं पर्यावरण के लिए भी फायदा होगा.

कम होगी लागत, अधिक होगा फायदा

वहीं जिला प्रशासन की तरफ से यूरिया व डीएपी की मूल्य से अधिक बिक्री पर रोक लगाने के लिए के लिए भी हर संभव प्रयास किया जा रहा है. जिससे किसानों को खेती किसानी में हर तरह से सहायता उपलब्ध कराई जा सके व किसानों को जैविक खेती के लिए भी प्रोत्साहित किया जा सके. जहां इससे  केमिकल वाले उर्वरक का उपयोग कम हो सकेगा, वहीं दूसरी और इससे किसानों की लागत में भी कमी आएगी और किसानों को लागत के अनुसार अधिक मुनाफा कमाने का मौका मिलेगा. रासायनिक उर्वरकों के इस्तेमाल से मिट्टी की गुणवत्ता में आ रही कमी को भी रोकने में मदद मिलेगी और जैविक खाद के इस्तेमाल से समय के साथ-साथ मिट्टी की उर्वरक क्षमता को भी बढ़ाने में मदद मिल सकेगी.

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