बिहार में NDA या INDIA किसके साथ गठबंधन करेगी बसपा? मायावती ने खोल दिए पत्ते

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बिहार में NDA या INDIA किसके साथ गठबंधन करेगी बसपा? मायावती ने खोल दिए पत्ते


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Bihar Chunav: बसपा सुप्रीमो मायावती ने बिहार चुनाव को लेकर अपने पत्ते साफ कर दिए हैं. मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट शेयर करते हुए लिखा कि उनकी पार्टी बिहार में किसी भी गठबंधन का हिस्सा नहीं होगी….और पढ़ें

बिहार में NDA या INDIA किसके साथ गठबंधन करेगी बसपा? मायावती ने खोल दिए पत्तेUP Politics: बसपा सुप्रीमो मायावती ने बिहार चुनाव को लेकर किया बड़ा ऐलान

लखनऊ. बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर अपने पत्ते खोल दिए हैं. उन्होंने साफ कर दिया है कि उनकी पार्टी बिहार में किसी भी गठबंधन, चाहे वह कांग्रेस-आरजेडी की अगुवाई वाला INDIA गठबंधन हो या बीजेपी-जेडीयू का एनडीए, के साथ नहीं जाएगी. BSP आगामी चुनाव में अपने दम पर सभी 243 सीटों पर उतरेगी. यह ऐलान मायावती ने रविवार को अपने आधिकारिक X हैंडल पर किया.

मायावती ने कहा कि BSP ने बिहार विधानसभा चुनाव के लिए अपनी रणनीति तैयार कर ली है. पार्टी ने पिछले दो दिनों में वरिष्ठ नेताओं के साथ गहन विचार-विमर्श कर उम्मीदवारों के चयन और चुनावी तैयारियों को अंतिम रूप दिया. उन्होंने बिहार में पार्टी की कमान अपने भतीजे और राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद, केंद्रीय कोऑर्डिनेटर रामजी गौतम, और BSP की बिहार इकाई को सौंपी है. मायावती ने जोर देकर कहा कि सभी चुनावी कार्यक्रम उनके प्रत्यक्ष मार्गदर्शन में होंगे.

बिहार में BSP अपने बल पर चुनाव लड़ेगी. हमारा उद्देश्य बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर और मान्यवर कांशी राम जी के विचारों को जन-जन तक पहुंचाना है. हम किसी भी गठबंधन का हिस्सा नहीं बनेंगे,” मायावती ने अपने X पोस्ट में लिखा.

आकाश आनंद की अहम भूमिका

मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को बिहार में पार्टी के प्रचार और संगठन को मजबूत करने की जिम्मेदारी दी है. आकाश आनंद मध्य सितंबर से बिहार में ‘अधिकार यात्रा’ शुरू करेंगे, जो दो दर्जन जिलों को कवर करेगी. इस यात्रा का उद्देश्य दलित, पिछड़े, और अल्पसंख्यक समुदायों तक पहुंचकर BSP के आधार को मजबूत करना है. मायावती ने आकाश को हाल ही में फिर से पार्टी का राष्ट्रीय संयोजक बनाया है, जिससे उनकी भूमिका और बढ़ गई है.

बिहार में BSP की रणनीति

BSP ने बिहार को तीन जोन में बांटकर अपनी रणनीति बनाई है, जिसमें प्रत्येक जोन की जिम्मेदारी वरिष्ठ नेताओं को दी गई है. पार्टी का फोकस दलित और अति पिछड़ा (EBC) समुदायों के साथ-साथ अन्य जातियों पर भी है. मायावती ने अपनी रणनीति में ‘मायावती मॉडल’ को अपनाने की बात कही है, जिसमें जाटव/रविदास समुदाय के साथ अन्य जातियों को भी जोड़ा जाएगा. पार्टी सूत्रों के अनुसार, BSP बिहार में बेरोजगारी, शिक्षा, और स्वच्छ राजनीति जैसे मुद्दों पर जोर देगी. मायावती ने पहले भी कहा है कि उनकी पार्टी “सामाजिक परिवर्तन और आर्थिक उत्थान” के लिए काम करती है, और बिहार में भी यही एजेंडा रहेगा.

गठबंधन से दूरी क्यों?

मायावती ने हाल के वर्षों में गठबंधनों से दूरी बनाई है. 2019 के लोकसभा चुनाव में सपा के साथ गठबंधन के बाद BSP ने 10 सीटें जीती थीं, लेकिन 2024 में अकेले लड़कर पार्टी को एक भी सीट नहीं मिली. इसके बाद मायावती ने क्षेत्रीय दलों और राष्ट्रीय गठबंधनों (NDA और INDIA) से दूरी बनाने का फैसला किया. उन्होंने बिहार में भी इसी रणनीति को अपनाने का निर्णय लिया है, ताकि पार्टी अपनी स्वतंत्र पहचान बनाए रखे.

बिहार में चुनौतियां और संभावनाएं

बिहार में BSP के लिए चुनौतियां कम नहीं हैं. 2020 के विधानसभा चुनाव में पार्टी को केवल एक सीट (गोपालगंज) पर जीत मिली थी, लेकिन वहां भी BJP के सुबाश सिंह ने BSP के अनिरुद्ध प्रसाद को हराया था. इस बार मायावती की रणनीति दलित और EBC वोटों को एकजुट करने की है, जो बिहार की 36% आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं. इसके अलावा, पार्टी अल्पसंख्यक समुदायों, खासकर पसमांदा मुस्लिम वोटों को भी आकर्षित करने की कोशिश कर रही है. हालांकि, NDA और INDIA गठबंधन की मजबूत स्थिति के बीच BSP का अकेले लड़ना जोखिम भरा हो सकता है. विश्लेषकों का मानना है कि BSP के स्वतंत्र रूप से लड़ने से वोटों का बंटवारा हो सकता है, जो विपक्षी गठबंधन को नुकसान पहुंचा सकता है. फिर भी, मायावती का यह कदम उनकी पार्टी की स्वतंत्र छवि को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा दांव है.

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Amit Tiwariवरिष्ठ संवाददाता

Principal Correspondent, Lucknow

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