खेती में नहीं बन रही बात? तो शुरू करें मछली पालन,कम समय में कमाएं तगड़ा मुनाफा
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Fish Farming: लखीमपुर खीरी के किसान अब मछली पालन की ओर आकर्षित हो रहे हैं, जिससे उनकी आय बढ़ रही है. जयंती रोहू मछली की मांग बढ़ रही है, जो कम समय में तैयार होती है. सर्वेश कुमार सही बीज उपलब्ध करा रहे हैं.
मछली पालन में सही बीज का अहम योगदान
मछली पालन की सफलता में बीज का चयन बहुत महत्वपूर्ण होता है. लखीमपुर खीरी के ममरी गांव में बीज विक्रेता सर्वेश कुमार ने बताया कि आसपास के इलाकों में अक्सर सही बीज नहीं मिलने के कारण किसानों को नुकसान उठाना पड़ता था. लेकिन अब उनके यहां करीब 10 प्रजातियों की मछलियों का बीज उपलब्ध है. इनमें नैन, रोहू, भाकूर, सिल्वर कॉर्प, कामन कॉर्प और ब्रिगेड कॉर्प जैसी प्रजातियां शामिल हैं. सर्वेश ने बताया कि ये बीज किसानों को कम दामों पर दिए जा रहे हैं, जिससे उन्हें अच्छी कमाई का मौका मिल रहा है.
मछली पालन के क्षेत्र में जयंती रोहू प्रजाति की मांग लगातार बढ़ रही है. विशेषज्ञों के अनुसार यह मछली अन्य प्रजातियों के मुकाबले कम समय में तैयार हो जाती है. आमतौर पर रोहू मछली की अन्य नस्लें 16 से 18 महीने में तैयार होती हैं, जबकि जयंती रोहू केवल 8 से 10 महीनों में ही बाजार में बिकने लायक हो जाती है. इसका वजन एक से डेढ़ किलो तक होता है और बाजार में यह मछली 300 रुपये प्रति किलो तक बेची जा सकती है. यही वजह है कि किसान अब इस प्रजाति की ओर ज्यादा रुझान दिखा रहे हैं.
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कम लागत में शुरू कर सकते हैं मछली पालन
सर्वेश कुमार न सिर्फ बीज सप्लाई करते हैं, बल्कि खुद भी मछली पालन करते हैं. उन्होंने बताया कि बहुत से किसान अब कम लागत और छोटे तालाबों से भी मछली पालन की शुरुआत कर रहे हैं. सही बीज, उचित प्रबंधन और थोड़े से संसाधनों से भी किसान अच्छा मुनाफा कमा पा रहे हैं. यही वजह है कि अब गांवों के किसान मछली पालन को एक फायदे का सौदा मान रहे हैं.