खड़ी अरहर से दाल तक का सफर! जानिए इस छोटी सी मशीन से कैसे शुरू करें बिजनेस….

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खड़ी अरहर से दाल तक का सफर! जानिए इस छोटी सी मशीन से कैसे शुरू करें बिजनेस….


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Business Idea: अरहर की दाल बनाने में ग्रेडिंग, दराई और छिलका हटाना शामिल है. सुल्तानपुर के उन्नति प्रेरणा केंद्र में मिनी दाल मिल रोजाना 1 टन प्रोसेसिंग करती है.

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अरहर की दाल.

हाइलाइट्स

  • अरहर की दाल बनाने में ग्रेडिंग, दराई और छिलका हटाना शामिल है.
  • मिनी दाल मिल रोजाना 1 टन प्रोसेसिंग करती है.
  • मशीन चना, उड़द, मूंग की दाल भी बना सकती है.

सुल्तानपुर: हमारे रोजमर्रा के जीवन में कुछ चीजें ऐसी होती हैं जिनका इस्तेमाल हम हर दिन करते हैं, लेकिन उनके बनने की प्रक्रिया को लेकर हमारे मन में शायद ही कभी कोई जिज्ञासा होती हो. चाहे वो खाने-पीने की चीजें हों, आराम या भोग-विलास से जुड़ी चीजें, या फिर रोजमर्रा इस्तेमाल किए जाने वाले प्रोडक्ट- हम इनका इस्तेमाल करते हैं लेकिन इनके पीछे की मेहनत और तकनीक से अनजान रहते हैं.
इन्हीं में से एक है अरहर की दाल- जो लगभग हर भारतीय रसोई का हिस्सा होती है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यह दाल आखिर बनती कैसे है? इसके पीछे की पूरी प्रक्रिया क्या होती है? आज हम आपको इसी सवाल का जवाब देने वाले हैं. जानिए, वो पूरी प्रक्रिया जिसके बाद तैयार होती है आपके थाली की अरहर की दाल.

सबसे पहले होती है ग्रेडिंग की प्रक्रिया
सुल्तानपुर स्थित उन्नति प्रेरणा एग्रो प्रोसेसिंग केंद्र में कार्यरत शिवकुमारी यादव ने लोकल 18 को बताया कि सबसे पहला काम होता है अरहर के खड़े दानों की ग्रेडिंग करना. ग्रेडिंग की प्रक्रिया से दानों से छिलका अलग हो जाता है. यह एक जरूरी चरण होता है जिससे दाल को तैयार करने की दिशा में पहला कदम पूरा होता है.
इसके बाद इन छिलका रहित खड़े दानों को मशीन में डाला जाता है, जहां उनकी दराई की जाती है. दराई की प्रोसेस पूरी होते ही मशीन अपने आप दाल को तीन भागों में अलग-अलग कर देती है- सबसे पहले निकलती है बड़ी दाल, उसके बाद उससे थोड़ी छोटी दाल, और फिर सबसे लास्ट में निकलती है सबसे छोटी दाल.

दाल बनाने वाली मशीन की खासियतें
शिवकुमारी यादव ने बताया कि इस प्रक्रिया में जो मशीन इस्तेमाल होती है, उसे ‘मिनी दाल मिल मशीन’ कहा जाता है. यह मशीन रोजाना लगभग 1 टन तक की प्रोसेसिंग करने की क्षमता रखती है. यही वजह है कि यह मशीन न सिर्फ बड़े उद्योगों, बल्कि छोटे किसानों और स्थानीय व्यवसायियों के लिए भी काफ़ी उपयोगी साबित होती है.
सबसे ख़ास बात ये है कि यह मशीन सिर्फ अरहर की दाल बनाने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह चना, उड़द, मूंग जैसी तमाम दलहनी फसलों को भी दाल में बदलने का काम करती है.
इस मशीन की कीमत बाजार में लगभग ₹1 लाख से लेकर ₹5 लाख के बीच होती है. कानपुर में यह मशीन उचित दाम पर और तकनीकी सहायता के साथ आसानी से मिल जाती हैं.

क्या है पूरी विधि? जानिए डिटेल में
दाल बनाने की प्रोसेस तकनीकी रूप से सुनने में जितनी जटिल लगती है, असल में उतनी ही व्यवस्थित और चरणबद्ध होती है. सबसे पहले, अरहर को मशीन में डालकर उसकी ग्रेडिंग की जाती है, जिससे उसमें मौजूद छिलके अलग हो जाते हैं. इसके बाद, खड़ी अरहर को मशीन में डालकर उसकी दराई की जाती है, जिसके कारण वह दो भागों में विभाजित हो जाती है. इस प्रक्रिया से मिली दाल को मशीन से बाहर निकाला जाता है, लेकिन उसमें कुछ छोटे-छोटे टुकड़े भी रह जाते हैं. इन बचे हुए टुकड़ों को बाद में अलग से छांटकर निकाल लिया जाता है ताकि दाल पूरी तरह से साफ और खाने के लिए लायक हो सके.
यह पूरी प्रक्रिया तब खत्म होती है जब दाल साफ और तैयार हो जाती है, और इन सभी प्रोसेस से गुजरने के बाद यह दाल आपके किचन तक पहुंचती है, चाहे वह पकवान के रूप में हो, तड़के के साथ हो, या फिर चावल पर डालकर सादगी में भी स्वाद भरने के लिए.

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