मथुरा में आज भी है वो चमत्कारी पेड़, जहां श्रीकृष्ण किया करते थे विश्राम….

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मथुरा में आज भी है वो चमत्कारी पेड़, जहां श्रीकृष्ण किया करते थे विश्राम….


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Mathura News: भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाएं मथुरा और ब्रज में पूजनीय हैं. गोकुल के नंद भवन में पारस वृक्ष है, जहां बाल कृष्ण विश्राम करते थे. वासुदेव ने यमुना पार कर श्रीकृष्ण को गोकुल पहुंचाया था.

हाइलाइट्स

  • गोकुल के नंद भवन में पारस वृक्ष है.
  • बाल कृष्ण ने इस वृक्ष के नीचे विश्राम किया था.
  • वासुदेव ने श्रीकृष्ण को यमुना पार कर गोकुल पहुंचाया.

मथुरा: भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाएं सिर्फ मथुरा या ब्रज में ही नहीं, बल्कि पूरे ब्रह्मांड में पूजनीय हैं. उनकी लीलाओं की शुरुआत बचपन में ही हो गई थी. जब उन्हें कंस की जेल से वासुदेव गोकुल ले गए, तब से लेकर उन्होंने यहां चलना सीखा और अपनी बाल लीलाओं से गोकुल की धरती को पवित्र कर दिया.

गोकुल के नंद भवन में आज भी एक ऐतिहासिक वृक्ष खड़ा है, जिसे “पारस वृक्ष” कहा जाता है. मान्यता है कि इसी वृक्ष के नीचे बाल कृष्ण विश्राम करते थे. यह वृक्ष द्वापर युग से आज तक नंद भवन के प्रांगण में मौजूद है.

वासुदेव ने यमुना पार कर गोकुल पहुंचाया था श्रीकृष्ण को
कथाओं के अनुसार, जब कंस की जेल में श्रीकृष्ण का जन्म हुआ, उस समय घनघोर बारिश और आंधी-तूफान चल रहा था. वासुदेव उन्हें गोकुल ले जाने के लिए निकल पड़े. रास्ते में यमुना जी ने श्रीकृष्ण के चरणों को स्पर्श करने के लिए अपना जलस्तर बढ़ा दिया. जैसे ही वासुदेव के कंधे पर विराजमान श्रीकृष्ण के चरण यमुना को छुए, यमुना शांत हो गईं और रास्ता खुल गया.

वासुदेव श्रीकृष्ण को बाबा नंद के घर छोड़ आए और वहां से योगमाया को लेकर वापस मथुरा लौटे. यहीं से श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं की शुरुआत हुई.

पारस वृक्ष की रहस्यमयी मान्यता 
नंद भवन में खड़ा यह पारस वृक्ष सामान्य पीपल के पेड़ से अलग दिखाई देता है. स्थानीय पुजारी मोर मुकुट पाराशर के अनुसार, यह पेड़ द्वापर युग से यहां मौजूद है और इसे देखने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं. उन्होंने बताया कि यह वृक्ष सिर्फ नंद भवन में ही पाया जाता है और कहीं नहीं.

मनौती मांगने पर होता है चमत्कार
श्रद्धालुओं की मान्यता है कि जो भी व्यक्ति इस वृक्ष पर अपनी मनौती की डोर बांधता है, उसकी सभी इच्छाएं पूरी होती हैं. जब मनोकामना पूरी हो जाती है, तो लोग अपनी श्रद्धा अनुसार भगवान को भोग अर्पित करते हैं. यह स्थान श्रीकृष्ण के बाल्यकाल की लीलाओं का जीवंत प्रमाण है और आज भी लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है.

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