कानपुर मेट्रो बनी चलता फिरता म्यूजियम, मेट्रो में शहीदों को सलाम, जानें वजह
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कानपुर मेट्रो में आज एक चलता फिरत म्यूजियम नजर आया. जहां शहीद भगत सिंह से जुड़ी यादव संजो कर रखी गई थी चलती मेट्रो में लोगों ने क्रांतिकारी सहित भगत सिंह को याद किया.
28 सितंबर को शहीद भगत सिंह की जयंती मनाई जाती है कानपुर मेट्रो में आज एक चलता फिरत म्यूजियम नजर आया. जहां शहीद भगत सिंह से जुड़ी यादव संजो कर रखी गई थी चलती मेट्रो में लोगों ने क्रांतिकारी सहित भगत सिंह को याद किया. उनकी यादों को एक बार फिर से जीवित कर दिया. कानपुर मेट्रो में एक बड़ा ही खास और दिल को छू लेने वाला आयोजन हुआ. शहीद भगत सिंह की जयंती का, मेट्रो ने इस दिन को यादगार बनाने के लिए एक स्पेशल देशभक्ति राइड रखी, जिसमें देशभक्ति का रंग पूरी तरह छाया रहा.
मेट्रो के डिब्बे बने ‘भगत सिंह म्यूजियम’
बचपन से शहादत तक की कहानी तस्वीरों मेंप्रदर्शनी में जो तस्वीरें थीं, वो बहुत खास थीं. इनमें दिखाया गया था कि भगत सिंह बचपन में कैसे दिखते थे. उनकी पढ़ाई-लिखाई कैसी थी, उनके माता-पिता कौन थे और उनका पैतृक घर कैसा था. सबसे भावुक करने वाली वो तस्वीरें थीं जब वह जेल में थे. इतना ही नहीं, उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने वाले दूसरे वीर क्रांतिकारी, जैसे राजगुरु, सुखदेव और यतीन्द्र नाथ दास की तस्वीरें भी लगी थीं. लोगों को यह देखकर और भी गर्व महसूस हुआ. इसमें भगत सिंह के असली पेन, कपड़े और बूट की तस्वीरें भी थीं, जिनका इस्तेमाल वो किया करते थे.यह सब देखकर हर किसी का सीना गर्व से चौड़ा हो गया.
कानपुर मेट्रो बनी चलता फिरता म्यूजियम
उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPMRC) के प्रबंध निदेशक श्री सुशील कुमार ने भी अपनी बात रखी. शहीद भगत सिंह का बलिदान हमारे देश की आजादी की कहानी का एक अमर हिस्सा है. भगत सिंह ने अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई और आजादी के लिए अपनी जान तक दे दी. हम सभी को उनके जीवन से सीख लेनी चाहि. वह पढ़ाई में भी बहुत तेज थे और हिम्मत और हौसले की तो मिसाल थे. हमें उनसे प्रेरणा लेकर हमेशा देश के भले के लिए काम करना चाहिए.