क्या नोएडा के होटल-पीजी में सुरक्षित हैं आप? फायर विभाग की जांच में खुली पोल
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Noida News: दिल्ली के मालवीय नगर अग्निकांड के बाद नोएडा का फायर विभाग पूरी तरह अलर्ट पर है. शहर के होटलों, रेस्टोरेंट्स और बरौला, नवादा, अट्टा सहित कई घनी आबादी वाले गांवों में चल रहे अवैध पीजी में नौ टीमों द्वारा विशेष जांच अभियान शुरू किया गया है. इस दौरान कई प्रतिष्ठानों में सुरक्षा उपकरणों की भारी खामियां मिली हैं, वहीं संकरी गलियों के कारण बड़ा खतरा बना हुआ है. नियमों का उल्लंघन करने वालों को नोटिस जारी कर कार्रवाई की जा रही है.
नोएडा: दिल्ली के मालवीय नगर में हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है. इस दर्दनाक घटना में करीब दो दर्जन लोगों की मौत के बाद अब पड़ोसी शहरों में भी आग से सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं. हम बात अगर नोएडा की करें तो बड़ी संख्या में होटल, गेस्ट हाउस और पीजी संचालित हो रहे हैं, जहां हजारों लोग रोजाना ठहरते और निवास करते हैं. ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि क्या नोएडा के होटल और पीजी किसी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं? इसी चिंता को देखते हुए फायर विभाग ने जिले भर में विशेष जांच अभियान शुरू किया है.
सुरक्षा व्यवस्था और फायर फाइटिंग की जांच जारी
मुख्य अग्निशमन अधिकारी (सीएफओ) प्रदीप कुमार चौबे ने बताया कि दिल्ली की घटना के बाद कमिश्नरेट और मुख्यालय स्तर से मिले निर्देशों के तहत जिले में नौ विशेष टीमों का गठन किया गया है. ये टीमें अगले सात दिनों तक विभिन्न होटलों और अन्य प्रतिष्ठानों में जाकर अग्नि सुरक्षा व्यवस्थाओं की जांच करेंगी. अभियान का उद्देश्य संस्थानों को परेशान करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि वहां मौजूद फायर सेफ्टी उपकरण कार्यशील अवस्था में हों और कर्मचारियों को आपात स्थिति से निपटने का पर्याप्त प्रशिक्षण प्राप्त हो. जहां भी खामियां मिल रही हैं, वहां नोटिस जारी कर आवश्यक कार्रवाई की जा रही है.
अब तक कई रेस्टोरेंट में मिली खामियां
जांच के दौरान कई प्रतिष्ठानों में चौंकाने वाली कमियां भी सामने आई हैं. कुछ स्थानों पर फायर पंप और अन्य सुरक्षा उपकरण तो स्थापित मिले, लेकिन उनका रखरखाव ठीक नहीं था. कहीं उपकरणों में प्रेशर लॉस की समस्या मिली तो कहीं कर्मचारियों को उनके संचालन का प्रशिक्षण ही नहीं दिया गया था. वहीं कुछ संस्थानों में प्रशिक्षित स्टाफ मौजूद था, लेकिन सुरक्षा उपकरण अपेक्षित मानकों के अनुरूप काम नहीं कर रहे थे. फायर विभाग का कहना है कि केवल एनओसी प्राप्त कर लेना पर्याप्त नहीं है, बल्कि सुरक्षा उपकरणों की नियमित जांच और कर्मचारियों का प्रशिक्षण संस्थान की निरंतर जिम्मेदारी है.
इन गांवों में अवैध पीजी की भदमार
नोएडा के कई गांवों और घनी आबादी वाले इलाकों में स्थिति और भी चिंताजनक दिखाई देती है. बरौला, नवादा, अट्टा, नया बांस, हरौला, बिशनपुरा, सदरपुर, रायपुर और निठारी जैसे क्षेत्रों में बड़ी संख्या में बहुत पतली गलियों में पीजी और छोटे होटल संचालित हो रहे हैं. इनमें से कई प्रतिष्ठान बेहद संकरी गलियों में स्थित हैं, जहां किसी बड़ी आग की घटना के दौरान दमकल वाहनों का पहुंचना भी मुश्किल हो सकता है. हाल ही में नवादा गांव स्थित एक पीजी में शॉर्ट सर्किट के कारण आग लगने की घटना ने इस खतरे को फिर उजागर कर दिया. हालांकि समय रहते आग पर काबू पा लिया गया, लेकिन वहां रहने वाली छात्राओं और महिलाओं के बीच अफरा-तफरी का माहौल बन गया था.
दिल्ली जैसी घटना नोएडा में हुई
आज सुबह सेक्टर-75 की एक सोसाइटी की 12वीं मंजिल पर लगी आग और सेक्टर-53 स्थित शताब्दी विहार की घटना ने भी सुरक्षा व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े किए थे. शताब्दी विहार में नीचे रेस्टोरेंट और ऊपर पीजी संचालित होने के कारण कई लोग बिल्डिंग के अंदर फंस गए थे, जिन्हें बाद में दमकल विभाग ने सुरक्षित बाहर निकाला. राहत की बात यह रही कि फायर विभाग का रिस्पांस टाइम बेहतर होने के कारण बड़ा हादसा टल गया. हालांकि इस बिल्डिंग में न कोई वेंटिलेशन है और ही इमरजेंसी निकास. सीएफओ प्रदीप कुमार चौबे ने स्वीकार किया कि जिले में बड़ी संख्या में अवैध पीजी संचालित हो रहे हैं. उन्होंने कहा कि इस संबंध में नोएडा प्राधिकरण को पत्र भेजकर आवश्यक कार्रवाई और अवैध प्रतिष्ठानों को बंद कराने की मांग की जाएगी.
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राहुल गोयल न्यूज़ 18 हिंदी में हाइपरलोकल (यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश) के लिए काम कर रहे हैं. मीडिया इंडस्ट्री में उन्हें 16 साल से ज्यादा का अनुभव है, जिसमें उनका फोकस हमेशा न्यू मीडिया और उसके त…और पढ़ें