सहारनपुर का कंपनी गार्डन, यहां मुगल दौर शुरू हुई भारत की चाय की शुरुआत, जानें
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सहारनपुर में 1824 में चाय की खेती की शुरुआत हुई थी. अंग्रेजों ने कंपनी गार्डन में चाय के पौधे लगाए और यहीं से चाय की खेती का विस्तार हुआ. आज अंतरराष्ट्रीय चाय दिवस है.
भारत में चाय की खेती की शुरुआत सहारनपुर से हुई है. शहर के बीचो-बीच स्थित मुगलकालीन कंपनी गार्डन में अंग्रेजों ने सबसे पहले चाय के पौधे लगाए थे, और यहीं चाय की पौध तैयार की गई थी.

चाय के बारे में जानना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि आज अंतरराष्ट्रीय चाय दिवस मनाया जा रहा है. सहारनपुर में चाय की खेती का पहला विवरण 1824 में ब्रिटिश लेखक बिशप हेबर की कुमाऊं यात्रा के संदर्भ में मिलता है.

अंग्रेजी शासनकाल में सहारनपुर के अनुकूल मौसम को देखकर तत्कालीन उद्यान अधीक्षक डॉक्टर रोयले ने चाय की खेती की संभावना पर ईस्ट इंडिया कंपनी को रिपोर्ट भेजी थी. इसके बाद गवर्नर लॉर्ड विलियम बैंटिक ने उद्यान विभाग का दौरा किया और सहारनपुर में चाय की खेती की योग्यता को पहचाना. इसके बाद 1835 में 2000 चाय के पौधे कंपनी गार्डन में लाए गए.

1908 के सहारनपुर गजेटियर में उल्लेख है कि 1824 में उद्यान के अधीक्षक रहे डॉक्टर रोयले के बाद डॉक्टर फॉकनर को उद्यान का अधीक्षक बनाया गया. उन्होंने चाय के पौधे लगाए और कुछ पौधों को शिवालिक पहाड़ियों की तलहटी में भेजा, जहां सहारनपुर और देहरादून क्षेत्र में बड़े पैमाने पर चाय की खेती शुरू हुई.

सहारनपुर शहर के बीचो-बीच बसा कंपनी गार्डन मुगल शासकों के अधीन था. दिल्ली पर अंग्रेजों के कब्जे के बाद इस उद्यान को कंपनी गार्डन नाम दिया गया. अंग्रेजी शासन काल में यहां औषधीय पौधों के साथ-साथ सिनकोना, चाय, कॉफी, अलसी, मोहगनी, यूकेलिप्टस, अकोल और टेपियोका जैसे कई पौधों पर अनुसंधान किया गया.