जन्माष्टमी पर फर्रुखाबाद में छाया लकड़ी के रत्नजड़ित झूलों का क्रेज, 250 से 11 हजार तक कीमत, मिल रहे आकर्षक डिजाइन

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जन्माष्टमी पर फर्रुखाबाद में छाया लकड़ी के रत्नजड़ित झूलों का क्रेज, 250 से 11 हजार तक कीमत, मिल रहे आकर्षक डिजाइन


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Farrukhabad News: श्री कृष्ण जन्माष्टमी के मौके पर इनकी सर्वाधिक मांग रहती है. यदि आप भी कान्हा के झूलों की खरीदारी करना चाहते हैं तो फर्रुखाबाद के मठिया देवी मंदिर के पास हैंडीक्राफ्ट से सही कीमतों पर खरीद सकत…और पढ़ें

फर्रुखाबाद: श्री कृष्ण जन्माष्टमी के पर्व पर जहां आमतौर पर धातु से बने झूलों में कान्हा जी को विराजमान किया जाता है, वहीं अब समय के साथ ट्रेंड भी बदल गया है. बाजार में इस समय रत्न जड़ित लकड़ी के झूले हर किसी को आकर्षित कर रहे है. यहां आने वाले लोग श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर लड्डू गोपाल को इन झूलों में विराजित करने के लिए खूब खरीदारी कर रहे है.

इन लकड़ी के झूलों पर की गई नक्काशी उन्हें और भी आकर्षक बना देती है. यहां के कारीगरों ने बड़ी कुशलता से सुंदर झूले बनाए है, जो बाजार में आते ही सभी की पसंद बन रहे है और जमकर बिक रहे है.

लोकल-18 को आरती दीक्षित ने बताया कि झूलों के ऑर्डर पहले से ही मिलने लगते है. मुख्य रूप से ये झूले आकार के अनुसार बनाए जाते है. सबसे कम कीमत 250 रुपए से शुरू होकर 5,000 से 11,000 रुपए तक के झूले तैयार किए जाते है. इन झूलों को बनाने में लकड़ी का मुख्य रूप से इस्तेमाल होता है. इन झूलों में कान्हा जी के बाल गोपाल के स्वरूपों को झुलाया जाता है.

श्री कृष्ण जन्माष्टमी के मौके पर इनकी सर्वाधिक मांग रहती है. यदि आप भी कान्हा के झूलों की खरीदारी करना चाहते हैं तो फर्रुखाबाद के मठिया देवी मंदिर के पास हैंडीक्राफ्ट से सही कीमतों पर खरीद सकते है.

जिस प्रकार लकड़ी के झूले सभी को पसंद आते है, उनकी चमक-दमक भी काफी अच्छी होती है. इन पर नक्काशी और कारीगरी करने में जोखिम भी होता है क्योंकि यह महंगे मिलते है. यहां के कारीगर नक्काशी बनाने के बाद उसमें रत्न, सितारे, मूंगा, मोती और सजावट का सामान लगाकर झूलों को अंतिम रूप देते हैं। इसके बाद ये झूले तैयार होते हैं और बिक्री के लिए उपलब्ध होते है.

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जन्माष्टमी पर फर्रुखाबाद में छाया लकड़ी के रत्नजड़ित झूलों का क्रेज



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