आगरा में जामुन की बंपर पैदावार, एक सीजन में सालभर की कमाई कर रहे किसान
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ताजनगरी की उपजाऊ धरती अब सिर्फ पारंपरिक फसलों के लिए ही नहीं, बल्कि काले सोने यानी ‘जामुन’ की बंपर पैदावार के लिए भी अपनी खास पहचान बना रही है. इस सीजन में आगरा के ग्रामीण इलाकों में जामुन की शानदार आवक से किसानों के चेहरे खिले हुए हैं. कम लागत में सालभर की मोटी कमाई कराने वाली जामुन की खेती ने इस बार बरौली अहीर, अछनेरा और बिचपुरी ब्लॉक के किसानों की किस्मत चमका दी है. औषधीय गुणों से भरपूर होने के कारण बाजार में इसकी मांग सातवें आसमान पर है, जिससे किसानों को इस प्राकृतिक सौगात का बेहतरीन और लाभकारी मूल्य मिल रहा है.
Jamun Farming: उत्तर प्रदेश के आगरा को अपनी फसलों के लिए जाना जाता है. यहां आगरा की धरती पर कई तरह की फसलें उगाई जाती हैं, जिससे किसानों को काफी मुनाफा मिलता है. इस सीजन में किसान जामुन की अच्छी पैदावार से बेहद खुश हैं. आगरा के कई देहात क्षेत्रों में जामुन के बड़े-बड़े बगीचे हैं, जहां इनकी खेती बड़े स्तर पर की जाती है. आगरा के बरौली अहीर के कई क्षेत्रों में, अछनेरा के कई क्षेत्रों में और बिचपुरी के कई क्षेत्रों में इसकी बंपर पैदावार होती है. किसान बताते हैं कि इस फसल से उन्हें अच्छा मुनाफा मिलता है. यह सेहत के लिए रामबाण होता है, इसलिए इसकी डिमांड बाजारों में अधिक होती है. किसान इसे उगाकर अच्छी और मोटी रकम कमा रहे हैं.
बिचपुरी ब्लॉक के लड़ामदा गांव में औषधीय फल की धूम
आगरा शहर से कुछ किलोमीटर दूर ब्लॉक बिचपुरी में जामुन के कई बड़े-बड़े बगीचे हैं. यहां लड़ामदा गांव में भी इसकी अच्छी पैदावार होती है. किसान और किसानों के नेता मोहन सिंह चाहर ने बताया कि जामुन एक औषधि के तौर पर भी मशहूर है. यह सेहत के लिए रामबाण होता है. सीजन में कुछ ही महीने आने वाला यह फल काफी डिमांड में रहता है, इसलिए इसकी खेती करने वाले किसानों को अधिक फायदा होता है. बाजारों में इसका काफी ऊंचा भाव होता है और किसानों को भी इसके दाम काफी अच्छे मिलते हैं. उन्होंने कहा कि जब अच्छी पैदावार होती है, तो एक ही सीजन में किसान सालभर की कमाई कर लेते हैं.
कम लागत में बंपर मुनाफा, लेकिन प्राकृतिक आपदा का डर
आगरा में जामुन की खेती करने वाले किसान और फसल के विशेषज्ञ मोहन सिंह चाहर ने बताया कि वैसे तो जामुन की खेती अच्छा मुनाफा देती है. इसमें लागत कम आती है, बस पेड़ की देखरेख करनी होती है और समय पर पानी दिया जाता है. फल आने तक पेड़ की देखरेख करना जरूरी है, अन्यथा वह सूख सकता है. एक बार फल आना शुरू हो जाते हैं, तो किसानों को हर साल मुनाफा होता है. उन्होंने कहा कि कई बार तेज आंधी या तूफान में किसानों को नुकसान झेलना पड़ता है. कच्चे जामुन टूटकर जमीन पर गिर जाते हैं, जो किसी मतलब के नहीं होते हैं. इसके अलावा इस प्राकृतिक आपदा में कई बार पके और अच्छे जामुन भी टूट जाते हैं और खराब हो जाते हैं. उन्होंने कहा कि अन्यथा की स्थिति में जामुन की खेती काफी अच्छी और लाभकारी है. इसका लाभकारी मूल्य किसानों को मिलता है, जिससे वे काफी खुश होते हैं.
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राहुल गोयल न्यूज़ 18 हिंदी में हाइपरलोकल (यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश) के लिए काम कर रहे हैं. मीडिया इंडस्ट्री में उन्हें 16 साल से ज्यादा का अनुभव है, जिसमें उनका फोकस हमेशा न्यू मीडिया और उसके त…और पढ़ें