कौन हैं वे 3 अफसर, जो सुलझाएंगे राम मंदिर में दान चोरी केस, तीनों योगी के खास?
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Ayodhya Ram Mandir Donation Theft Case: अयोध्या के राम मंदिर में दान पात्रों से चढ़ावे में कथित गबन मामले की जांच के लिए उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने उच्च स्तरीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है. इस मुद्दे पर दूध का दूध और पानी का पानी करने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपनी प्रशासनिक मशीनरी के तीन सबसे तेज तर्रार और कड़क छवि वाले अफसरों को मैदान में उतारा है. इसमें लखनऊ के मंडलायुक्त आईएएस विजय विश्वास पंत, सीबीआई पृष्ठभूमि के आईजी आईपीएस किरन एस और वित्तीय बारीकियों के विशेषज्ञ विशेष सचिव नीलरतन कुमार शामिल हैं. जानिए इन तीन महारथियों के बारे में.
राम मंदिर में चोरी की जांच करने वाले तीनों अधिकारी कौन? (तस्वीर में बाएं से दाएं- आईपीएस किरन एस, आईएएस विजय विश्वास पंत, नीलरतन कुमार)
Ram Mandir Donation Theft SIT: अयोध्या राम जन्मभूमि मंदिर के दानपात्रों में कथित गबन सुर्खियों में है. तमाम हो-हल्ला के बीच मुख्यमंत्री योगी ने सूबे सबसे तेज-तर्रार अफसरों इस कथित गबन की सच करोड़ों श्रद्धालुओं के सामने लाने की जिम्मेदारी दी है. यह कोई सामान्य जांच टीम नहीं है, बल्कि इसमें शासन के उन तीन सबसे विश्वसनीय और धाकड़ अधिकारियों हैं. ये तीनों अफसर इस महा-घोटाले की परतों को उखाड़ेंगे और पाई-पाई का हिसाब निकालेंगे. तीनों अधिकारियों के बारे में जानते हैं-
आईएएस विजय विश्वास पंत
इस हाई-प्रोफाइल एसआईटी की अध्यक्षता (चेयरमैनशिप) 2004 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी विजय विश्वास पंत को सौंपी गई है. वे वर्तमान में लखनऊ के मंडलायुक्त के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं.
- मूल रूप से उत्तराखंड के रहने वाले विजय विश्वास पंत की पहचान उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में एक बेहद कड़क, समयबद्ध और बेदाग छवि वाले अधिकारी के रूप में होती है. वे पहली बार साल 2008 में महोबा के जिला मजिस्ट्रेट (DM) बने थे, जहां उन्होंने अपनी कार्यशैली से कानून का राज स्थापित किया था.
- सीएम योगी का अटूट भरोसा: विजय विश्वास पंत पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का भरोसा कितना मजबूत है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक सांस्कृतिक समागम यानी प्रयागराज महाकुंभ के सफल और पारदर्शी आयोजन के लिए उन्हें विशेष रूप से प्रयागराज का मंडलायुक्त बनाया गया था. महाकुंभ के सफल संचालन के बाद उन्हें राजधानी लखनऊ की कमान सौंपी गई.
- दान चोरी केस में भूमिका: एक चेयरमैन के रूप में आईएएस विजय विश्वास पंत इस पूरी जांच के प्रशासनिक और कानूनी पहियों को नियंत्रित करेंगे. मंदिर प्रशासन, स्थानीय जिला प्रशासन और शासन के बीच समन्वय स्थापित करते हुए वे यह सुनिश्चित करेंगे कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष और बिना किसी बाहरी दबाव के पूरी हो.
आईपीएस किरन एस
एसआईटी में आपराधिक कड़ियों को डिकोड करने, सुरक्षा चूक की जांच करने और किसी भी संगठित सिंडिकेट का पर्दाफाश करने का जिम्मा 2008 बैच के तेज-तर्रार आईपीएस अधिकारी किरन एस को दिया गया है, जो वर्तमान में लखनऊ रेंज में आईजी के पद पर तैनात हैं.
- मूल रूप से केरल के तिरुवनंतपुरम के रहने वाले आईपीएस किरन एस को यूपी पुलिस के सबसे सटीक और खोजी दिमाग वाले अफसरों में गिना जाता है. उनके पास देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी सीबीआई (CBI) में भी लंबे समय तक सेवा दे चुके हैं.
- अंतरराष्ट्रीय सम्मान: केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के दौरान उनकी उत्कृष्ट और अद्वितीय सेवाओं के लिए उन्हें वैश्विक स्तर के प्रतिष्ठित ‘इंटरपोल मेडल ऑफ एक्सिलेंस’ से भी सम्मानित किया जा चुका है.
- जांच में भूमिका: राम मंदिर गबन कांड में चोरों या सेवादारों के किसी भी आपराधिक नेटवर्क, मंदिर परिसर के भीतर लगे हाई-डेफिनिशन सीसीटीवी (CCTV) फुटेज के वैज्ञानिक व फॉरेंसिक विश्लेषण और सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही भ्रामक अफवाहों के पुलिसिया एंगल को किरन एस अपनी टीम के साथ मिलकर खंगालेंगे.
नीलरतन कुमार
चूंकि राम मंदिर का यह पूरा मामला चढ़ावे की धनराशि की गिनती, वित्तीय लेन-देन और ऑडिट में कथित हेराफेरी से जुड़ा है, इसलिए सीएम योगी ने इस टीम में वित्त विभाग के विशेष सचिव श्री नीलरतन कुमार को शामिल किया है.
- प्रोफाइल और पहचान: नीलरतन कुमार उत्तर प्रदेश वित्त एवं लेखा सेवा (UPFAS) के सीनियर और अनुभवी अधिकारी हैं. वे लंबे समय से उत्तर प्रदेश शासन के वित्त विभाग में नीतिगत निर्णयों, बजट प्रबंधन, प्रदेश के पेंशन संबंधी कड़े शासनादेशों और यूपीपीसीएल (UPPCL) जैसे भारी-भरकम सरकारी निगमों में महत्वपूर्ण वित्तीय जिम्मेदारियां निभाते आ रहे हैं.
- जांच में मुख्य भूमिका: नीलरतन कुमार के पास वित्तीय हेरफेर को पकड़ने का दशकों पुराना तजुर्बा है. इस एसआईटी जांच में उनका मुख्य कार्य राम मंदिर की दान पेटियों के खुलने की पूरी टाइमलाइन, नोटों की गिनती (कैलकुलेशन) की प्रक्रिया, बैंक खातों में जमा की गई रसीदों के मिलान और तकनीकी लेन-देन के ऑडिट का बारीकी से निरीक्षण करना है. वे यह जांचेंगे कि क्या दान गणना प्रणाली में कोई तकनीकी लूपहोल था जिसका फायदा तस्करों या चोरों ने उठाया.
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