क्या होती है गुलाबी मीनाकारी? रक्षाबंधन के साथ लौटा 400 साल पुराना ट्रेंड
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What is Gulabi Meenakari : काशी की 400 साल पुरानी कलाकारी पूरी दुनिया में ढंका बजा रही है. रक्षाबंधन से पहले गुलाबी मीनाकारी के कारीगरों के फोन बजने लगे हैं. अमेरिका और कनाडा तक से डिमांड आ रहे हैं. गुलाबी मीनाकारी से जुड़े आर्टिजन रोहन विश्वकर्मा लोकल 18 से बताते हैं कि एक वक्त था जब गुलाबी मीनाकारी से जुड़े कारीगर इस काम को छोड़ रहे थे. उनको काम ही नहीं मिल रहा था, लेकिन सरकार के एक फैसले ने कारीगरों की किस्मत बदल दी. रोहन विश्वकर्मा के मुताबिक, महीने से राखियों के ऑर्डर को पूरा करने के लिए 10 से ज्यादा कारीगर जुटे हुए हैं.
वाराणसी. यूपी में काशी की गलियों से निकलकर 400 साल पुरानी कलाकारी अब ग्लोबल हो गई है. मुगलों के दौर वाला खूबसूरत आर्ट फिर से बाजार में छाया गया है. रक्षाबंधन से पहले गुलाबी मीनाकारी के कारीगरों के फोन बजने लगे हैं. अमेरिका और कनाडा सहित कई देशों से कारीगरों के पास गुलाबी मीनाकारी से बनी राखियों की डिमांड आ रही है. पूरे दिन कारीगर इन ऑर्डर को पूरा करने में जुटे हैं. लगातार आ रहे ऑर्डर से कारीगर गदगद हैं. गुलाबी मीनाकारी से जुड़े आर्टिजन रोहन विश्वकर्मा लोकल 18 से बताते हैं कि रक्षाबंधन को लेकर इस बार उन्होंने अलग-अलग डिजाइन वाली राखियां तैयार की हैं. चांदी से बनी इन राखियों में कारीगरों ने गुलाबी मीनाकारी का खूबसूरत रंग भरा है. इन राखियां की चमक सालों तक बरकरार रहती है.
कितने रुपये कीमत
इसे तैयार करने वाले रोहन विश्वकर्मा कहते हैं कि इन राखियों की डिजाइन को कुछ इस तरह तैयार किया गया है कि लोग इसे ब्रिसलेट के जैसे हमेशा हाथ में पहन सकते हैं. गुलाबी मीनाकारी वाली इन राखियों की कीमत 500 रुपये से लेकर 2000 रुपये तक है. रोहन विश्वकर्मा के मुताबिक, महीने से राखियों के ऑर्डर को पूरा करने के लिए 10 से ज्यादा कारीगर जुटे हुए हैं.
वन डिस्ट्रिक वन प्रोडक्ट
रोहन विश्वकर्मा बताते हैं कि एक वक्त था जब गुलाबी मीनाकारी से जुड़े कारीगर इस काम को छोड़ रहे थे, लेकिन जब से इसे ‘वन डिस्ट्रिक वन प्रोडक्ट’ में शामिल किया है और इस कलाकारी को जीआई टैग दिया है उससे गुलाबी मीनाकारी के कलाकारों के अच्छे दिन आ गए है. पीएम मोदी खुद गुलाबी मीनाकारी के प्रोडक्ट के ब्रांड एंबेसडर बनकर इसका प्रचार के रहे हैं. उन्होंने कई देशों के राष्ट्राध्यक्षों को इससे बने प्रोडक्ट उपहार स्वरूप भेंट किया है.
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प्रियांशु गुप्ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…
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