कौन है टिन्नू यादव, जो चंपत राय का है खास, कैसे टेंपो चालक बना करोड़पति
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Kaun Hai Tinnu Yadav: अयोध्या के नाका इलाके और एयरपोर्ट के पास टिन्नू ने एक आलीशान दो मंजिला मकान बनाया है, जिसमें कुछ 14 कमरे हैं. इस मकान में छात्र-छात्राओं के लिए हॉस्टल चलाया जाता है, जिससे हर महीने करीब 37 हजार रुपये का फिक्स किराया आता है. अयोध्या के निषाद राज चौराहे के पास भी उसका एक बड़ा हॉस्टल है.
राम मंदिर की दान पेटी से चोरी के आरोप में फंसा टिन्नू यादव
अयोध्याः राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी के बाद देशभर में कुछ नाम सुर्खियों में छाए हुए हैं. इन्हीं में से एक नाम है टिन्नू यादव. टिन्नू कहने को तो बस राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का खास है. लेकिन असल में वह श्रीराम मंदिर ट्रस्ट में पावरफुल व्यक्ति बताया जाता है. जिसका असली नाम राम शंकर यादव है. सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि मंदिर में लगभग हर आने वाले एक करोड़ रुपये के चढ़ावे को कंट्रोल करने वाली टीम का ये हिस्सा है. टिन्नू को इस पूरे चढ़ावा चोरी मामले का आरोपी बताया जा रहा है.
कौन है टिन्नू यादव
बताया जाता है कि एक वक्त था जब राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू अयोध्या में ऑटो और टेंपो चलाया करता था. लेकिन अब उसकी पहुंच राम मंदिर मैनेजमेंट तक है. मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के करीबी सहयोगी माने जाने वाले टिन्नू को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं. टिन्नू सहित 6 सेवादारों से एसआईटी ने पूछताछ की है. सवाल है कि आखिर एक समय ऑटो और टेंपो चलाने वाला व्यक्ति राम मंदिर के सबसे प्रभावशाली चेहरों में कैसे शामिल हो गया. यही वजह है कि चढ़ावा विवाद के सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक दलों के बीच टिन्नू यादव की चर्चा हो रही है.
अयोध्या की गलियों में टेंपो चलाता था टिन्नू यादव
बताया जाता है कि अयोध्या के स्वर्गद्वार मोहल्ले के रहने वाले टिन्नू के पिता तुलसीराम यादव नया घाट पर छोटी सी चाय की दुकान चलाते थे. टिन्नू का पुश्तैनी घर राम मंदिर से महज डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर है, जो तीन मंजिला बना हुआ है. दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक 1994-95 के समय टिन्नू अयोध्या की गलियों में टेपो चलाता था. इस दौरान वह श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति के मंत्री महेश नारायण के संपर्क में आ गया. फिर महेश नारायण ने टिन्नू को अपना ड्राइवर बना लिया. इसके बाद वह कारसेवकपुरम में आने-जाने लगा, जहां उसकी मुलाकात संगठन के बड़े लोगों के साथ होने लगी.
कब चंपत राय के संपर्क में आया टिन्नू यादव
विश्व हिंदू परिषद में चंपत राय का राजनीतिक कद बढ़ रहा था. इसकी वजह से 1991 में उन्हें क्षेत्रीय संगठन मंत्री बनाकर अयोध्या भेजा गया था, जिसके बाद वह संगठन में लगातार ऊंचे पदों पर पहुंचते गए. फिर 1998 में टिन्नू की मुलाकात चंपत राय से सीधे हुई. जब 31 मई 2022 को महेश नारायण का निधन हुआ, तब चंपत राय ने टिन्नू का हाथ थामा और उसे कारसेवकपुरम में जीप से लेकर मालवाहक गाड़ियां चलाने का जिम्मा सौंप दिया. धीरे-धीरे टिन्नू ने चंपत राय का विश्वास जीत लिया. इसी वजह से साल 2019 में जब ऐतिहासिक फैसला आया और राम मंदिर निर्माण का काम शुरू हुआ, तब टिन्नू को ट्रस्ट के भीतर एक आंतरिक वेतनभोगी कार्यकर्ता के तौर पर रख लिया गया.
टिन्नू ने इतने सालों में क्या कमाया
दैनिक भास्कर ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि एक तरफ जहां टिन्नू की सैलरी महज कुछ हजार रुपये थी. वहीं पिछले चार-पांच सालों में उसकी संपत्ति में रॉकेट की स्पीड से हुई. अयोध्या के नाका इलाके और एयरपोर्ट के पास टिन्नू ने एक आलीशान दो मंजिला मकान बनाया है, जिसमें कुछ 14 कमरे हैं. इस मकान में छात्र-छात्राओं के लिए हॉस्टल चलाया जाता है, जिससे हर महीने करीब 37 हजार रुपये का फिक्स किराया आता है. अयोध्या के निषाद राज चौराहे के पास भी उसका एक बड़ा हॉस्टल है. इसके अलावा शहर के 6 से ज्यादा नामी रेस्टोरेंट्स में उसकी पार्टनरशिप होने की बात सामने आई है. इसके अलावा टिन्नू ने बस्ती जिले के विक्रमजोत इलाके में करीब 20 से 22 बीघा कीमती खेतों की जमीन खरीदी है. लखनऊ में टिन्नू का एक निजी मकान है, जहां स्कोडा और स्कॉर्पियो जैसी गाड़ियां हैं. बेटे की शादी में पानी की तरह पैसा बहाया था.
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Prashant Rai am currently working as Chief Sub Editor at News18 Hindi Digital, where he lead the creation of hyper-local news stories focusing on politics, crime, and viral developments that directly impact loc…और पढ़ें