क्या आप जानते हैं मस्क क्या होता है और इस इत्र का प्रयोग क्यों किया जाता है?
मस्क इत्र क्या है
“मस्क” यानी कस्तूरी, एक ऐसी सुगंध जो गहरी, कोमल और लंबे समय तक टिकने वाली होती है. कभी यह कस्तूरी मृग से प्राप्त होती थी, लेकिन आज कन्नौज के कारीगर इसे नेचुरल हर्बल तत्वों, फूलों और रेजिन से बनाते हैं. पूरी तरह शाकाहारी और पर्यावरण अनुकूल तरीकों से ‘डेग-भपका’ नामक पारंपरिक प्रक्रिया से तैयार किया जाता है. इसमें प्राकृतिक तेलों, फूलों और राल को धीमी आंच पर पकाया जाता है, फिर उस बेस ऑइल जैसे देसी कस्तूरी तेल या सैंडलवुड ऑइल में डिस्टिल किया जाता है. इस प्रक्रिया को करने में बहुत मेहनत और वक्त लगता है.
यह इत्र पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए उपयुक्त होता है. सर्दियों में खासतौर पर पसंद किया जाता है, त्वचा और कपड़ों पर लंबे समय तक टिका रहता है. इसमें न तो एल्कोहल होता है, न ही कोई हानिकारक केमिकल. इसकी खुशबू धीरे-धीरे खुलती है—पहले हल्की, फिर गहरी और दिल तक उतरने वाली खुशबू रहती है.
मस्क इत्र की डिमांड और कीमत
कन्नौज का मस्क इत्र सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि मिडिल ईस्ट, यूरोप और अमेरिका तक निर्यात होता है. इसकी गहराई भरी खुशबू और नैचुरल क्वालिटी इसे इंटरनेशनल बाजार में बेहद खास बनाती है. कई विदेशी ब्रांड भी इसे अपने परफ्यूम का ‘बेस नोट’ बनाते हैं. वहीं इसके रेट की बात की जाए तो यह खुशबू ₹40,000 किलो से शुरू होकर लाखों रुपए तक पहुंचती है.
क्या बोले इत्र व्यापारी
इत्र व्यापारी निशीष तिवारी बताते हैं कि हमारे पास कई वैरायटी हैं—सफेद मस्क, ब्लैक मस्क, मस्क अंबर. लोग आते हैं, सूंघते हैं और फिर कहते हैं, “ये खुशबू तो रूह को छू गई”, यही हमारी पहचान है. कन्नौज में मिलने वाली ही असली मस्क है. इस खुशबू को पहचानना बहुत आसान है—इसमें तेज नहीं, कोमल महक होती है. लगाने के बाद यह तुरंत नहीं, कुछ देर में महकता है. पानी या एल्कोहल से पतला नहीं होता. असली मस्क इत्र की महक गर्म और दिल को भाने वाली होती है.