क्या सच में ITBP जवानों ने किया था कमिश्नर ऑफिस का घेराव? प्रशासन ने खोला राज

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क्या सच में ITBP जवानों ने किया था कमिश्नर ऑफिस का घेराव? प्रशासन ने खोला राज


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ITBP Kanpur issue: कानपुर में अपनी मां के कटे हुए हाथ के साथ पुलिस कमिश्नर ऑफिस में पहुंचे आईटीबीपी के जवान ने जिम्मेदार अस्पताल पर कार्रवाई की मांग की थी. वहीं स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल को क्लीन चिट दे दी थी. जिसके बाद शनिवार के दिन आईटीबीपी के जवान पुलिस कमिश्नर ऑफिस पहुंचे थे और खबरें आई थीं कि जवानों ने पुलिस कमिश्नर ऑफिस का घेराव कर लिया है. लेकिन अब प्रशासन की ओर से स्पष्टीकरण सामने आया है और बताया गया कि आईटीबीपी ने जवानों ने कमिश्नर ऑफिस का घेराव नहीं किया था.

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कानपुर पुलिस कमिश्नर ऑफिस में आईटीबीपी के जवान

कानपुर: उत्तर प्रदेश के कानपुर में एक जवान की अपनी मां के कटे हुए हाथ के साथ पुलिस कमिश्नर ऑफिस में आने की घटना सामने आई थी, जिसके बाद खबरें चल रही थीं कि शनिवार के दिन आईटीबीपी के जवानों ने कमिश्नर ऑफिस का घेराव कर लिया है. लेकिन अब प्रशासन की ओर से स्पष्टीकरण सामने आया है और बताया गया कि आईटीबीपी ने जवानों ने कमिश्नर ऑफिस का घेराव नहीं किया था, बल्कि कानपुर पुलिस कमिश्नर (CP) ने खुद 32वीं बटालियन आईटीबीपी के CO को अपने कार्यालय बुलाया था, ताकि उस मामले की जांच पर चर्चा की जा सके.

बता दें कि इस पूरे मामले में अस्पताल की लापरवाही सामने आ रही है, लेकिन FIR दर्ज नहीं हो रही थी. प्रक्रिया के अनुसार FIR दर्ज करने से पहले यह तय करने के लिए एक स्वतंत्र मेडिकल बोर्ड की जांच जरूरी होती है कि वास्तव में लापरवाही हुई या नहीं. CMO की ओर से डॉक्टरों की एक टीम बनाकर जांच कराई गई, लेकिन आरोप है कि उस बोर्ड ने ठीक से जांच नहीं की और अस्पताल की कमियों को छिपाने की कोशिश की.

जांच के लिए आईटीबीपी को बुलाया
बताया गया कि अस्पताल ने बोर्ड को कुछ रिपोर्ट सौंपी, जिनमें दावा किया गया कि मरीज के सभी जरूरी टेस्ट किए गए थे. इन्हीं रिपोर्टों के आधार पर बोर्ड ने अपनी जांच रिपोर्ट तैयार कर दी. लेकिन मरीज को अस्पताल से दिए गए डिस्चार्ज पेपर में उन टेस्टों का कोई जिक्र नहीं है, जिससे सवाल खड़े हो रहे हैं. इसी मामले की जांच और तथ्यों की पुष्टि के लिए CP कानपुर सिटी ने खुद CO, आईटीबीपी के कुछ जवानों, गवाहों, डॉक्टरों की टीम और CMO को अपने कार्यालय बुलाया था.

सूचना मिलते ही CO के साथ आए जवान भी जांच से जुड़े तथ्यों की पुष्टि के लिए पहुंचे थे. मीडिया में जिस तरह घेराव और टकराव की खबर दिखाई गई, वह सही नहीं है. वहां किसी तरह का घेराव या विवाद नहीं हुआ था. जांच के दौरान मामले की पूरी जानकारी पुलिस कमिश्नर को दी गई, जिसके बाद उन्होंने मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट पर कई सवाल उठाए.

अतिरिक्त जवानों को कमिश्नर कार्यालय से हटाया
प्रशासन ने बताया कि कानपुर पुलिस और स्थानीय प्रशासन जांच में पूरा सहयोग कर रहे हैं और उन्हें भी लग रहा है कि मामले में लापरवाही हुई है, लेकिन मेडिकल बोर्ड ने सही तरीके से जांच नहीं की. बाद में अतिरिक्त जवानों को कमिश्नर कार्यालय से हटा दिया गया, क्योंकि उनकी मौजूदगी से मीडिया में भ्रम की स्थिति बन रही थी और खबरों को गलत तरीके से पेश किया जा रहा था.

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आर्यन सेठ

आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.



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