कभी चित्रकूट के इस घाट में आमने-सामने बैठते थे रहीम और तुलसीदास, जाने पूरी कहानी
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आस्था की नगरी चित्रकूट में मंदाकिनी नदी के रामघाट से जुड़ी एक अनोखी कथा सामने आती है, जहां कभी गोस्वामी तुलसीदास और रहीम दास आमने-सामने बैठकर साधना करते थे. दोनों के बीच नदी का फासला था, लेकिन आध्यात्मिक संवाद निरंतर चलता रहता था. कहा जाता है कि, यहीं रहीम दास ने प्रसिद्ध दोहा लिखा और एक प्रसंग में धूल उड़ाते हाथी को लेकर दोनों संतों के बीच गूढ़ वार्तालाप हुआ, जिसमें अहिल्या उद्धार की पवित्र रज का उल्लेख मिलता है. यह कथा चित्रकूट की आध्यात्मिक महिमा और संत परंपरा को जीवंत करती है.
चित्रकूट. धर्म नगरी चित्रकूट को यूं ही आस्था की नगरी नहीं कहा जाता, यहां के हर घाट, हर मंदिर अपने भीतर कोई न कोई रहस्य और इतिहास समेटे हुए है. अब तक आपने चित्रकूट में भगवान श्रीराम से जुड़े स्थानों के बारे में खूब सुना और देखा भी होगा, लेकिन आज हम आपको एक ऐसी अनकही कहानी से रूबरू करा रहे हैं, जो शायद ही अपने सुनी होगी. बता दें कि, यह कहानी कही और की नहीं बल्कि उस स्थान की है जहां हर रोज हजारों की संख्या में भक्त जाते है. एक समय था कि मां मंदाकिनी नदी के किनारे रामघाट में दो महान विभूतियां गोस्वामी तुलसीदास और रहीम दास आमने-सामने बैठकर साधना करते थे. दोनों के बीच केवल नदी का फासला था. जानकारी के अनुसार, रामघाट के भरत मंदिर के पास तुलसीदास जी तपस्या में लीन रहते थे, वहीं घाट के दूसरी ओर एक पीपल के पेड़ के नीचे रहीम दास साधना करते थे, कहा जाता है कि दोनों संतों के बीच अक्सर आध्यात्मिक संवाद होता रहता था.
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नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें