अरहर की बुवाई से पहले किसान करें ये उपाय, फसल के दुश्मन नेमाटोड का होगा सफाया, जाने

0
अरहर की बुवाई से पहले किसान करें ये उपाय, फसल के दुश्मन नेमाटोड का होगा सफाया, जाने


होमताजा खबरकृषि

अरहर की बुवाई से पहले किसान करें ये उपाय, फसल के दुश्मन नेमाटोड का होगा सफाया

Last Updated:

फसल सुरक्षा वैज्ञानिक डॉ. हादी हुसैन खान ने बताया कि शाहजहांपुर के किसानों के लिए अरहर एक महत्वपूर्ण फसल है. यह एक दलहनी फसल है जो वायुमंडलीय नाइट्रोजन को सोखकर मिट्टी की उर्वरता बढ़ाती है. अरहर को कीटों और रोगों से सुरक्षित रखने के लिए भूमि का जैविक शोधन सबसे बेहतर तरीका है. किसान ट्राइकोडर्मा, बवेरिया बेसियाना और सूडोमोनास का गोबर की खाद के साथ मिलाकर कल्चर तैयार करें.

ख़बरें फटाफट

शाहजहांपुर: खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ ही किसान अरहर की बुआई की तैयारियों में जुट गए हैं. दलहनी फसलों में अरहर का प्रमुख स्थान रखती है, लेकिन इसमें कीटों और बीमारियों का प्रकोप पैदावार को भारी नुकसान पहुंचाता है. कृषि एक्सपर्ट के अनुसार, अरहर की बेहतर उपज और सुरक्षित फसल के लिए केवल बीजों का चयन ही काफी नहीं है, बल्कि बुआई से पहले भूमि का शोधन करना बेहद महत्वपूर्ण है. भूमि शोधन से मिट्टी में मौजूद हानिकारक फफूंद, जीवाणु और कीट नष्ट हो जाते हैं, जिससे फसल शुरुआती दौर से ही स्वस्थ रहती है.

किसानो के लिए अरहर महत्वपूर्ण फसल

फसल सुरक्षा वैज्ञानिक डॉ. हादी हुसैन खान ने बताया कि शाहजहांपुर के किसानों के लिए अरहर एक महत्वपूर्ण फसल है. यह एक दलहनी फसल है जो वायुमंडलीय नाइट्रोजन को सोखकर मिट्टी की उर्वरता बढ़ाती है. अरहर को कीटों और रोगों से सुरक्षित रखने के लिए भूमि का जैविक शोधन सबसे बेहतर तरीका है. किसान ट्राइकोडर्मा, बवेरिया बेसियाना और सूडोमोनास का गोबर की खाद के साथ मिलाकर कल्चर तैयार करें. इसके इस्तेमाल से मिट्टी में मित्र जीवाणुओं की संख्या बढ़ती है और हानिकारक फफूंद व कीटों का नाश होता है. उचित भूमि शोधन से फसल रोगमुक्त होगी, लागत घटेगी और हमारे किसानों की पैदावार के साथ-साथ उनकी खुशहाली भी बढ़ेगी.

अरहर की बुवाई से पहले करें ये काम

अरहर की बुआई से पहले मिट्टी की जांच कराना जरूरी है. फसल को रोगों से बचाने के लिए किसानों को जैविक कल्चर तैयार करना चाहिए. इसके लिए ढाई किलोग्राम ट्राइकोडर्मा, ढाई से तीन किलोग्राम बवेरिया बेसियाना और इतनी ही मात्रा में सूडोमोनास लें. इन सभी को अलग-अलग 100 किलोग्राम अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद में मिलाएं. इस कल्चर को किसी छायादार स्थान पर रखकर रोजाना हल्के पानी का छिड़काव करें, जिससे यह 8-10 दिनों में उपयोग के लिए तैयार हो जाता है.

गोबर की खाद के साथ तैयार किए गए इस जैविक कल्चर का उपयोग खेत की अंतिम जुताई के समय किया जाना चाहिए. सबसे पहले ट्राइकोडर्मा का छिड़काव मिट्टी में करें जो फफूंद जनित रोगों को रोकता है. इसके बाद दूसरे चरण में बवेरिया बेसियाना और अंतिम चरण में सूडोमोनास फ्लोरेसेंस का प्रयोग करें. यह प्रक्रिया मिट्टी की जैविक संरचना को मजबूत करती है और पौधों की जड़ों को मजबूत और बीमारियों से सुरक्षित बनाए रखती है.

नेमाटोड नियंत्रण के विशेष उपाय

अरहर की फसल में नेमाटोड नामक बीमारी का प्रकोप काफी देखा जाता है. इसके प्रभावी नियंत्रण के लिए पेसिलोमायसिस का एक से दो किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से भूमि शोधन के समय इस्तेमाल करना चाहिए. इसके अलावा, अगर किसान चाहें तो 60 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से नीम की निबोली या नीम की खली को खेत में मिला सकते हैं. यह प्राकृतिक उपाय मिट्टी में पनपने वाले हानिकारक कीड़ों और नेमाटोड का पूरी तरह सफाया कर देता है.

किसान जैविक दवाओं का प्रबंध नहीं कर पा रहे हैं, तो उन्हें गर्मी के मौसम में खेत की गहरी जुताई जरूर करनी चाहिए. गहरी जुताई से मिट्टी की निचली सतह में छिपे कीटों के अंडे और नेमाटोड धूप के संपर्क में आकर नष्ट हो जाते हैं. इन वैज्ञानिक और जैविक विधियों को अपनाकर किसान अपनी अरहर की फसल को पूरी तरह कीट व रोग मुक्त रख सकते हैं. स्वस्थ फसल से अधिक उत्पादन मिलेगा.

About the Author

Rajneesh Kumar Yadav

मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *