हर दिन साढ़े 3 हजार कमाई…पढ़ाई के साथ लौकी उगा रहे गोंडा के विवेश, जानिए ट्रिक

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हर दिन साढ़े 3 हजार कमाई…पढ़ाई के साथ लौकी उगा रहे गोंडा के विवेश, जानिए ट्रिक


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हर दिन 3.5 हजार कमाई…पढ़ाई के साथ लौकी उगा रहे गोंडा के विवेश, जानिए ट्रिक

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Lauki ki kheti : विवेश गोंडा में विकासखंड झंझरी के रहने वाले हैं. ग्रेजुएशन की पढ़ाई कर रहे हैं और साथ में आधुनिक तरीके से लौकी की खेती भी कर रहे हैं. लोकल 18 से विवेश बताते हैं कि वे इस समय करीब ढाई बीघा में मचान विधि से लौकी उगा रहे हैं. विवेश का कहना है कि आधुनिक तरीके अपनाने से कम लागत में बेहतर उत्पादन लिया जा सकता है. विवेश के मुताबिक, ढाई बीघे में 20 से 25 हजार रुपये की लागत लगी है. प्रतिदिन 3 से साढ़े तीन हजार रुपये की इनकम हो रही है. मचान विधि में खेत की देखभाल और तुड़ाई का काम भी आसान हो जाता है.

गोंडा. लौकी की खेती किसानों की किस्मत बदल सकती है. उत्तर प्रदेश में गोंडा के किसान विवेश पांडेय इन दिनों लौकी उगाने में जुटे हैं. विवेश विकासखंड झंझरी के रहने वाले हैं. ग्रेजुएशन की पढ़ाई कर रहे विवेश पांडेय आधुनिक तरीके से लौकी की खेती कर रहे हैं. उन्होंने मचान विधि अपनाकर खेती को लाभ का सौदा बना दिया है. उनकी मेहनत और सफलता को देखकर आसपास के किसान भी इस तकनीक को अपनाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं. लोकल 18 से विवेश बताते हैं कि वे इस समय करीब ढाई बीघा में मचान विधि से लौकी उगा रहे हैं. पढ़ाई के साथ खेती करना आसान नहीं है, लेकिन सही योजना और मेहनत की वजह से वह दोनों काम अच्छे से संभाल रहे हैं. विवेश का कहना है कि आधुनिक खेती अपनाने से कम लागत में बेहतर उत्पादन लिया जा सकता है.

क्या और कितना फायदा

विवेश बताते हैं कि मचान विधि में लौकी की बेल को बांस और तार की सहायता से ऊपर चढ़ाया जाता है. इससे बेल जमीन पर नहीं फैलती और फल मिट्टी के संपर्क में नहीं आते. इसकी वजह से लौकी साफ-सुथरी, चमकदार और अच्छी गुणवत्ता की होती है. बाजार में ऐसी लौकी की अच्छी कीमत मिल जाती है. इस विधि से खेती करने का एक और बड़ा फायदा यह है कि फसल में रोग और कीटों का प्रकोप कम होता है. पौधों को पर्याप्त धूप और हवा मिलती है, जिससे उनकी बढ़वार अच्छी होती है. खेत की देखभाल और तुड़ाई का काम भी आसान हो जाता है.

कहां से मिला आइडिया

विवेश पांडेय बताते हैं कि खेती करने की प्रेरणा उन्हें अपने पिता से मिली, क्योंकि वे पहले से खेती करते हैं. उन्होंने यूट्यूब पर आधुनिक खेती के वीडियो देखकर नई जानकारी हासिल की. पानी संस्थान के सीआरपी ने भी उन्हें मचान विधि से लौकी की खेती करने की सलाह दी. उनकी बात मानकर उन्होंने यह तकनीक अपनाई, जिससे उन्हें अच्छा उत्पादन और बेहतर मुनाफा मिल रहा है. विवेश पांडेय बताते हैं कि ढाई बीघे में 20 से 25 हजार रुपये की लागत लगी है. प्रतिदिन 3 से साढ़े तीन हजार रुपये की इनकम हो रही है. विवेश पांडेय बताते हैं कि भविष्य में मचान की खेती का दायरा और बढ़ाना है. लौकी के साथ मचान पर चढ़ने वाली दूसरी सब्जियों की खेती भी करनी है.

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Priyanshu Gupta

प्रियांशु गुप्‍ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…

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