ढाई बीघा में करेला उगाकर किसान बना लाखपति! बरसात में मिल रहे हैं बंपर रेट

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ढाई बीघा में करेला उगाकर किसान बना लाखपति! बरसात में मिल रहे हैं बंपर रेट


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बाराबंकी के किसान रिंकू ने पारंपरिक खेती छोड़कर करेले की खेती शुरू की और ढाई बीघा जमीन में 80-90 हजार रुपए तक मुनाफा कमाया. कम लागत, आसान तकनीक और बरसात में बढ़ती मांग के कारण करेले की खेती उनके लिए फायदेमंद सा…और पढ़ें

हाइलाइट्स

  • बाराबंकी के मनेरा गांव के किसान रिंकू करेले की खेती कर रहे हैं.
  • ढाई बीघा जमीन से एक फसल में 80 से 90 हजार रुपये तक का मुनाफा हो रहा है.
  • बरसात के मौसम में करेले की मांग बढ़ जाती है.
बाराबंकी: खेती में अब सिर्फ गेंहू- धान या पारंपरिक फसलों पर निर्भर रहना फायदे का सौदा नहीं रहा. आज के दौर में कई ऐसी सब्जियां हैं, जिन्हें कम लागत में उगाकर किसान बढ़िया मुनाफा कमा सकते हैं. बाराबंकी जिले के मनेरा गांव के युवा किसान रिंकू ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है. इन्होंने खाली पड़ी ज़मीन पर करेले की खेती शुरू कर एक नई मिसाल कायम कर दी है.

रिंकू पिछले 4-5 साल से सब्जियों की खेती कर रहे हैं, जिसमें शिमला मिर्च, टमाटर, लौकी और करेला शामिल है. लेकिन सबसे ज़्यादा मुनाफा उन्हें करेला दे रहा है. लोकल18 से बातचीत में रिंकू बताते हैं कि इस बार मैंने करीब ढाई बीघा जमीन में करेला लगाया है. इसमें एक बीघे की लागत 8 से 10 हजार रुपये आती है, लेकिन जब फसल तैयार होती है तो मुनाफा 80 से 90 हजार तक हो जाता है.

बरसात में बढ़ती है करेले की मांग
रिंकू बताते हैं कि बरसात के मौसम में करेले की मांग तेजी से बढ़ती है, क्योंकि बहुत कम किसान इस समय इसकी खेती करते हैं. ऐसे में बाज़ार में अच्छे दाम मिलते हैं और मुनाफा कई गुना बढ़ जाता है. सबसे बड़ी बात ये है कि एक बार लगाने के बाद डेढ़ महीने तक फसल लगातार मिलती रहती है.

कैसे करते हैं करेली की खेती?
रिंकू ने बताया कि सबसे पहले खेत की दो बार जुताई की जाती है. फिर मेड बनाकर करेले के बीज बोए जाते हैं. बीज अंकुरित होते ही पूरे खेत में बांस और डोरी का स्ट्रक्चर तैयार किया जाता है, जिस पर करेले की बेल चढ़ाई जाती है. इससे न केवल पौधे जल्दी बढ़ते हैं बल्कि फसल भी सुरक्षित रहती है. 60 से 65 दिन में फसल तैयार हो जाती है, जिसे किसान सीधे बाजार में बेचते हैं.

कम लागत, बड़ा मुनाफा
करेले की खेती का सबसे बड़ा फायदा ये है कि इसमें लागत बहुत कम आती है और उत्पादन काफी अच्छा होता है. रिंकू कहते हैं कि दूसरी फसलों की तुलना में करेले की खेती मेहनत कम और फायदा ज़्यादा देती है. उनका यह भी मानना है कि अगर युवा किसान समय और तकनीक का सही इस्तेमाल करें, तो सब्जियों की खेती से लाखों कमाए जा सकते हैं.

रिंकू ने कहा, “मैंने पारंपरिक खेती के साथ ही सब्जियों की ओर रुख किया और करेला सबसे फायदेमंद निकला. इस समय के भाव और कम प्रतिस्पर्धा के चलते इसकी डिमांड खूब है.”

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