आग में हाथ डालोगे जल जाओगे… बलिया के इस शख्स और अमरीश पुरी की आवज में फर्क नहीं बता पाएंगे!
नीलेश की कला इतनी अद्भुत है कि जो भी उसे सुनता है यकीन मानिए दंग रह जाता है. आवाज की नकल करने में नीलेश एकदम माहिर है. यह पशु-पक्षियों से लेकर राजनीति और फिल्मी दुनिया के दिग्गजों तक की आवाजों की हूबहू नकल कर लेते है. सबसे बड़ी बात यह है कि इस अनोखी प्रतिभा को सीखने के लिए उन्होंने कभी किसी संस्थान से प्रशिक्षण तक नहीं लिया, क्योंकि यह उनको प्रकृति ने ही दिया है.
नीलेश कुमार पांडेय उर्फ दीपू का दीपू का दावा है कि वह किसी भी व्यक्ति या पशु पक्षियों की आवाज अगर एक बार सुन लें, तो कुछ ही समय में हूबहू उसी आवाज में बोल सकते है. यह हुनर उन्हें बचपन से ही था, महज़ 9 साल की उम्र में वह स्कूल के प्रधानाध्यापक और शिक्षकों की हूबहू आवाज़ निकाल लिया करते थे. जब वे किसी की आवाज निकालते है, तो ऐसा लगता है जैसे वही व्यक्ति सामने खड़ा होकर बोल रहा है. कई लोग तो आश्चर्यचकित हो जाते है.
बड़े-बड़े किरदारों की कर लेते है नकल
नीलेश बचपन से ही यह सबकुछ करते आ रहे है, लेकिन कभी इस कला का दुरूपयोग नहीं किए, पहले खेल-खेल में उन्होंने पशु-पक्षियों की आवाजें निकालना शुरू किया और धीरे-धीरे नेताओं व फिल्मी किरदारों की आवाजों की नकल भी कर लेते है. नीलेश के अंदर की यह कला बड़ी अनोखी है.
बातचीत के दौरान नीलेश ने आवाज में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, सपा प्रमुख अखिलेश यादव, राजद नेता लालू यादव, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, भोजपुरी कलाकार दिनेश लाल “निरहुआ” और अभिनेता अमरीश पुरी जैसे चर्चित व्यक्तित्वों की आवाजें निकाली, जो बेहद लाजवाब रहा. इसके अलावा, वह महिलाओं की आवाजें भी इतने सटीक ढंग से निकालते है कि कोई पहचान ही नहीं पाता है.
पीएम से लेकर सीएम तक की आवाज
नीलेश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, सोनिया गांधी, राहुल गांधी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, मायावती, मनमोहन सिंह, मुलायम सिंह यादव, अखिलेश यादव या फिर बॉलीवुड के अमिताभ बच्चन, अक्षय कुमार, शाहरुख खान, आमिर खान, नाना पाटेकर, रवि किशन की आवाज भी निकाल लेते है. यही नहीं, उन्होंने जब काग यानी कौआ की आवाज निकालना शुरू की, तो कौवे भी आसपास दिखाई देने लगे.
लोग कहते हैं “वॉयस मिमिक्री किंग”
नीलेश इस अनोखी कला से सोशल मीडिया पर खूब चर्चित रहते है. अब तो नीलेश को लोग प्यार से “वॉयस मिमिक्री किंग” कहकर बुला रहे है. हालांकि अभी तक उन्हें कोई बड़ा मंच या पहचान नहीं मिल सका, लेकिन उनकी प्रतिभा ऐसी है कि अगर सही मंच मिला तो शायद वह देशभर में अपनी पहचान बना सकते है. नीलेश में वह अनोखी कला है, जिसके द्वारा अनुपस्थित व्यक्ति की भी उपस्थिति का अनुभव करा सकते है.