हरा रियासत: 1857 की क्रांति का वो अजेय गढ़, जिसने हिला दी थी ब्रिटिश हुकूमत की नींव
Last Updated:
Kohra Riyasat History: अमेठी की ऐतिहासिक कोहरा रियासत का इतिहास शौर्य और त्याग का जीवंत दस्तावेज है. सन् 1636 में गंगा दशहरा पर स्थापित इस रियासत के शासक बाबू भूप सिंह ने 1857 की क्रांति में अंग्रेजों के दांत खट्टे कर दिए थे. जानिए नरवरगढ़ से जुड़े इसके गौरवशाली इतिहास, पवित्र चतुर्भुज धाम मंदिर की स्थापना, और राजा विक्रम साह के वंशजों की अमर गाथा. वर्तमान में बाबू राघवेंद्र प्रताप सिंह (अभय सिंह) इसके संरक्षक हैं.
अमेठी की पावन और ऐतिहासिक धरती ने देश के इतिहास को कई अमूल्य रत्न और अविस्मरणीय गौरवगाथाएं दी हैं. इसी गौरवशाली भूमि पर स्थित कोहरा रियासत का इतिहास सिर्फ एक राजपाठ की कहानी नहीं है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति की स्थापना, शौर्य, त्याग और विदेशी हुकूमत के खिलाफ भड़की आजादी की ज्वाला का एक अमर जीवंत दस्तावेज है. सन 1636 में गंगा दशहरा के पावन पर्व पर स्थापित हुई कोहरा रियासत का इतिहास जितना पुराना और ऐतिहासिक है, उतना ही दिलचस्प और आज की पीढ़ी को राष्ट्रभक्ति से सराबोर करने वाला भी है.

ब्रिटिश हुकूमत के दौरान कोहरा रियासत आजादी के मतवालों का एक प्रमुख केंद्र बन गया. सन 1857 के प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान कोहरा के तत्कालीन शासक बाबू भूप सिंह क्रांति के एक महानायक बनकर उभरे. उन्होंने अवध के स्वतंत्रता संग्राम में अग्रिम भूमिका निभाई और लखनऊ रेजीडेंसी के ऐतिहासिक घेराव में अपनी सेना के साथ हिस्सा लिया. बाबू भूप सिंह ने सुल्तानपुर जिले के चांदा और कादूनाला के युद्धों में अंग्रेजों के दांत खट्टे कर दिए. उनके इस अदम्य साहस से बौखलाकर ब्रिटिश सरकार ने रियासत के खिलाफ अनेक अत्याचार किए. भारी-भरकम कर थोपे और दमनकारी नीतियों से क्षेत्र की जनता के आर्थिक शोषण और दमन का प्रयास किया गया. अंग्रेजी सैनिकों की एक टुकड़ी को कोहरा भेजा गया, जिसने भारी मात्रा में हथियार जब्त किए और कोहरा के ऐतिहासिक किले को ध्वस्त करने का क्रूर आदेश दे दिया. आज भी उस भव्य किले के अवशेष बाँसों के झुरमुटों के बीच अपने गौरवशाली अतीत की कहानी बयां करते हैं. बाद में बाबू भूप सिंह के वंशजों द्वारा एक लंबी कानूनी लड़ाई के बाद कोहरा रियासत को ब्रिटिश नियंत्रण से मुक्त कराया गया और पुनः उनके अधिकार वापस मिल गए.

कोहरा रियासत की जड़ें मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक नरवरगढ़ से जुड़ी हैं. नरवरगढ़ के राजकुमार सोढ़ देव (966 से 1006) ने 966 ईस्वी में अमेठी राज्य की नींव रखी थी. इसी राजवंश की परंपरा में आगे चलकर अमेठी के राजा विक्रम साह (1599 से 1636) के छोटे पुत्र राजकुमार हिम्मत साह ने ज्येष्ठ मास के पावन पर्व गंगा दशहरा के शुभ अवसर पर सन 1636 ईस्वी में कोहरा रियासत की स्थापना की. आज भी उनका योगदान ऐतिहासिक धरोहर के रूप में पत्थरों पर दर्ज है और यह रियासत अपनी दिलचस्प कहानी रखती है.
Add News18 as
Preferred Source on Google

बाबू हिम्मत साह ने क्षेत्र में सबसे पहले भगवान विष्णु के एक भव्य मंदिर का निर्माण कराया, जो आज भी “चतुर्भुज धाम” के नाम से विख्यात है. इस मंदिर की स्थापना के बाद ही उन्होंने कोहरा किले का निर्माण करवाया, जहाँ उनका राज्याभिषेक हुआ और वे कोहरा के पहले शासक बने. वर्तमान रूप में ऐतिहासिक धरोहर के रूप में जाने जाने वाले इस मंदिर की कहानी काफी दिलचस्प है, क्योंकि यहीं पर इस रियासत के सभी तालुकदारों द्वारा आजादी की लड़ाई की रणनीति तय होती थी.

अमेठी की इस रियासत में कई रसूखदार तालुकदार आए जिन्होंने इस रियासत पर राज किया और बखूबी राजगद्दी संभाली. उन्हीं में से एक थे उमानाथ सिंह. बाबू शिव बहादुर सिंह के बाद उनके भाई बाबू उमानाथ सिंह (1993 से 2017) कोहरा के अगले प्रमुख बने. वे अवध विश्वविद्यालय में इतिहास के प्रोफेसर और ‘उत्तर प्रदेश इतिहास कांग्रेस’ के संस्थापक सदस्य रहे. उन्होंने शिक्षा और इतिहास संकलन के क्षेत्र में अमूल्य योगदान दिया और इस रियासत की देखरेख की.

वैसे तो इस रियासत पर कई राजकुमार और राजाओं ने राज किया और इस रियासत का संरक्षण किया, लेकिन वर्तमान में इस रियासत की बागडोर बाबू राघवेंद्र प्रताप सिंह (अभय सिंह) संभाल रहे हैं. इस रियासत का आज भी रोचक इतिहास है और आज भी रियासत के सबसे पहले स्थापित कोहरा का राजभवन अपना इतिहास पत्थरों पर गौरवशाली रूप में दर्ज करने वाला बना है और इस गौरवशाली और अमर इतिहास की परंपरा को जीवित रखे हुए है.

अमेठी रियासत के राजा बिक्रम साह के छोटे सुपुत्र राजकुमार हिम्मत साह द्वारा सन् 1636 ई. में स्थापित कोहरा स्टेट का काफी दिलचस्प इतिहास है. बाबू हिम्मत साह की गौरवशाली वंश परंपरा में ही 1857 की क्रांति के नायक बाबू भूप सिंह का जन्म हुआ. बदलते हुए समय के साथ कई शासकों ने कोहरा स्टेट पर शासन किया, जिनमें कई प्रमुख नाम शामिल हैं. इन तालुकदारों और रियासत के राजाओं में कुंवर हिम्मत सिंह, बाबू भूप सिंह, बाबू शिव दयाल सिंह, बाबू देवी दयाल सिंह, बाबू महावीर सिंह, बाबू बेनी बहादुर सिंह, बाबू प्रताप बहादुर सिंह, बाबू शिव बहादुर सिंह एवं बाबू उमानाथ सिंह तथा बाबू संजय सिंह जी शामिल हैं. वर्तमान में इस स्टेट के संरक्षक बाबू राघवेन्द्र प्रताप सिंह (अभय सिंह) हैं.