विश्व की सबसे खूबसूरत इमारत ‘ताजमहल’ से जुड़े ऐसे 8 फैक्ट, जिन्हें नहीं जानते होंगे आप

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विश्व की सबसे खूबसूरत इमारत ‘ताजमहल’ से जुड़े ऐसे 8 फैक्ट, जिन्हें नहीं जानते होंगे आप


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Agra Taj Mahal Facts : आगरा के ताजमहल का निर्माण मुगल बादशाह शाहजहां ने अपनी प्रिय पत्नी मुमताज महल की याद में कराया था. सन् 1632 में इसका निर्माण कार्य शुरू हुआ और इसे पूरा होने में करीब 22 वर्ष लग गए. आज इतनी सदियों बाद भी हर कोई इसकी खूबसूरती देख हैरान रह जाता है. देश विदेश से लाखों लोग रोजाना यहां आते हैं. कई सारे इससे जुड़े ऐसे तथ्य हैं, जो आप शायद नहीं जानते होंगे. आइए आज हम आपको बताते हैं. 

इतिहासकार बताते है कि मुमताज महल का निधन सन् 1631 में बुरहानपुर में हुआ था. उनकी अंतिम इच्छा थी कि उनकी याद में एक ऐसी इमारत बनाई जाए जो प्रेम का प्रतीक बने. इसी भावना से शाहजहां ने ताजमहल का निर्माण कराया, जो आज विश्वभर में मोहब्बत की मिशाल को पेश करता है. आगरा के ताजमहल को बनने में उस दौर में 22 साल लगे थे. इस भव्य इमारत को 20 हजार से अधिक मजदूरों ने मिलकर बनाया था.

आगरा के इतिहासकार अनुराग पालीवाल कहते है कि ताजमहल के निर्माण में लगभग 20 हजार से भी अधिक कारीगरों, शिल्पकारों और मजदूरों ने कार्य किया था. इनमें भारत के अलावा फारस, तुर्की और मध्य एशिया से आए विशेषज्ञ भी शामिल थे. सफेद संगमरमर राजस्थान के मकराना से लाया गया, जबकि जड़ाई के लिए कीमती पत्थर अलग-अलग देशों से मंगाए गए थे. उन्होंने कहा कि ताजमहल की नक्काशी, पत्थरों की जड़ाई और सुलेख कला आज भी दुनिया के वास्तु विशेषज्ञों को आकर्षित करती है. यह निर्माण उस समय की इंजीनियरिंग और कला का बेहतरीन उदाहरण माना जाता है.

आगरा में स्थित ताजमहल को लेकर कई लोगों का दावा रहता है कि यह दिन में तीन बार रंग बदलता है. दरअसल, इसके पीछे का रहस्य है खूबसूरत सफेद पत्थर और उस और पड़ने वाली सूर्य की किरण. इतिहासकार बताते है कि ताजमहल की सबसे रोचक विशेषताओं में से एक यह है कि दिन के अलग-अलग समय पर इसका रंग बदलता हुआ दिखाई देता है. सूर्योदय के समय ताज हल्का गुलाबी नजर आता है. वहीं दोपहर में यह चमकदार सफेद दिखाई देता है और सूर्यास्त के समय सुनहरी या हल्की नारंगी छटा लिए हुए लगता है. पूर्णिमा की रात चांदनी में इसका सौंदर्य और भी मनमोहक हो जाता है. विशेषज्ञों के अनुसार, यह प्रभाव संगमरमर पर पड़ने वाली प्राकृतिक रोशनी के कारण दिखाई देता है.

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आगरा का ताजमहल यमुना किनारे स्थित है. इतिहासकार कहते है कि ताजमहल का निर्माण यमुना नदी के किनारे किया गया, जो केवल सौंदर्य के लिए नहीं बल्कि वास्तु और निर्माण की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण था. उन्होंने कहा कि नदी के किनारे की नमी और विशेष नींव तकनीक ने इस विशाल संरचना को स्थिर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. इसके अलावा यमुना में पड़ने वाला ताजमहल का प्रतिबिंब इसकी सुंदरता को कई गुना बढ़ा देता है. यही कारण है कि मेहताब बाग से दिखाई देने वाला ताजमहल का दृश्य पर्यटकों के बीच बेहद लोकप्रिय है. यहां से देशी विदेशी पर्यटक ताज का पुरा व्यू अपने केमरो में कैद करते है.

