ब्रह्मोस मिसाइल में लगेगी ‘मेड इन नोएडा’ चिप! 500 करोड़ की यूनिट से 1800 लोगों
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गौतम बुद्ध नगर में ब्रह्मोस जैसी मिसाइल में लगने वाली सेमीकंडक्टर चिप का निर्माण होगा. एडिटेक और अमेरिकी कंपनी को 15 एकड़ भूमि आवंटित हुई है. 500 करोड़ निवेश से 1800 रोजगार और 25 करोड़ चिप्स सालाना उत्पादन का ल…और पढ़ें
हाइलाइट्स
- नोएडा में बनेगी ब्रह्मोस मिसाइल की चिप
- 500 करोड़ निवेश से 1800 लोगों को रोजगार
- हर साल 25 करोड़ चिप्स का उत्पादन होगा
ग्रेटर नोएडा- उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर जिले में अब देश की रक्षा ताकत को नई उड़ान मिलने जा रही है. यहां ब्रह्मोस जैसी मिसाइल में इस्तेमाल होने वाली सेमीकंडक्टर चिप का निर्माण किया जाएगा. इसके लिए यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) ने अमेरिका की आइस एमओएस और एडिटेक कंपनी के ज्वाइंट वेंचर को सेक्टर 10 में 15 एकड़ जमीन आवंटित करने की मंजूरी दे दी है.
एडिटेक सेमीकंडक्टर एंड एड ग्रुप के चेयरमैन संजय विश्वनाथन ने जानकारी दी कि यह यूनिट 180 नैनोमीटर की एडवांस चिप तैयार करेगी, जिस पर करीब 500 करोड़ रुपए का निवेश होगा. परियोजना से 1800 से ज्यादा लोगों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने की उम्मीद है. अभी तक इस तरह की चिप का निर्माण भारत में बहुत ही छोटे स्तर पर होता है.
चीन पर निर्भरता होगी कम
वर्तमान समय में भारत 95% चिप चीन से आयात करता है, खासकर रक्षा क्षेत्र में प्रयोग होने वाली हाईटेक चिप्स. ऐसे में इस यूनिट की स्थापना देश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम साबित होगी. यूनिट में हर साल करीब 25 करोड़ से ज्यादा चिप्स का उत्पादन किया जाएगा, जिनका इस्तेमाल वाहनों, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और मिसाइलों में किया जाएगा.
इन सेमीकंडक्टर चिप्स का उपयोग ब्रह्मोस मिसाइल, रॉकेट और फाइटर जेट्स जैसे अत्याधुनिक रक्षा उपकरणों में किया जाएगा. सेंसर फेब चिप किसी भी रॉकेट या मिसाइल को सटीक दिशा और लक्ष्य तक पहुंचने में मदद करती है, जिससे यह मिशन की सफलता में अहम भूमिका निभाती है. इसके अलावा कंपनी पावर इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए भी अलग से 15 एकड़ जमीन की मांग कर रही है.
हेल्थकेयर और डिफेंस सेक्टर के लिए भी बनेंगे सेंसर
एडिटेक कंपनी अपने जापानी पार्टनर के साथ मिलकर एयरोस्पेस, डिफेंस, हेल्थकेयर, ऊर्जा और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्रों में काम आने वाले एडवांस सेंसर का निर्माण भी करेगी. इससे न सिर्फ देश में तकनीकी विकास को गति मिलेगी, बल्कि भारत की दूसरे देशों पर तकनीकी निर्भरता भी कम होगी.
यमुना प्राधिकरण की ओर से मिली हरी झंडी
यमुना विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी अरुणवीर सिंह ने बताया कि कंपनी को जमीन आवंटन के लिए लेटर ऑफ इंटेंट (LOI) जारी कर दिया गया है. हाल ही में शासन स्तर पर कंपनी के अधिकारियों और प्राधिकरण के बीच बैठक भी हुई थी. यह परियोजना इस क्षेत्र की दूसरी सेमीकंडक्टर यूनिट होगी और इसके निर्माण की प्रक्रिया को जल्द से जल्द शुरू किया जाएगा.