पीलीभीत टाइगर रिजर्व में बाघों के साथ बढ़ रहा इस दुर्लभ जीव का कुनबा, जंगल का राजा भी खाता है खौफ
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Pilibhit Tiger Reserve : यूपी का जंगल बाघों की संख्या तेजी से बढ़ने के चलते सुर्खियों में है, लेकिन बाघ बचाने की कवायद दूसरे वन्यजीवों के लिए भी वरदान साबित हो रही है. बाघों के साथ कई दुर्लभ जीवों का कुनबा भी ब…और पढ़ें
पीलीभीत. उत्तर प्रदेश के पीलीभीत टाइगर रिज़र्व को बाघों की संख्या तेज़ी से बढ़ाने के चलते दुनिया भर में ख्याति प्राप्त हो रही है. मगर यहां के बेहतर मैनेजमेंट के चलते न केवल बाघ बल्कि कई दुर्लभ जीवों का कुनबा भी बढ़ रहा है. बीते दिनों पीलीभीत टाइगर रिजर्व में मौजूद तृणभोजी वन्यजीवों की गणना करने के लिए वृहद रूप से जंगल के भीतर ट्रैप कैमरा सेटअप किए गए थे. इस गणना के आंकड़े वन्यजीव संरक्षण के लिहाज़ से काफी सकारात्मक साबित हुए. इसी दौरान कैमरों में कई अन्य दुर्लभ जानवर भी क़ैद हुए है. इनमें साही शामिल है.
पीलीभीत टाइगर रिज़र्व में साही की संख्या में भी काफ़ी बढ़ोतरी हुई है. टाइगर रिजर्व के जंगलों में साही का अनुमानित आंकड़ा 1037 बताया जा रहा है. PTR की बराही रेंज में 277, महोफ में 273, माला में 264, हरिपुर में 152 व दियोरिया में 71 सेही की संख्या आंकी गई है.
वन्यजीव विशेषज्ञ और स्वतंत्र शोधकर्ता प्रांजलि भुजबल Local 18 से बताते हैं कि साही का स्वभाव आक्रामक नहीं होता. यह एक शर्मीला जानवर है. रात्रिचर होने के साथ शाकाहारी भी होता है. अमूमन यह अपना बिल बना कर उसमें छिपकर रहता है और केवल भोजन के लिए बाहर निकलता है. इसकी पूंछ के हिस्से में कांटे होते हैं जो कठोर होते हैं. जैसे ही कोई बड़ा जानवर इस पर हमलावर करता है तो यह अपने बचाव में कांटों को खड़ा कर लेता है.
शेर-बाघ भी फीके
प्रांजलि के अनुसार, कई बार बाघ और तेंदुए जैसे वन्यजीव इसका शिकार करते समय इसके कांटों से घायल हो जाते हैं. पंजों में कांटा लग जाने से उनके शिकार पर असर पड़ता है, जो सीधे उनके सर्वाइवल से संबंधित होता है. साही की शारीरिक संरचना के मुताबिक इसके कांटों पर हल्का सा भी दाब पड़ने पर ये शरीर से अलग हो जाते हैं और दूसरे जानवर के शरीर में धंस जाते हैं.
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