बांदा जैसी तपिश और पानी के लिए त्राहिमाम, प्रयागराज के इस ब्लॉक में हालात बदतर
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Prayagraj News: बुंदेलखंड का बांदा इस समय दुनिया का सबसे गर्म शहर है. बांदा से 150 किलोमीटर दूर प्रयागराज का शंकरगढ़ ब्लॉक भी भीषण गर्मी और पानी की किल्लत से जूझ रहा है. हालात बाद से बदतर हैं और लोग 10 किलोमीटर पैदल चलकर अपनी प्यास बुझा रहे हैं.
प्रयागराज के शंकरगढ़ ब्लॉक में भीषण गर्मी और जल संकट की दोहरी मार (Photo: Canva)
प्रयागराज. भीषण गर्मी और जल संकट की दोहरी मार झेल रहे उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले के शंकरगढ़ ब्लॉक में लोगों की जिंदगी बेहद मुश्किल हो गई है. भारत के सबसे गर्म शहर बांदा से महज तीन घंटे की दूरी पर स्थित इस क्षेत्र में लोग पीने का पानी लाने के लिए रोजाना 10 किलोमीटर तक पैदल चलने को मजबूर हैं.
शंकरगढ़ ब्लॉक के गांवों में पानी की गंभीर कमी है. न तो पर्याप्त पानी की व्यवस्था है और न ही बिजली. स्थानीय लोगों ने बताया कि यह समस्या सालों से चली आ रही है, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला जा रहा. एक स्थानीय निवासी ने बताया, “यहां पानी की भारी समस्या है. न पानी की सुविधा है, न बिजली. हमें हमेशा दूर से पानी लाना पड़ता है, कम से कम 10 किलोमीटर चलकर. यहां 150 लोग रहते हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है.”
प्रशासन का क्या कहना है?
प्रयागराज सहित पूरे उत्तर प्रदेश में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर बना हुआ है. बांदा में तो तापमान 48 डिग्री तक पहुंच गया है, जो देश में सबसे अधिक है. शंकरगढ़ इस गर्मी के केंद्र से ज्यादा दूर नहीं है, जिसके कारण यहां की स्थिति और भी बदतर हो गई है. प्रयागराज की एडिशनल डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट विनीता सिंह ने इस समस्या पर संज्ञान लिया है. उन्होंने कहा कि प्रशासन ने स्थिति की तुरंत समीक्षा के निर्देश दिए हैं और जरूरी मरम्मत का काम शुरू करने को कहा गया है. उन्होंने बताया कि पानी की समस्या वाले इलाकों में तत्काल टैंकर भेजने के निर्देश दिए गए हैं. हीटवेव को लेकर पिछले 23 दिनों से लगातार अलर्ट जारी किया जा रहा है. लोगों को गर्मी से बचने के लिए जागरूकता अभियान चलाया गया है. जिले के कई हिस्सों में कूलिंग सेंटर और आपातकालीन पानी की व्यवस्था की गई है.
क्या है समस्या की जड़?
शंकरगढ़ ब्लॉक में वर्षों से पानी की बुनियादी सुविधाओं का अभाव रहा है. गर्मियों में भूजल स्तर और नीचे चला जाता है, हैंडपंप सूख जाते हैं और पाइपलाइन व्यवस्था भी ठीक से काम नहीं करती. बिजली की कमी के कारण ट्यूबवेल भी नहीं चल पाते. यह स्थिति सिर्फ शंकरगढ़ तक सीमित नहीं है, बल्कि बुंदेलखंड के कई इलाकों में पानी और गर्मी की समस्या आम है.