छप्परफाड़ कमाई चाहिए तो खाली पड़ी जमीन पर लगा दें ये फसल… आवारा पशु भी भूल जाएंगे खेतों का रास्ता
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किसान ने बताया कि वह हर वर्ष कई बीघा खेत में हल्दी की फसल करते से आ रहे हैं. क्योंकि इस उम्र में वह ऐसी फसल करना वाजिब समझते हैं. जिसमें कम मेहनत लगे इसलिए हल्दी की फसल काफी मुफीद है. जिस प्रकार इसमें एक बीघा म…और पढ़ें
कमालगंज के किसान ने बताया कि वह हर वर्ष कई बीघा खेत में हल्दी की फसल उगाते हैं. इस उम्र में वह ऐसी फसल करना वाजिब समझते हैं जिसमें कम मेहनत लगे. हल्दी की फसल काफी मुफीद है. एक बीघा में बुवाई करने के लिए लगभग 15 हजार रुपए की लागत आती है. यह प्रति किलो 60 से 80 रुपए की दर से बिकती है. 90 से 120 दिनों में यह फसल तैयार हो जाती है और एक बीघा में चार से पांच क्विंटल तक की पैदावार हो जाती है.
दूसरी फसलों की अपेक्षा हल्दी की फसल में छुट्टा मवेशी नुकसान नहीं पहुंचाते हैं. इसके पौधे को ये पशु खाना कम पसंद करते हैं और घुईया जमीन के अंदर होती है, जिससे इन पशुओं को इसे खाना मुश्किल होता है. इस कारण यह फसल नुकसान से बची रहती है.
फ्री में होती है खाद तैयार
किसान बताते हैं कि जब भी हल्दी की खेती करते हैं, तो पौधों से इसे अलग करने के बाद उन पौधों को खेतों में एक तरफ इकट्ठा कर जैविक खाद बनाते हैं. इसका प्रयोग करने से दूसरी फसलों की पैदावार भी बढ़ जाती है. इस प्रकार किसान डबल कमाई कर रहे हैं.
यह है खेती का तरीका
सबसे पहले ऐसी भूमि का चयन करें जहां जल निकासी का समुचित साधन हो. इसके साथ ही हल्दी के उत्तम गुणवत्ता के बीजों की बुवाई की जाती है. समय-समय पर नराई और सिंचाई की जाती है. जब यह फसल तैयार हो जाती है, तो खेत से निकालकर सफाई करने के बाद मंडी में बिक्री कर दी जाती है.