गर्मियों में खीरे की खेती किसानों को बना सकती है मालामाल, बस करना होगा ये काम
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खीरे की खेती गर्मियों में किसानों के लिए बेहद लाभदायक साबित हो सकती है. सही तकनीक और खेत की उचित तैयारी के साथ कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है. विशेषज्ञों के अनुसार उपयुक्त तापमान, अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी और सही किस्म का चयन करके किसान 55 से 60 दिनों में तुड़ाई शुरू कर सकते हैं और अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं.
गर्मी का मौसम शुरू होते ही मार्केट में ताजा खीरे की मांग बढ़ जाती है. खाने की प्लेट में खीरा एक अभिन्न और सबसे पसंदीदा स्थान बनाए रखता है, यही कारण है कि इस मौसम में किसानों के लिए खीरे की खेती व्यावसायिक रूप से जबरदस्त मुनाफे का सौदा हो सकती है, जो कम समय और कम लागत में उन्हें तगड़ा मुनाफा दे सकती है.

अप्रैल के महीने में गेहूं की फसल की कटाई पूरी हो जाने के बाद अक्सर खेत खाली रह जाते हैं. ऐसे में किसान इस समय अपने खाली पड़े खेत का इस्तेमाल करते हुए कम समय में एक अतिरिक्त आय प्राप्त कर सकते हैं. यदि किसान सही तकनीक और सही देखरेख के साथ खाली पड़े खेतों में खीरे की फसल लगाते हैं, तो बेहद कम समय में ही उत्पादन शुरू हो जाता है.

कृषि एक्सपर्ट डॉ. अखिलेश बताते हैं कि खीरे की अच्छी पैदावार के लिए गर्म और हल्की नमी वाला वातावरण सबसे उपयुक्त माना जाता है. यह फसल गर्मियों के मौसम में सही तापमान मिलने पर बेहद तेजी से बढ़ती है. खीरे की बेहतर पैदावार के लिए 25 से 35 डिग्री सेल्सियस तक का तापमान सबसे उपयुक्त माना जाता है.
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इस तापमान पर खीरे की पैदावार और पौधों का बढ़ाव बेहतर होता है और फसल जल्दी तैयार हो जाती है. अप्रैल के महीने में यदि सही तरीके से फसल की बुवाई की जाए, तो जून तक यह फसल कटाई के लिए पूरी तरह तैयार हो जाती है. इस दौरान मार्केट में इसकी मांग भी काफी अधिक होती है, ऐसे में यह किसानों के लिए व्यावसायिक रूप से बेहद फायदेमंद हो सकती है.

खीरे की फसल की अच्छी पैदावार प्राप्त करने के लिए दोमट या रेतीली मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है, जिसका पीएच मान 6 से 7 के बीच होना जरूरी होता है. सबसे खास बात यह है कि खेत में फसल लगाने से पहले जल निकासी की व्यवस्था को सही तरीके से बनाए रखना बेहद आवश्यक होता है, ताकि किसी भी स्थिति में खेत में पानी न रुके और फसलों को लगने वाले तरह-तरह के रोगों से बचाया जा सके.

खीरे की फसल की बुवाई से पहले खेत को दो से तीन बार अच्छी तरह जुताई करना जरूरी होता है. खेत की अच्छी जुताई के बाद मिट्टी की गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए सड़ी हुई गोबर की खाद का इस्तेमाल कर सकते हैं. इसके बाद फसल की बुवाई करने से पहले लाइन से लाइन की दूरी 60 से 120 सेंटीमीटर होनी चाहिए, वहीं पौधे से पौधे के बीच की दूरी 30 से 60 सेंटीमीटर होनी चाहिए.

खेत से खीरे की अच्छी पैदावार प्राप्त करने के लिए एक एकड़ खेत में तकरीबन 1 किलो बीज की मात्रा पर्याप्त होती है. फसल बुवाई से पहले सही किस्म का चुनाव करना भी बेहद जरूरी होता है. यदि किसान हाइब्रिड किस्म का चुनाव करते हैं, तो 1 एकड़ फसल की बुवाई के लिए 500 से 600 ग्राम तक बीज भी काफी हो सकता है.

फसल बुवाई से पहले बीज का उपचारण भी बेहद आवश्यक होता है. इसके लिए सबसे पहले बी को 4 से 6 घंटे तक पानी में भी होकर उपचारित किया जाना चाहिए और इन्हें मिट्टी के अंदर दो से तीन सेंटीमीटर गहराई में होना चाहिए. अच्छी पैदावार के लिए किस हाइब्रिड किस्म में पूसा उदय, पूसा बरखा, पंजाबी नवीन जैसी किस्म का चुनाव कर सकते हैं.

खीरे की यह फसल बेहद तेजी से बढ़ती है. सही देखरेख करते हुए, फसल बुवाई के लगभग 35 से 40 दिनों के भीतर ही पौधों में फूल आना शुरू हो जाता है, वहीं 55 से 60 दिनों के भीतर फसल पहली तुड़ाई के लिए भी तैयार हो जाती है. ऐसे में यदि इस फसल की खेती सही तरीके से की जाए और समय-समय पर सिंचाई व खाद की सही देखभाल की जाए, तो किसान लगभग 50 क्विंटल तक की उपज आसानी से प्राप्त कर सकते हैं.