बहराइच के इस पेड़ का नाम ‘गुदगुदी वाला पेड़’, छूते ही होती है रहस्यमयी चीज
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Bahraich News: बहराइच जिले में स्थित कतर्नियाघाट वन्यजीव में एक ऐसा अनोखा पेड़ है, जिसे गुदगुदाने वाले पेड़ के नाम से लोग जानते हैं. आखिर जानते हैं क्या है इस अनोखे पेड़ का रहस्य और क्यों इसे लोग कहते हैं गुदगुदाने वाला पेड़.
बहराइच: जिले में स्थित कतर्नियाघाट वन्यजीव अभयारण्य केवल अपने दुर्लभ जानवरों और घने जंगलों के लिए ही नहीं, बल्कि एक बेहद अनोखे पेड़ के लिए भी देश-दुनिया में प्रसिद्ध है. इस जंगल में मौजूद एक विशेष पेड़ अपनी अनोखी संवेदनशीलता के कारण पर्यटकों के बीच हमेशा चर्चा का विषय बना रहता है. जब भी कोई व्यक्ति इस पेड़ के तने को हल्के से छूता या सहलाता है, तो इसकी टहनियों और पत्तियों में अचानक कंपन शुरू हो जाता है. यही वजह है कि स्थानीय लोग और यहां आने वाले पर्यटक इसे प्यार से गुदगुदी करने वाला पेड़ या खुजली वाला पेड़ कहकर पुकारते हैं. कतर्नियाघाट आने वाला हर पर्यटक इस प्राकृतिक अजूबे का खुद अनुभव करने के लिए यहां रुकना नहीं भूलता.
कैसे सामने आया इस गुदगुदाने वाले पेड़ का रहस्य?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस विशाल पेड़ को किसी इंसान ने नहीं लगाया, बल्कि यह घने जंगल के प्राकृतिक वातावरण में खुद-ब-खुद उगा है. सालों पहले जब कतर्नियाघाट को ईको-टूरिज्म के रूप में पहचान मिली और यहां लोगों की आवाजाही शुरू हुई, तब एक पर्यटक की नजर सड़क किनारे खड़े इस पेड़ पर पड़ी. जैसे ही उस पर्यटक ने पेड़ के तने पर अपना हाथ रखा, पूरा पेड़ अचानक इस तरह हिलने लगा मानो उसे किसी ने सहला दिया हो. पर्यटक ने जब बार-बार हल्के हाथों से तने को छुआ, तो हर बार पेड़ की पत्तियों में हलचल देखने को मिली. देखते ही देखते यह खबर जंगल की आग की तरह फैल गई और आज वन्यजीवों के साथ-साथ यह पेड़ भी कतर्नियाघाट का एक बड़ा आकर्षण बन चुका है.
जंगल में कहां स्थित है यह अनोखा पेड़?
यदि आप कतर्नियाघाट की यात्रा पर जा रहे हैं और इस रहस्यमयी पेड़ को देखना चाहते हैं, तो इसके लिए आपको जंगल सफारी की गाड़ी का इंतज़ार करने की भी जरूरत नहीं है. जैसे ही आप कतर्नियाघाट के मुख्य टूरिस्ट हब की दिशा में बढ़ते हैं, उससे करीब 1 से 2 किलोमीटर पहले ही मुख्य मार्ग के दोनों ओर वन विभाग की बेरी कटिंग शुरू हो जाती है, इसी रोड के ठीक किनारे यह विशाल पेड़ स्थित है, जिसे गाइड और स्थानीय चालक भी पर्यटकों को दिखाते हैं.
चूंकि यह स्थान पूरी तरह से घने जंगल के मुख्य क्षेत्र कोर एरिया में आता है और यहां तेंदुए, हाथी व अन्य हिंसक वन्यजीवों की आवाजाही बनी रहती है, इसलिए गाड़ियों से उतरकर पेड़ के पास जाते समय बेहद सतर्कता और सावधानी बरतें. फिलहाल मानसून आने के बाद जंगल पूरी तरीके से सैलानियों के लिए बंद कर दिया जाता है, जो जंगल के रास्ते ज्यादातर कच्चे होते हैं और नवंबर माह में जब मौसम साफ हो जाता है तो फिर से खोल दिया जाता है.
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आर्यन सेठ, News18 Hindi में डिजिटल डेस्क पर जुड़े हैं और जनवरी 2026 से उत्तर प्रदेश की राजनीति, अपराध, प्रशासन, वायरल और अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर खबरें लिखते हैं. जामिया मिलिया इस्लामिया दिल्ल…
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