तेज धूप हो या मूसलाधार बारिश, इन उपायों से पशु रहेंगे पूरी तरह स्वस्थ
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बीएचयू पशु चिकित्सालय में तैनात डॉक्टर विनोद ने बताया कि तेज धूप में पशुओं को लंबे समय तक खुले मैदान में नहीं छोड़ना चाहिए. अत्यधिक गर्मी के कारण पशुओं में हीट स्ट्रेस की समस्या हो सकती है, जिससे उनकी भूख कम हो जाती है और दूध देने वाले पशुओं का उत्पादन भी घट सकता है.
गर्मी के मौसम में जहां तेज धूप पशुओं के स्वास्थ्य पर बुरा असर डालती है, वहीं मानसून के दौरान होने वाली बारिश भी कई तरह की बीमारियों का कारण बन सकती है. ऐसे में पशुपालकों के लिए जरूरी है कि वे अपने पशुओं की विशेष देखभाल करें, ताकि दूध उत्पादन प्रभावित न हो और पशु स्वस्थ बने रहें.

बीएचयू पशु चिकित्सालय में तैनात डॉक्टर विनोद ने बताया कि तेज धूप में पशुओं को लंबे समय तक खुले मैदान में नहीं छोड़ना चाहिए. अत्यधिक गर्मी के कारण पशुओं में हीट स्ट्रेस की समस्या हो सकती है, जिससे उनकी भूख कम हो जाती है और दूध देने वाले पशुओं का उत्पादन भी घट सकता है. पशुओं को छायादार और हवादार स्थान पर रखना चाहिए यदि शेड की व्यवस्था हो तो उसकी छत पर घास-फूस या सफेद रंग का लेप करने से तापमान कम रखा जा सकता है.

गर्मी के दिनों में पशुओं को पर्याप्त मात्रा में स्वच्छ और ठंडा पानी उपलब्ध कराना बेहद जरूरी है. एक दुधारू पशु को दिनभर में कई बार पानी की आवश्यकता होती है. पानी की कमी होने पर शरीर में निर्जलीकरण की समस्या पैदा हो सकती है, इसके साथ ही हरे चारे और संतुलित आहार का भी ध्यान रखना चाहिए.
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बारिश के मौसम में पशुओं के रहने की जगह पर पानी जमा नहीं होने देना चाहिए. गीली और गंदी जगहों पर बैक्टीरिया तथा परजीवी तेजी से पनपते हैं, जिससे खुरपका-मुंहपका, गलघोंटू और त्वचा संबंधी रोगों का खतरा बढ़ जाता है. पशुशाला की नियमित सफाई और कीटाणुनाशक दवाओं का छिड़काव करना जरूरी है.

पशुपालकों को समय-समय पर पशुओं का टीकाकरण और स्वास्थ्य जांच भी करानी चाहिए. यदि पशु सुस्त दिखाई दे, खाना-पीना कम कर दे या बुखार जैसे लक्षण नजर आएं तो तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए.

बारिश में भीगने के बाद पशुओं को सूखे स्थान पर रखें और उनके शरीर को अच्छी तरह सुखाएं. लंबे समय तक नमी रहने से त्वचा संक्रमण और फंगल रोग हो सकते हैं. इसके अलावा पशुओं के चारे को भी सूखी और सुरक्षित जगह पर रखना चाहिए, क्योंकि भीगा हुआ या फफूंद लगा चारा स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक होता है.

सही देखभाल, स्वच्छ वातावरण और संतुलित आहार के जरिए पशुपालक तेज धूप और बारिश दोनों मौसमों में अपने पशुओं को स्वस्थ रख सकते हैं और बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं.