‘मैं लड़का नहीं लड़की….’! प्राइवेट पार्ट काटने वाले छात्र का फिर छलका दर्द, कहा- पछतावा हो रहा, लेकिन…

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‘मैं लड़का नहीं लड़की….’! प्राइवेट पार्ट काटने वाले छात्र का फिर छलका दर्द, कहा- पछतावा हो रहा, लेकिन…


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UP News: प्रयागराज में यूपीएससी की तैयारी कर रहे एक 22 साल के छात्र ने खुद को लड़की मानते हुए यूट्यूब वीडियो देखकर जेंडर बदलने की खतरनाक कोशिश की. अब अस्पताल में इलाज चल रहा है.

सांकेतिक तस्वीर
प्रयागराज: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से हाल ही दिल झकझोर देने वाला मामला सामने आया था. यहां UPSC की तैयारी कर रहे एक 17 वर्षीय छात्र ने खुद को लड़की बनाने की चाहत में ऐसा खतरनाक कदम उठाया था कि उसके जान पर बन आई. युवक ने अपने ही प्राइवेट पार्ट को सर्जिकल ब्लेड से काट दिया. इस घटना के बाद उसकी हालत गंभीर हो गई और उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया. अब छात्र को अपनी गलती का अहसास हो रहा है. मगर, उसका कहना है कि उसे लड़कियों में कोई इंट्रेस्ट ही नहीं है. उसे लगता है कि उसकी आवाज भी लड़कियों जैसी ही है. आइये जानते हैं पूरा मामला…

अमेठी का रहने वाला छात्र इन दिनों प्रयागराज सिविल लाइंस एरिया में किराये का कमरा लेकर यूपीएससी की तैयारी कर रहा था. उसके पिता एक किसान हैं और वह माता-पिता की इकलौती संतान है. सीबीएसई बोर्ड से इंटर की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद परिजनों ने बड़ी उम्मीदों के साथ उसे ग्रेजुएशन के साथ यूपीएससी की तैयारी करने के लिए प्रयागराज भेजा था, लेकिन उसके मन में कुछ और ही चल रहा था.

वह गूगल और यू-ट्यूब पर अक्सर लड़का से लड़की बनने की जानकारी लेता रहता था. वह प्रयागराज में कटरा के एक निजी चिकित्सक से मिला और उससे जानकारी ली. उसने डॉक्टर को बताया कि वह लड़की की तरह फील करता है. शरीर से लड़का है. उसने चिकित्सक से लड़की बनने की इच्छा जाहिर की. इस पर डॉक्टर ने कहा कि तुम्हें इसके लिए सबसे पहले अपना निजी अंग काटना होगा. पूरा तरीका भी समझाया कि घर पर ही ये सब कैसे कर सकते हैं. छात्र भी डॉक्टर की बातों में आ गया. उसने एनेस्थीसिया का इंजेक्शन, सर्जिकल ब्लेड, रुई और बाकी सामान खरीदा. फिर कमरे में अकेले ही खुद को एनेस्थीसिया का इंजेक्शन लगाया. इससे कमर के नीचे का हिस्सा सुन्न हो गया. फिर अपने ही हाथों से निजी अंग काट दिया और मरहम पट्टी कर ली. करीब छह घंटे बाद एनेस्थीसिया का असर कम होने पर वह दर्द से तड़प उठा.

दर्द की दवा खाने पर भी कुछ आराम नहीं मिला तो मदद के लिए मकान मालिक को आवाज लगाई. इसके बाद एंबुलेंस की मदद से उसे बेली अस्पताल लाया गया, जहां से एसआरएन अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया. यहां सर्जरी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. संतोष सिंह ने प्राथमिक उपचार के बाद केस को प्लास्टिक सर्जरी विभाग के हवाले कर दिया.

अस्पताल के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. संतोष सिंह ने बताया कि छात्र अब अपनी की गई गलती महसूस कर रहा है और परिजनों की सहमति से वह वापस लड़का बनने का (reconstructive) इलाज कराना चाहता है. प्लास्टिक सर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ. मोहित जैन ने कहा कि छात्र के निजी अंग शरीर से पूरी तरह अलग नहीं हुए थे, पर वे डैमेज हुए हैं, इसलिए कई विशेषज्ञों के साथ मिलकर उसे सामान्य स्थिति में लाने का प्रयास जारी रखा जा रहा है. अस्पताल की टीम ने विभिन्‍न संबंधित विभागों के डॉक्टरों से परामर्श लेकर सर्जरी की योजना बनाई है और शुरुआती आशा सकारात्मक दिखाई दे रही है.

छात्र ने डॉक्टरों से कहा, ‘मैं लड़का नहीं हूं, लड़की हूं, यह बात कोई नहीं मानता, इसीलिए मैंने यह कदम उठाया. ‘ डॉक्टरों के अनुसार वह ‘जेंडर डिस्फोरिया’ नामक मानसिक स्थिति से गुजर रहा है.

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‘मैं लड़का नहीं लड़की….’! प्राइवेट पार्ट काटने वाले छात्र का फिर छलका दर्द



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