कभी पढ़ाई के लिए तक नहीं थे पैसे, लोग देते थे ताने, फिर ऐसे बदली किस्मत! आज हैं नोएडा के लेबर कमिश्नर
धीरेंद्र कुमार शुक्ला/ गौतम बुद्ध नगर. संघर्ष ही सफलता की राह है, कठिनाइयां ही सिखाती है जीत का असली अर्थ. ये शब्द और यह लाइन उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर जिले में लेबर कमिश्नर के पद पर तैनात सरजू राम शर्मा पर फिट बैठती है. सरजू राम शर्मा ने किसान परिवार से और गरीबी में जीवन यापन किया है. पढ़ाई के लिए सरकार की तरफ से मिले वजीफा से पढ़ाई की. रिश्तेदारों ने जमकर अवहेलना की, लोगों ने खूब ताने दिए, लेकिन सरजू राम शर्मा को हर मोड़ पर संघर्ष मिला और आज वह लेबर कमिश्नर के पद पर हैं. आइए जानते हैं उनकी सफलता की कहानी.
सरजू राम शर्मा गौतम बुद्ध नगर जिले के अपर श्रमायुक्त (लेबर कमिश्नर) के पद पर तैनात हैं. वो उत्तर प्रदेश के लखीमपुर जिले के प्रीतम पुरवा गांव के रहने वाले हैं . उनका बचपन बहुत ही गरीबी में बीता. पिता के पास पांच बीघा जमीन थी, जिससे उन्हें घर भी चलना था और उनकी पढ़ाई लिखाई का खर्चा भी उठाना था.
सरजू राम शर्मा ने बताई अपनी संघर्ष भरी कहानी
पढ़ाई छोड़ नेपाल में की टीचरिंग
शादी के बाद बदली लेबर कमिश्नर की किस्मत
तमाम नौकरियां ज्वाइन की सालों किया काम
उन्होंने आगे बताया कि धीरे-धीरे उनके बताए रास्तों पर चलने लगा और एक के बाद एक कई कंपनियां ज्वाइन की. कई प्राइवेट सेक्टर में काम किया. बैंक ऑफ़ इंडिया में काम किया. सेंट्रल बैंक में काम किया. उसके बाद 1997 में इस डिपार्टमेंट में भर्ती हुआ.
पीसीएस के थ्रू हुआ सिलेक्शन
लेबर कमिश्नर ने आगे बताया कि मेरा पीसीएस एग्जाम पास कर सिलेक्शन हुआ था. 1997 में सहायक के रूप में नौकरी को ज्वाइन किया. फिर धीरे-धीरे प्रमोशन होता रहा. चीजें बदलती रही. काम अच्छा करते रहे. तब जाकर आज इस पद पर पहुंचे हैं. मुझे ऐसा लगता है कि हर किसी के जीवन में एक संघर्ष होता है. हर किसी की अपनी एक परेशानी होती है. जिससे वह गुजरता है, लेकिन वह मेहनत करना न छोड़ें. बिना मेहनत के सफलता नहीं मिलती.