रक्षाबंधन की शुरुआत: सबसे पहले पत्नी ने पति को बांधी राखी, जानें पूरी कहानी

0
रक्षाबंधन की शुरुआत: सबसे पहले पत्नी ने पति को बांधी राखी, जानें पूरी कहानी


Last Updated:

रक्षाबंधन पर बहनें भाई की कलाई में राखी बांधती हैं और भाई उनकी रक्षा का वचन देता है. ज्योतिष पंडित कल्कि राम के अनुसार, रक्षाबंधन की शुरुआत भविष्य पुराण, महाभारत, स्कंद पुराण और पद्म पुराण में वर्णित कथाओं से हुई थी. जानिए सब कुछ…

 रक्षाबंधन के दिन बहनें अपने भाई की कलाई में राखी बांधकर उनके स्वास्थ्य और दीर्घ आयु की कामना करती हैं. इसके बदले में भाई बहनों की रक्षा का वचन देता है. अयोध्या के ज्योतिष पंडित कल्कि राम बताते हैं कि रक्षाबंधन को लेकर कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं.

ayodhya

रक्षाबंधन की शुरुआत भविष्य पुराण के अनुसार हुई थी, तो महाभारत काल में भी इसका प्रत्यक्ष उदाहरण देखने को मिलता है. इसके अलावा स्कंद पुराण और पद्म पुराण के अनुसार भी रक्षाबंधन की शुरुआत हुई थी.

ayodhya

भविष्य पुराण के मुताबिक एक बार जब देवता और दानव में युद्ध हुआ, तब दानव देवताओं पर भारी पड़ने लगे. भयंकर युद्ध चल रहा था, जिसके बाद देवराज इंद्र चिंतित हो रहे थे. तब उन्होंने देवगुरु बृहस्पति के पास जाकर सहायता मांगी. देवगुरु बृहस्पति के कहने पर इंद्रदेव की पत्नी शची ने रेशम का एक धागा मंत्र शक्ति से पवित्र कर अपने पति की कलाई में बांधा. उस दिन तिथि भी थी सावन की पूर्णिमा. कहा जाता है कि इस सृष्टि में पहली बार रक्षा सूत्र एक पत्नी ने अपने पति को बांधा था.

ayodhya

महाभारत काल के अनुसार, जब शिशुपाल ने भगवान श्री कृष्ण के अपमान की हद पार कर दी, तब भगवान श्री कृष्ण ने शिशुपाल का वध सुदर्शन चक्र से किया था. इस दौरान उनकी उंगली कट जाती है. यह देखकर द्रौपदी ने अपनी साड़ी का आंचल फाड़ कर भगवान श्री कृष्ण की उंगली पर बांध दिया. कहा जाता है कि कृष्ण ने चीर हरण के समय द्रौपदी की लाज बचाकर एक भाई का कर्ज अदा किया था, और उस दिन भी सावन की पूर्णिमा तिथि थी.

Ayodhya

इसके अलावा रक्षाबंधन को लेकर एक कथा और प्रचलित है. स्कंद पुराण और पद्म पुराण के अनुसार कहा जाता है कि जब भगवान विष्णु ने अपने बावन अवतारों में दो पग में असुर राजा बलि के सारे आकाश, पाताल और धरती नाप लिए, तो तीसरे पग में राजा बलि ने कहा, “मेरे सर पर रखिए.” जिस पर भगवान विष्णु प्रसन्न हुए और राजा बलि को रसातल का राजा बना दिया. वामन अवतार के बाद भगवान विष्णु वैकुंठ धाम नहीं पहुंचे, जिससे लक्ष्मी जी चिंतित हो गईं. ये सब बातें जानकार नारद जी की सलाह पर लक्ष्मी जी राजा बलि के पास गईं और रक्षासूत्र बांधकर उसे अपना भाई बना लिया. संयोग से वह तिथि भी सावन की पूर्णिमा थी.

ayodhya

धार्मिक मान्यता के अनुसार कहा जाता है कि इन कथाओं के बाद बहनों की ओर से भाइयों की कलाई में रक्षा सूत्र बांधने की परंपरा शुरू हुई, जो समय के साथ जन-जन में लोकप्रिय भी हो गई.

attribution

सावन माह की पूर्णिमा तिथि को हर साल रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाता है. इस बार रक्षाबंधन 9 अगस्त को मनाया जाएगा. 9 अगस्त के दिन कई शुभ योग बन रहे हैं, जिनमें रक्षाबंधन बांधने से भाई-बहन के बीच अटूट प्रेम बढ़ेगा.

homedharm

रक्षाबंधन की शुरुआत: सबसे पहले पत्नी ने पति को बांधी राखी, जानें पूरी कहानी



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *