ब्रिटिश खजाने की रक्षा करते थे सिपाही, यूपी के इस कुआं में पीते थे पानी, अब बदल रही इसकी तस्वीर

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ब्रिटिश खजाने की रक्षा करते थे सिपाही, यूपी के इस कुआं में पीते थे पानी, अब बदल रही इसकी तस्वीर


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Ballia Latest News: बलिया का ऐतिहासिक कुआं, जो ब्रिटिश सिपाहियों का पानी का स्रोत था, अब स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की यादों से जुड़ा है. इसका जीर्णोद्धार शुरू हुआ है.

इस कुएं से जुड़ी है पुरानी यादें.

बलिया: आज हम आपको एक ऐसे ऐतिहासिक कुआं के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसमें देश को आजाद करने वाले स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और बलिदानियों की यादें जुड़ी हुई है. ये वही ऐतिहासिक कुआं है, जिसका परिसर भी ऐतिहासिक है. जी हां ऐतिहासिक कोषागार के ऐतिहासिक कुएं की कहानी बड़ी रोचक है. यहां आज भी अंग्रेजों के जमाने की तिजोरिया दिखाई देती है. यह वही स्थान है जहां आजादी के पहले ब्रिटिश खजाने की रखवाली करने वाले सिपाही पानी पीते थे और आजा बलिया दी के बाद स्वतंत्रता संग्राम सेनानी यहीं पर बैठकर सुकून और शांति का अनुभव करते थे.

इतिहासकार डॉ शिवकुमार सिंह ने कहा कि, “ब्रिटिश सरकार के मुलाजिमों और गारदो को पानी पिलाने वाले ऐतिहासिक कुएं के कहानी बड़ी रोचक है. ब्रिटानिया हुकूमत के छक्के छुड़ाने वाले बलिया जिले के कोषागार परिसर मे स्थित इस ऐतिहासिक कुएं से आजादी के पहले ब्रिटिश सरकार के अधिकारी कर्मचारी और ब्रिटिश खजाने की रखवाली करने वाले सिपाही पानी पीते थे.

जमींदार महादेव प्रसाद ने कराया था निर्माण
आजादी के बाद सन 1975 से सरकार ने जब स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को पेंशन देना शुरु किया तब जिले भर के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी यहां आने लगे. यहीं पर सेनानी हंसी ठहाके भी लगाते थे. इस कुएं का पानी पीते थे. इस कुंए का निर्माण हनुमानगंज के जमींदार रईस बाबू महादेव प्रसाद ने कराया था.

ऐतिहासिक धरोहर को बचाना खुद की जिम्मेदारी
कहा कि इस ऐतिहासिक कुएं को एक बार फिर वरिष्ठ कोषाधिकारी आनंद दुबे के नेतृत्व में जीवनदान मिल रहा है. यह जनपद के लिए बड़े गर्व की बात है. आने वाले भविष्य में जनपद के तमाम ऐतिहासिक कुओं पर इसका प्रभाव पड़ेगा. लोगों के लिए यह एक बड़ा प्रेरणा स्रोत बनेगा, ऐसा काम हर किसी को करना चाहिए. उन्होंने इस कार्य के लिए CTO को धन्यवाद ज्ञापित किया है. कहा कि अपने धरोहर को बचाना खुद की जिम्मेदारी है.

पूजा पाठ के साथ शुरू हुआ कुएं का जीर्णोद्धार
CTO बलिया आनंद दुबे ने कहा कि, “आज इस ऐतिहासिक कुएं का जीर्णोद्धार की शुरुआत हो चुकी है”. ईश्वर के पूजा याचना के बाद खुद वरिष्ठ कोषाधिकारी ने अपने हाथों से साफ सफाई की. उन्होंने संदेश दिया कि हमें अपने ऐतिहासिक धरोहरों के अस्तित्व को बचाना चाहिए. इन धरोहरों में हमारी प्राचीन यादें और बातें छुपी होती हैं. इसका विकास होने से न केवल ऐतिहासिक धरोहर सुरक्षित होगा बल्कि, पर्यावरण में भी काफी सपोर्ट मिलेगा.

आने वाले समय में कुछ ऐसा होगा तस्वीर
उन्होंने बताया कि जल ही जीवन है, जल के बिना जिंदगी अधूरी है. इसके पास ग्रेनाइट पत्थर लगाए जाएंगे. इसके चबूतरे को ऊंचा किया जा रहा है. आने वाले भविष्य में इसकी तस्वीर पूरी तरह से बदल जाएगी. यहां भगवान शिव की मूर्ति लगेगी जिनकी जटाओं से पानी निकलेगा और झरना इत्यादि तमाम व्यवस्था किया जा रहा है.

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अभिजीत चौहान

न्‍यूज18 हिंदी डिजिटल में कार्यरत. वेब स्‍टोरी और AI आधारित कंटेंट में रूचि. राजनीति, क्राइम, मनोरंजन से जुड़ी खबरों को लिखने में रूचि.

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ब्रिटिश खजाने की रक्षा करते थे सिपाही, यूपी के इस कुआं में पीते थे पानी



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