खंभे आग बन जाएं और हाथों में छाले पड़ जाएं… फिर भी रुकते नहीं बिजली के ये ….
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भीषण गर्मी में बिजली कटौती से परेशान जनता जहां गुस्से में है, वहीं लाइनमैन जान जोखिम में डालकर खंभों पर चढ़ते हैं. तपती धूप, जलते तार और कम संसाधनों के बावजूद वे दिन-रात विद्युत आपूर्ति बहाल करने में जुटे हैं.
हाइलाइट्स
- लाइनमैन तपती धूप में भी विद्युत आपूर्ति बहाल करने में जुटे हैं.
- कम संसाधनों और कम वेतन के बावजूद लाइनमैन सेवा भावना से काम करते हैं.
- उपभोक्ताओं के ताने सुनने के बावजूद लाइनमैन समर्पण से ड्यूटी निभाते हैं.
बलिया- गर्मी का कहर जब सिर चढ़कर बोलता है और बिजली कटौती लोगों के गुस्से की वजह बनती है, तब लाइनमैन ही वो लोग होते हैं जो खामोशी से अपनी ड्यूटी निभा रहे होते हैं. न कोई शोर, न कोई शिकायत बस एक लक्ष्य, लोगों तक बिजली पहुंचाना.
पिछले 24 घंटों में शहर की विद्युत व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई. कई इलाकों में घंटों बिजली नहीं रही, जिससे नाराज उपभोक्ताओं ने खूब नाराजगी जताई. लेकिन इस अव्यवस्था को सुधारने में जुटे रहे वही लाइनमैन, जो दिन-रात खंभों पर चढ़कर तपते तारों की मरम्मत करते रहे.
ड्यूटी से पीछे नहीं हटते लाइनमैन
लाइनमैन शिवकुमार लोकल 18 से बातचीत के दौरान कहते हैं कि परिस्थिति चाहे जो भी हो, लाइन में फाल्ट है तो जाना ही पड़ता है. वहीं मनोज बताते हैं कि 8-8 घंटे की शिफ्ट होती है, लेकिन जब इमरजेंसी आती है तो सभी लाइनमैनों को अतिरिक्त ड्यूटी करनी पड़ती है. इनका वेतन भी अपेक्षाकृत कम होता है, लेकिन सेवा भावना के आगे वेतन गौण हो जाता है.
तापमान 45 डिग्री के पार जा चुका है. खंभे इतने गर्म हो जाते हैं कि चढ़ने के दौरान हाथों में छाले पड़ जाते हैं. इसके बावजूद लाइनमैन बिना रुके फाल्ट खोजते हैं और तत्काल उसे दुरुस्त करने की कोशिश करते हैं.
ताने भी झेलते हैं, फिर भी नहीं थमता समर्पण
विभागीय संसाधन भी पूरी तरह मजबूत नहीं हैं. इसके बावजूद जब भी बिजली जाती है, उपभोक्ता सबसे पहले लाइनमैन को ही दोषी ठहराते हैं. कभी-कभी उन्हें ताने और गालियां भी सुननी पड़ती हैं. लेकिन फिर भी ये लोग मुस्कराते हुए हर बार खंभों पर चढ़ते हैं.