गाजीपुर की सड़कें बनीं गड्ढों का मेला, वीआईपी रोड्स झील में हुआ तब्दील
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उत्तर प्रदेश के गाजीपुर शहर की सड़कें इन दिनों किसी जंग से कम नहीं. एशिया की सबसे बड़ी अफीम फैक्ट्री का गढ़ होने के बावजूद शहर की सड़कों की हालत इतनी खस्ता है कि लोग मजाक में कहते हैं, यहां बाइक नहीं, नाव चाहिए
गाजीपुर शहर की वीआईपी रोड्स भी इससे अछूती नहीं हैं. जिस रास्ते से जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, पूर्व सांसद राधे मोहन सिंह, जिला जज ,और जिले के डीएम गुजरते हैं. वहां भी बारिश में पानी भरकर झील जैसा नज़ारा पेश करता है. गाजीपुर नहीं, मानो वेनिस में आ गए हों,फर्क बस इतना कि यहां नावें नहीं, परेशानियां चलती हैं.
गोरा बाज़ार से नेहरू स्टेडियम तक जाने वाली सड़क भी बदहाल है. यहीं से बच्चे राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में जाते हैं, लेकिन पहले उन्हें गड्ढों की ओलंपिक पार करनी पड़ती है. सीएम योगी के आने पर कुछ दिन के लिए सड़कें चमकाई गईं, मगर 10 दिन बाद फिर वही हालात. इनकम टैक्स ऑफिस के पास रहने वाले रवि नाम के शख्स ने बताया कि उन्होंने कई बार शिकायत दर्ज कराई, लेकिन नतीजा सिफर, हम जल निगम गए तो कहा गया कि ये नगरपालिका का मामला है. नगरपालिका गए तो उन्होंने कहा जल निगम देखेगा. हमें समझ ही नहीं आता कि जाएं तो कहां जाएं. हम हर साल टैक्स भरते हैं और बदले में हमें मिलते हैं सिर्फ गड्ढे और पानी से भरी सड़कें.
शिकायतें दर्ज, समाधान नहीं
सबसे ज्यादा सवाल नगर पालिका अध्यक्ष पर उठ रहे हैं. जनता का आरोप है कि सड़क सुधार पर ध्यान देने के बजाय वे फंड से आलीशान घर बनवाने में व्यस्त हैं। शहर की टूटी सड़कें. तालाब जैसी गलियां उनकी कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रही हैं. जनता में गुस्सा है कि अधिकारी मूकदर्शक बने हैं. हर साल चुनाव में यही नेता फिर जीत जाते हैं.