कभी पढ़ाई के लिए तक नहीं थे पैसे, लोग देते थे ताने, फिर ऐसे बदली किस्मत! आज हैं नोएडा के लेबर कमिश्नर

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कभी पढ़ाई के लिए तक नहीं थे पैसे, लोग देते थे ताने, फिर ऐसे बदली किस्मत! आज हैं नोएडा के लेबर कमिश्नर


धीरेंद्र कुमार शुक्ला/ गौतम बुद्ध नगर. संघर्ष ही सफलता की राह है, कठिनाइयां ही सिखाती है जीत का असली अर्थ. ये शब्द और यह लाइन उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर जिले में लेबर कमिश्नर के पद पर तैनात सरजू राम शर्मा पर फिट बैठती है. सरजू राम शर्मा ने किसान परिवार से और गरीबी में जीवन यापन किया है. पढ़ाई के लिए सरकार की तरफ से मिले वजीफा से पढ़ाई की. रिश्तेदारों ने जमकर अवहेलना की, लोगों ने खूब ताने दिए, लेकिन सरजू राम शर्मा को हर मोड़ पर संघर्ष  मिला और आज वह लेबर कमिश्नर के पद पर हैं. आइए जानते हैं उनकी सफलता की कहानी.

कौन है सरजू राम शर्मा

सरजू राम शर्मा गौतम बुद्ध नगर जिले के अपर श्रमायुक्त (लेबर कमिश्नर) के पद पर तैनात हैं. वो उत्तर प्रदेश के लखीमपुर जिले के प्रीतम पुरवा गांव के रहने वाले हैं . उनका बचपन बहुत ही गरीबी में बीता. पिता के पास पांच बीघा जमीन थी, जिससे उन्हें घर भी चलना था और उनकी पढ़ाई लिखाई का खर्चा भी उठाना था.

सरजू राम शर्मा ने बताई अपनी संघर्ष भरी कहानी

लेबर कमिश्नर के पद पर तैनात सरजू राम शर्मा ने लोकल- 18 से खास बातचीत की. इस दौरान उन्होंने बताया कि मेरा बचपन बहुत ही गरीबी में रहा. मेरे पिता के पास पांच बीघे जमीन थी, जिसमें उन्हें घर चलना था, मुझे पढ़ना था. जो इतना सब कुछ कर पाना काफी मुश्किल था. मैंने किसी तरह से कक्षा 8 तक की पढ़ाई गांव के एक सरकारी स्कूल से की. कक्षा आठवीं के बाद मुझे लगातार वजीफा मिलता रहा. यही वजीफा मुझे पोस्ट ग्रेजुएशन तक मिलता रहा. जिससे मैंने किसी तरह से पढ़ाई की. इस दौरान घर पर काफी दिक्कतें आ गई. खेती में नुकसान हो गया. पिताजी परेशान हो गए, कर्जा हो गया. इसलिए मुझे उस समय पढ़ाई छोड़नी पड़ गई.

पढ़ाई छोड़ नेपाल में की टीचरिंग 

उन्होंने आगे बताया कि जब घर के हालात बिगड़ गए तब मैं नेपाल पढ़ाने के लिए चला गया. साल भर तक मैंने नौकरी की जो भी कर्जा था. धीरे-धीरे कर उसे उतारा. उसी के बाद मेरी शादी तय हो गई लखनऊ से. शादी के बाद मानो मेरी किस्मत बदल गई.

शादी के बाद बदली लेबर कमिश्नर की किस्मत

सरजू राम शर्मा ने बताया की शादी के बाद मेरे ससुर ने मुझे अपने घर बुला लिया. वह काफी बड़े अधिकारी थे. उन्होंने ही मुझे सिखाया कि कैसे कंपटीशन की तैयारी की जाती है. क्या पढ़ा जाता है किस तरीके से फॉर्म भरा जाता है और क्या कुछ होता है. यह सारी चीज उन्होंने मुझे बताई और फिर मैं उन्हीं के बताए हुए रास्ते पर चलने लगा.

तमाम नौकरियां ज्वाइन की सालों किया काम

उन्होंने आगे बताया कि धीरे-धीरे उनके बताए रास्तों पर चलने लगा और एक के बाद एक कई कंपनियां ज्वाइन की. कई प्राइवेट सेक्टर में काम किया. बैंक ऑफ़ इंडिया में काम किया. सेंट्रल बैंक में काम किया.  उसके बाद 1997 में इस डिपार्टमेंट में भर्ती हुआ.

पीसीएस के थ्रू हुआ सिलेक्शन

लेबर कमिश्नर ने आगे बताया कि मेरा पीसीएस एग्जाम पास कर सिलेक्शन हुआ था. 1997 में  सहायक के रूप में नौकरी को ज्वाइन किया. फिर धीरे-धीरे प्रमोशन होता रहा. चीजें बदलती रही. काम अच्छा करते रहे. तब जाकर आज इस पद पर पहुंचे हैं. मुझे ऐसा लगता है कि हर किसी के जीवन में एक संघर्ष होता है. हर किसी की अपनी एक परेशानी होती है. जिससे वह गुजरता है, लेकिन वह मेहनत करना न छोड़ें. बिना मेहनत के सफलता नहीं मिलती.



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