आगरा स्थित ताजमहल का निर्माण मुगल काल में हुआ था. उस दौर में आधुनिक मशीन आदि तकनीक नहीं थी. उसके बावजूद इसके निर्माण में कई महत्वपूर्ण बिन्दुओं पर ध्यान दिया गया था. आगरा के इतिहासकार पालीवाल कहते है कि ताजमहल की चारों मीनारें बिल्कुल सीधी दिखाई देती हैं, लेकिन वास्तव में उन्हें हल्का-सा बाहर की ओर झुकाकर बनाया गया है. उन्होंने कहा कि वास्तु विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसा इसलिए किया गया ताकि भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदा आने पर यदि मीनारें गिरें तो मुख्य मकबरे पर न गिरें. यह उस समय की अद्भुत इंजीनियरिंग का उदाहरण माना जाता है. सदियों बाद भी यह निर्माण तकनीक लोगों को आश्चर्यचकित करती है और ताजमहल की मजबूती का प्रमाण मानी जाती है.

आगरा स्थित ताजमहल की खूबसूरती को देखने के लिए वर्तमान में हजारों देशी विदेशी पर्यटक आगरा आते है. इतिहासकार अनुराग पालीवाल ने कहा कि ताजमहल को सन् 1983 में यूनेस्को ने विश्व धरोहर स्थल का दर्जा दिया है. इसके बाद इसकी वैश्विक पहचान और भी अधिक बढ़ गई. उन्होंने कहा कि हर वर्ष भारत और विदेशों से लाखों पर्यटक इसे देखने आगरा पहुंचते हैं. इसकी वास्तुकला, ऐतिहासिक महत्व और कलात्मक सुंदरता इसे दुनिया की सबसे प्रसिद्ध इमारतों में शामिल करती है. ताजमहल भारतीय पर्यटन की पहचान भी है और देश की सांस्कृतिक विरासत का अमूल्य हिस्सा माना जाता है.

ताजमहल के मुख्य मकबरे पर कुरान की कई खूबसूरत आयतें लिखी हुई है. इतिहासकार ने कहा कि ताजमहल के मुख्य द्वार और मकबरे की दीवारों पर कुरान की अनेक आयतें बेहद सुंदर सुलेख शैली में लिखी गई हैं. इन आयतों को इस प्रकार उकेरा गया है कि नीचे से देखने पर सभी अक्षरों का आकार लगभग समान दिखाई देता है. लेकिन वास्तव में ऊपर की ओर जाते हुए अक्षरों का आकार बड़ा होता जाता है, जिससे देखने वाले को एक समान अनुपात का भ्रम होता है. यह कलात्मक तकनीक उस दौर के शिल्पकारों की अद्भुत समझ और कौशल को दर्शाती है कि आखिर उस दौर में भी कारीगरों में इतनी कुशलता थी.

आगरा के वरिष्ठ इतिहासकार और प्रोफेसर अनुराग पालीवाल ने बताया कि वर्तमान में ताजमहल केवल एक ऐतिहासिक स्मारक नहीं, बल्कि प्रेम, समर्पण और भारतीय विरासत का वैश्विक प्रतीक बन चुका है. उन्होंने कहा कि इसे दुनिया के सात अजूबों में भी स्थान मिला है. हर वर्ष लाखों पर्यटक और नवविवाहित जोड़े इसकी खूबसूरती को देखने आते हैं. फिल्मों, साहित्य, चित्रकला और फोटोग्राफी में भी ताजमहल का विशेष स्थान मिल चूका है. करीब 400 सालों बाद भी इसकी भव्यता, संगमरमर की चमक और अनुपम वास्तुकला लोगों को उतना ही आकर्षित करती है, जितना इसके निर्माण के समय करती रही होगी.

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