कैसे होती है बाघों की गिनती और ये एकदूसरे से कैसे होते हैं ये अलग…यहां जानें

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कैसे होती है बाघों की गिनती और ये एकदूसरे से कैसे होते हैं ये अलग…यहां जानें


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Pilibhit News: सितम्बर महीने के शुरुआती सप्ताह में पीलीभीत टाइगर रिजर्व में वर्ष 2026 में होने वाली बाघ गणना के लिए ट्रेनिंग दी जाएगी. इस ट्रेनिंग में स्थानीय ही भी बल्कि 3 राज्यों के वनाधिकारी शिरकत करेंगे. इस…और पढ़ें

पीलीभीत: सितम्बर महीने के शुरुआती सप्ताह में पीलीभीत टाइगर रिजर्व में वर्ष 2026 में होने वाली बाघ गणना के लिए ट्रेनिंग दी जाएगी. इस ट्रेनिंग में स्थानीय ही भी बल्कि 3 राज्यों के वनाधिकारी शिरकत करेंगे. इस दौरान वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के विशेषज्ञ बाघ गणना की बारीकियां समझाएंगे.

बाघ संरक्षण के लिहाज से है काफी महत्वपूर्ण

उत्तर प्रदेश के पीलीभीत टाइगर रिज़र्व न केवल सैलानियों के लिए एक अच्छा डेस्टिनेशन है बल्कि संरक्षण मॉडल के लिहाज़ से भी इस टाइगर रिज़र्व को काफी अधिक सराहा जा रहा है. 1 से लेकर 3 सितम्बर तक यहां वर्ष 2026 में होने वाली बाघ गणना के लिए प्रशिक्षण का आयोजन किया जाएगा. इस प्रशिक्षण में उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड और राजस्थान के टाइगर रिजर्व और नेशनल पार्क शिरकत करेंगे. जिसमें उत्तराखंड के राजाजी नेशनल पार्क व कॉर्बेट टाइगर रिजर्व, यूपी के पीलीभीत, दुधवा व अमानगढ़ टाइगर रिजर्व शामिल हैं.

इसके साथ ही साथ इस प्रशिक्षण में उत्तराखंड की नंधौर वाइल्डलाइफ सेंचुरी, यूपी की किशनपुर, सुहेलवा, कतर्नियाघाट व दक्षिण खीरी वन प्रभाग शामिल होंगे. गौरतलब है कि यह सभी अभ्यारण्य बाघ संरक्षण के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण हैं.

साल 2022 में हुई थी आखिरी गणना

2022 की राष्ट्रीय बाघ गणना के दौरान, PTR को 365 ग्रिड में विभाजित किया गया था, जिनमें से प्रत्येक 2 वर्ग किलोमीटर को कवर करता था. वहीं दुधवा टाइगर रिजर्व व इसमें शामिल (दुधवा नेशनल पार्क, कतर्नियाघाट और किशनपुर) सहित, 887 ग्रिड में विभाजित किया गया था. बाघों की तस्वीरें लेने के लिए प्रत्येक ग्रिड में दो कैमरा ट्रैप लगाए गए थे. बाघों के शिकार जिसमे विशेष रूप से बड़े खुर वाले जानवरों का आकलन करने के लिए दुधवा में 114 और पीटीआर में 54 ट्रांसेक्ट लाइन स्थापित की गई थी.

बाघों की गणना करने की प्रक्रिया, जनगणना जितनी सरल नहीं होती. इसके लिए घने जंगलों के बीच बाघों की संभावित मौजूदगी वाले स्थानों में मौजूद पेड़ों पर ठीक आमने-सामने 2 ट्रैप कैमरे लगाए जाते हैं, जिनमें लगा सेंसर किसी भी वन्यजीव के आने-जाने पर उनकी तस्वीर कैद कर लेता है. इसके बाद एक तय समय तक कैमरे में कैद की गई तस्वीरों में से बाघों की तस्वीरों को अलग किया जाता है. बाघों की धारियां, मानवों के फिंगरप्रिंट जैसी यूनिक होती हैं. बाघों के शरीर पर मौजूद धारियों की तस्वीरों के आधार पर विशेषज्ञ संख्या का अनुमान लगाते हैं.

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