वृंदावन का गोविंद देव जी मंदिर: बांके बिहारी जी से भी हजारों साल पुराना! जानिए

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वृंदावन का गोविंद देव जी मंदिर: बांके बिहारी जी से भी हजारों साल पुराना! जानिए


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वृंदावन का गोविंद देव जी मंदिर भगवान बांके बिहारी जी से भी प्राचीन माना जाता है. इसकी मूर्ति श्रीकृष्ण के परपोते बज्रनाभ द्वारा द्वापर युग में स्थापित की गई थी. यह मंदिर स्थापत्य कला का अद्भुत उदाहरण है और हजार…और पढ़ें

हाइलाइट्स

  • गोविंद देव जी मंदिर भगवान बांके बिहारी जी से भी प्राचीन माना जाता है.
  • इसकी मूर्ति श्रीकृष्ण के परपोते बज्रनाभ द्वारा द्वापर युग में स्थापित की गई थी.
  • यहां प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं.
मथुरा: कहते हैं मथुरा और वृंदावन सिर्फ तीर्थ नहीं, बल्कि रहस्यों और कृष्ण लीलाओं की जीवित परंपरा हैं. यहां हर मंदिर के पीछे एक कहानी है और हर कथा में भक्ति का अद्भुत अनुभव है. ऐसा ही गोविंद देव जी महाराज का मंदिर रहस्यमयी और ऐतिहासिक है , जो भगवान बांके बिहारी जी से भी कहीं अधिक प्राचीन माना जाता है.

श्रीकृष्ण की नगरी वृंदावन में स्थित यह मंदिर न केवल स्थापत्य कला की दृष्टि से अद्भुत है, बल्कि इसका इतिहास भी उतना ही चौंकाने वाला है. स्थानीय जनमान्यता और पौराणिक कथाओं के अनुसार गोविंद देव जी की मूर्ति लगभग 5000 वर्ष पुरानी है, जबकि बांके बिहारी जी की मूर्ति करीब 500-600 साल पुरानी मानी जाती है.

द्वापर युग से जुड़ा है गोविंद देव जी का मंदिर
पौराणिक मान्यता के अनुसार, जब द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण वृंदावन में अपनी लीलाएं कर रहे थे, तब तुलसी के वनों से घिरा यह क्षेत्र ‘वृंदावन’ कहलाता था. इसी भूमि पर बाद में कई मंदिर बने. बांके बिहारी को स्वामी हरिदास जी ने अपनी संगीत साधना से निधिवन में प्रकट किया, उनका प्राकट्य काल 16वीं शताब्दी का बताया जाता है. वहीं गोविंद देव जी की मूर्ति को भगवान श्रीकृष्ण के परपोते बज्रनाभ द्वारा बनवाया गया माना जाता है. यह मूर्ति शुद्ध भाव और भक्ति की प्रतिमूर्ति है.

कहां है गोविंद देव जी की मूर्ति?
आज वृंदावन में जो गोविंद देव जी का मंदिर है, वहां स्थापित विग्रह एक प्रतीकात्मक रूप है. असली विग्रह को जयपुर के गोविंद देव जी मंदिर में सुरक्षित रखा गया है. बताया जाता है कि मुगल आक्रमणों के दौरान मूर्ति को जयपुर स्थानांतरित कर दिया गया था ताकि उसे क्षति से बचाया जा सके.

गोविंद देव मंदिर की स्थापत्य कला है बेजोड़
वृंदावन के इस गोविंद देव जी मंदिर में राजस्थान की पारंपरिक कला की झलक मिलती है. इसकी नक्काशी, गुम्बद, खंभे और दीवारें आज भी इतिहासकारों और पर्यटकों को आकर्षित करती हैं. मंदिर का निर्माण कार्य भी लगभग 16वीं शताब्दी में हुआ था, जब भक्त रूप गोस्वामी ने गोमा टीला से मूर्ति को खोजा और मंदिर की स्थापना की.

हजारों श्रद्धालु करते हैं दर्शन
इस मंदिर में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं. विशेष पर्वों और जन्माष्टमी के अवसर पर यहां भारी भीड़ उमड़ती है. लोग मानते हैं कि गोविंद देव जी के दर्शन मात्र से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और आत्मिक शांति प्राप्त होती है.

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