गोंडा का बाबा पचरन नाथ मंदिर, कभी पांडवों ने की थी यहां भगवान शिव की पूजा
गोंडा: सावन का महीना शुरू होते ही भगवान शिव के मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ने लगी है. गोंडा जिले का प्राचीन बाबा पचरन नाथ मंदिर भी इन दिनों आस्था का बड़ा केंद्र बना हुआ है. सावन के सोमवार को यहां सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं. भक्त भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक कर परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना कर रहे हैं.
मंदिर को लेकर स्थानीय लोगों में एक खास धार्मिक मान्यता है. बताया जाता है कि महाभारत काल में जब पांचों पांडव वनवास में थे, तब उन्होंने इस क्षेत्र में कुछ समय बिताया था. इसी दौरान पांडवों ने भगवान शिव की पूजा-अर्चना की और यहां शिवलिंग की स्थापना की थी. इसी मान्यता के कारण बाबा पचरन नाथ मंदिर को प्राचीन और धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है.
सावन में बढ़ जाती है श्रद्धालुओं की भीड़
लोकल 18 से बातचीत में मंदिर के पुजारी रामदेव गोस्वामी बताते हैं कि सावन के महीने में मंदिर में भक्तों की संख्या काफी बढ़ जाती है. खासकर सोमवार के दिन सुबह से ही श्रद्धालु दर्शन और जलाभिषेक के लिए पहुंचने लगते हैं. मंदिर परिसर में भक्तों की लंबी कतार लग जाती है.
श्रद्धालु भगवान शिव को गंगाजल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और फूल अर्पित करते हैं. इसके बाद भगवान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना कर अपनी मनोकामना पूरी होने की प्रार्थना करते हैं. कई श्रद्धालु परिवार के साथ मंदिर पहुंचते हैं, तो कुछ लोग पैदल चलकर बाबा के दरबार में दर्शन करने आते हैं.
कई पीढ़ियों से चली आ रही मान्यता
रामदेव गोस्वामी पांडवों से जुड़ी यह कहानी कई पीढ़ियों से चली आ रही है. श्रद्धालुओं के बीच मंदिर को लेकर गहरी आस्था है. हालांकि पांडवों द्वारा मंदिर की स्थापना किए जाने की बात स्थानीय धार्मिक मान्यता के रूप में कही जाती है.
सावन में मंदिर परिसर में सुबह से शाम तक पूजा-पाठ का सिलसिला चलता रहता है. हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयकारों से पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय नजर आता है.
दूर-दूर से पहुंचते हैं भक्त
सावन के सोमवार और अन्य विशेष अवसरों पर आसपास के क्षेत्रों के अलावा दूर-दराज से भी श्रद्धालु बाबा पचरन नाथ के दर्शन के लिए पहुंचते हैं. भक्तों का कहना है कि मंदिर में पहुंचकर भगवान शिव की पूजा करने से उन्हें मन की शांति मिलती है.
सावन के महीने में बाबा पचरन नाथ मंदिर की रौनक देखते ही बनती है. स्थानीय लोगों के लिए यह मंदिर सिर्फ पूजा का स्थान नहीं, बल्कि उनकी आस्था, परंपरा और धार्मिक विश्वास से जुड़ा एक महत्वपूर्ण केंद्र है.