इस शिव मंदिर में आज भी पूजा करने आते हैं अश्वत्थामा, महादेव कृपा से बने चिरंजीवी

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इस शिव मंदिर में आज भी पूजा करने आते हैं अश्वत्थामा, महादेव कृपा से बने चिरंजीवी


सावन का माह शिव कृपा के ​लिए श्रेष्ठ महीना होता है. जिस पर महादेव की कृपा होती है, वो अकाल मृत्यु पर भी विजय प्राप्त कर लेता है. महाभारत के अश्वत्थामा 7 चिरंजीवी में शामिल हैं, उनको महादेव से ही दीर्घायु होने का वरदान मिला था. कहा जाता है तब से अश्वत्थामा अभी तक जीवित हैं. वे दीर्घेश्वर नाथ मंदिर में महादेव की पूजा करते थे. लोक मान्यता है कि आज भी अश्वत्थामा दीर्घेश्वर नाथ मंदिर में पूजा करने आते हैं. आइए जानते हैं दीर्घेश्वर नाथ मंदिर और अश्वत्थामा से जुड़ी कहानी.

मझौली राज में है दीर्घेश्वर नाथ मंदिर

उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में मझौली राज है, जहां पर दीर्घेश्वर नाथ मंदिर है. यह महाभारत काल से जुड़ा है. यह मंदिर अश्वत्थामा की तपोभूमि के रूप में प्रसिद्ध है. मान्यता है कि वे आज भी यहां पूजा करने आते हैं. सावन में हर सोमवार को एक से डेढ़ लाख लोग यहां दर्शन करते हैं.

पार्वती सरोवर के सफेद कमल से पूजा करते थे अश्वत्थामा

एक श्रद्धालु ने बताया कि यह एक पौराणिक मंदिर है, जहां भगवान शिव ने अश्वत्थामा को दर्शन दिए थे. यहां स्थित पार्वती सरोवर में स्नान करने से त्वचा रोगों का निदान होता है, ऐसी लोक मान्यता है.

मंदिर के महंत जगन्नाथ दास जी महाराज ने बताया कि मंदिर परिसर में स्थित पार्वती सरोवर में सफेद कमल के फूल खिलते हैं, जिन्हें अश्वत्थामा सहस्त्रार्चन पूजा के लिए उपयोग करते थे.

खुदाई में मिलीं द्वापर युग की मूर्तियां

उन्होंने कहा, यह मंदिर प्राचीन और पवित्र है. यहां भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं. सावन में लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए यहां आते हैं. महंत के अनुसार, यह मंदिर केवल धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि ऐतिहासिक महत्व का भी प्रतीक है.

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (एएसआई) ने करीब चार दशक पहले यहां खुदाई की थी, जिसमें द्वापर युग की मूर्तियां, मृदभांड और प्राचीन सिक्के मिले थे. इन खोजों ने मंदिर की प्राचीनता की पुष्टि की.

मझौली राज परिवार ने कराया मंदिर का जीर्णोद्धार

मंदिर का जीर्णोद्धार मझौली राज परिवार द्वारा कराया गया था, जिसमें तत्कालीन महारानी श्याम सुंदरी कुंवरी ने महत्वपूर्ण योगदान दिया. बाद में बांसुरी बाबा, टेंगरी दास और ब्रह्मलीन बंगाली बाबा जैसे संतों ने मंदिर के विकास में अहम भूमिका निभाई.

यहीं अश्वत्थामा को मिला दीर्घायु होने का वरदान

स्थानीय लोगों का विश्वास है कि महाभारत के योद्धा अश्वत्थामा को यहीं भगवान शिव ने दीर्घायु होने का वरदान दिया था, जिसके कारण इस मंदिर का नाम “दीर्घेश्वर नाथ मंदिर” पड़ा. यह मंदिर श्रद्धालुओं के लिए आस्था और इतिहास का अनूठा संगम है.

आज भी अश्वत्थामा तीसरे प्रहर में करते हैं शिव पूजा

मंदिर की सबसे रोचक बात यह है कि हर सुबह जब मंदिर के कपाट खोले जाते हैं, तो शिवलिंग पर पहले से ही बेलपत्र और फूल चढ़े मिलते हैं. स्थानीय लोग मानते हैं कि यह पूजा आज भी स्वयं अश्वत्थामा तीसरे प्रहर यहां आकर करते हैं.



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