यूरिया नहीं मिला तो घबराएं नहीं! कम खर्च में धान की फसल को मिलेगा पूरा पोषण, जानें कैसे?

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यूरिया नहीं मिला तो घबराएं नहीं! कम खर्च में धान की फसल को मिलेगा पूरा पोषण, जानें कैसे?


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यूरिया नहीं मिला तो घबराएं नहीं! कम खर्च में धान की फसल को मिलेगा पूरा पोषण

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Urea Fertilizer Alternative for Crops: धान की बुवाई का सीजन शुरू होते ही यूरिया की भारी किल्लत ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. धान के बेहतर विकास और हरियाली के लिए यूरिया को सबसे जरूरी माना जाता है, लेकिन इसकी कमी के कारण अब फसल के प्रभावित होने का खतरा मंडरा रहा है. किसानों की इसी बड़ी परेशानी को देखते हुए कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी प्रोफेसर डॉ. आई.के. कुशवाहा ने यूरिया के बेहद सस्ते और असरदार विकल्प साझा किए हैं. जानिए कैसे मात्र 5 ग्राम के घोल और बीज-पौध उपचार की मदद से आप कम खर्च में यूरिया की कमी को पूरा कर बंपर पैदावार पा सकते हैं.

सहारनपुर: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जनपद में इन दिनों किसान बड़े पैमाने पर धान की खेती की तैयारियों में जुटे हैं. धान की बुवाई और शुरुआती विकास में यूरिया की सबसे अहम भूमिका होती है, लेकिन इस समय बाजार में यूरिया की भारी किल्लत देखने को मिल रही है, जिससे किसान बेहद परेशान हैं. किसानों की इसी गंभीर समस्या का समाधान लेकर आए हैं कृषि वैज्ञानिक, जिन्होंने यूरिया के कुछ ऐसे बेहतरीन और वैज्ञानिक विकल्प बताए हैं, जिनका इस्तेमाल करके किसान यूरिया की कमी को पूरा कर सकते हैं और अपनी लागत भी घटा सकते हैं.

धान की फसल के लिए क्यों जरूरी है यूरिया?
यूरिया मुख्य रूप से पौधों के लिए नाइट्रोजन का सबसे बड़ा स्रोत माना जाता है. इसमें चार मूल तत्व- कार्बन, हाइड्रोजन, ऑक्सीजन और नाइट्रोजन पाए जाते हैं. यूरिया का इस्तेमाल फसल में गाढ़ा हरा रंग लाने के साथ ही पौधों की शाखाओं और पत्तियों के विकास को तेजी से बढ़ाता है. इसमें मौजूद नाइट्रोजन पौधों में क्लोरोफिल के निर्माण में मदद करती है, जिससे पत्तियां स्वस्थ रहती हैं और भोजन बनाने की प्रक्रिया तेज होती है. यह नाइट्रोजन को अमीनो एसिड में बदलकर पौधों में प्रोटीन का स्तर बढ़ाता है, जिससे फसल का संपूर्ण विकास होता है.

रोपाई के समय करें ये छोटा सा उपाय
कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी व प्रोफेसर डॉ. आई.के. कुशवाहा ने किसानों को यूरिया की कमी से निपटने के लिए बेहद प्रभावी तरीके बताए हैं. जिनमें पहला है.

  • सड़ी गोबर की खाद और कल्चर- फसल की शुरुआती अवस्था में किसान अच्छी तरह से सड़ी हुई गोबर की खाद में कुछ जरूरी बायो-कल्चर मिलाकर उसे अपने खेत की मिट्टी में अच्छे से मिक्स कर दें.
  • बीज और पौध का उपचार- धान के बीजों को भिगोते समय NPK 19:19:19 या 20:20:20 का इस्तेमाल करें. इसके लिए 5 ग्राम एनपीके को प्रति लीटर पानी के हिसाब से घोल लें. बुवाई से पहले बीजों को इसमें उपचारित करें. इसके अलावा, जब धान की पौध की रोपाई का समय आए, तो रोपाई से ठीक आधा घंटा पहले धान की पौध की जड़ों को इस एनपीके घोल में डुबोकर रखें. ऐसा करने से शुरुआती दिनों में पौधे को जितनी यूरिया की जरूरत होती है, उसकी सौ प्रतिशत पूर्ति हो जाती है.

छिड़कने के बजाय घोल बनाकर करें छिड़काव
डॉ. कुशवाहा ने बताया कि अगर किसानों के पास यूरिया की मात्रा कम है और धान का रकबा ज्यादा है, तो वे यूरिया को सीधे खेत में बिखेरने के बजाय उसका पानी में घोल बनाकर फसल के ऊपर सीधे स्प्रे करें. इससे दवा सीधे पत्तियों के माध्यम से पौधों को मिलती है और यूरिया की बर्बादी नहीं होती.

यूरिया से भी ज्यादा फायदेमंद है NPK का इस्तेमाल
अगर आप यूरिया की जगह एनपीके (NPK) का इस्तेमाल करते हैं, तो यह फसल को तीन गुना फायदा पहुंचाता है. एनपीके में 20% नाइट्रोजन, 20% फास्फोरस और 20% पोटाश होता है. जहां इसका नाइट्रोजन भाग पौधे में हरियाली और तंदुरुस्ती लाता है, वहीं इसमें मौजूद फास्फोरस पौधों की जड़ों का शानदार विकास करता है. इसके साथ ही पोटाश का इस्तेमाल करने से पौधों की भोजन ग्रहण करने की क्षमता बढ़ती है और फसल में रोगों व बीमारियों से लड़ने की ताकत भी मजबूत होती है. किसान इन वैज्ञानिक तरीकों को अपनाकर यूरिया की किल्लत के बीच भी अपनी फसल को सुरक्षित रख सकते हैं.

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Seema Nath

सीमा नाथ 6 साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत शाह टाइम्स में रिपोर्टिंग के साथ की जिसके बाद कुछ समय उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम …और पढ़ें



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