काशी में क्यों उल्टी बहती है मां गंगा? तीन वचन है वजह, जान लीजिए पूरा रहस्य
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Varanasi News: काशी विश्वनाथ मंदिर के सीईओ विश्वभूषण मिश्रा ने बताया कि ‘गंगा रहस्य में वर्णन है कि जब मां गंगा स्वर्ग लोक से पृथ्वी लोक पर आई और वो प्रयागराज तक पहुंची तो वहां यमुना और सरस्वती के संगम के बाद उनका रूप विकराल हो गया और वो फिर तबाही मचाने लगी.
वाराणसी: बाबा विश्वनाथ का शहर बनारस अद्भुत है. इस प्राचीन शहर में बाबा विश्वनाथ के दर्शन के साथ मां गंगा और उनके तट पर बसें खूबसूरत घाट के दीदार के लिए दुनियाभर से श्रद्धालु आते हैं. इस शहर में मां गंगा उत्तर वाहिनी है यानी काशी में गंगा उल्टी दिशा में बहती हैं. ऐसा क्यों है.. इसके पीछे क्या रहस्य है इसे कम ही लोग जानते हैं.
विश्वभूषण मिश्रा ने बताया कि ‘गंगा रहस्य में वर्णन है कि जब मां गंगा स्वर्ग लोक से पृथ्वी लोक पर आई और वो प्रयागराज तक पहुंची, तो वहां यमुना और सरस्वती के संगम के बाद उनका रूप विकराल हो गया और वो फिर तबाही मचाने लगी, लेकिन गंगा आगे बढ़ते हुए जैसे ही काशी के तट से टकराई तो उनके प्रवाह को काशी विश्वनाथ ने पलट दिया, क्योंकि काशी बाबा विश्वनाथ द्वारा रक्षित है. इसलिए, सिर्फ काशी ही एकमात्र ऐसी जगह है जहां गंगा उत्तर वाहिनी है.
तब भागीरथी और मां गंगा की तपस्या
उन्होंने बताया कि काशी में गंगा के उलटे प्रवाह को देख भागीरथी भी परेशान हुए, क्योंकि उनके पूर्वज दक्षिण में थे जिनके मोक्ष के लिए उन्होंने कड़ी तपस्या की थी. उन्होंने मां गंगा से पूछा आपका प्रवाह उल्टा कैसे हुआ, तो मां गंगा ने उनसे तपस्या करने को कहा, जिसके बाद दोनों ने तपस्या की तो बाबा विश्वनाथ ने उन्हें तीन वचनों में बांध दिया.
इन तीन वचनों में बंधी है मां गंगा
पहला वचन लिया कि गंगा काशी के तटों को क्षति नहीं पहुंचाएगी. इसलिए, यहां बाढ़ के समय भी गंगा बढ़ती तो है लेकिन यहां कोई क्षति नहीं होती हैं. दूसरा वचन लिया काशी में जलीय जंतु काशी के किसी को नुकसान नहीं पहुंचाएगे. इसलिए यहां जलीय जंतु किसी पर हमला नहीं करते हैं. उन्होंने तीसरा वचन लिया कि काशी में मां गंगा देवी स्वरूप में विराजमान होगी. इसलिए, यहां गंगा देवी के रूप में पूजी जाती हैं.