चित्रकूट का चंदन प्रसाद: जानें धार्मिक महत्व और इसे घर लाने की खास वजह
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चित्रकूट, जो अपनी धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहरों के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध है, यहां आने वाले श्रद्धालुओं के लिए सबसे खास और अनोखा प्रसाद चंदन माना जाता है. यह न केवल आस्था का प्रतीक है, बल्कि हर भक्त इसे प्रसाद के रूप में अपने साथ घर ले जाता है.
धर्म नगरी चित्रकूट अपनी धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहरों के लिए पूरे देश में जानी जाती है. यहां आने वाले श्रद्धालुओं के लिए सबसे खास और अनोखा प्रसाद चंदन माना जाता है, जिसे भक्त अपने साथ जरूर खरीदकर ले जाते हैं.

चित्रकूट में चंदन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि इसे प्रसाद के रूप में हर भक्त अपने साथ घर ले जाता है. कहा जाता है कि यही वह पावन स्थान है जहां गोस्वामी तुलसीदास का जन्म हुआ था और यहीं उन्होंने प्रभु श्रीराम का चंदन से तिलक किया था.

मान्यता है कि इसी चंदन तिलक के बाद तुलसीदास को प्रभु श्रीराम के साक्षात दर्शन हुए थे. तभी से चित्रकूट में चंदन का महत्व बढ़ गया. यहां आज भी एक दर्जन से अधिक प्रकार के चंदन उपलब्ध हैं, जिनकी खुशबू और रंग अलग-अलग होते हैं.

रामघाट और कामदगिरि के आसपास स्थित दुकानों पर चंदन सबसे अधिक बिकता है. स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि चंदन की खपत इतनी अधिक है कि पूरे जिले में रोजाना लाखों रुपए का कारोबार होता है. यहां 10 रुपए से लेकर 200 रुपए तक के पैकेट में चंदन आसानी से मिल जाता है.

दुकानदारों के अनुसार चित्रकूट के रामघाट सहित हर दुकान पर प्रतिदिन 10 से 15 हजार रुपए तक की चंदन बिक्री होती है. वहीं, कई आश्रमों में भी चंदन तैयार किया जाता है और श्रद्धालुओं को प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है.

चित्रकूट आने वाला हर भक्त यहां चंदन जरूर खरीदता है और इसे अपने माथे पर लगाकर स्वयं को धन्य मानता है. यही वजह है कि धर्म नगरी चित्रकूट में चंदन को प्रसाद का सबसे बड़ा दर्जा दिया गया है.

अगर चित्रकूट के चंदन की बात करें तो यहां स्थित तोता मुखी हनुमान मंदिर सहित रामघाट में बैठे साधु-संतों की ओर से भक्ति करने वाले श्रद्धालुओं को, जो मंदाकिनी नदी में स्नान कर पूजा-अर्चना करते हैं, चंदन का ही तिलक लगाया जाता है.

चित्रकूट के रामघाट में ही गोस्वामी तुलसीदास को चंदन लगाते समय श्रीराम के दर्शन हुए थे, जिसके बाद से चित्रकूट में चंदन का महत्व बढ़ गया है और भक्त पहले से ही इसकी पावनता जानकर यहां से चंदन खरीदकर ले जाते हैं.