झांसी किले का पश्चिमी गेट, ऊंची चट्टान पर बना अजेय सुरक्षा कवच

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झांसी किले का पश्चिमी गेट, ऊंची चट्टान पर बना अजेय सुरक्षा कवच


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झांसी किले का पश्चिमी गेट ऊंची चट्टान पर बना एक बेहद सुरक्षित और रणनीतिक हिस्सा था, जिसे किले का “सुरक्षा कवच” माना जाता था. यहां तक पहुंचने का रास्ता कठिन, ऊबड़-खाबड़ और खतरनाक था, जिससे दुश्मनों के लिए हमला करना लगभग असंभव हो जाता था. ऊपर से लगातार निगरानी और मजबूत सैनिक व्यवस्था इसे और भी अजेय बनाती थी। 1857 के विद्रोह के दौरान भी यह हिस्सा किले की रक्षा में अहम भूमिका निभाता रहा. इसकी बनावट, ऊंचाई और प्राकृतिक सुरक्षा इसे झांसी किले का सबसे मजबूत और महत्वपूर्ण भाग बनाती है.

झांसी के ऐतिहासिक किले में कई दरवाजे और कई खिड़कियां हैं. इस किले का पश्चिम गेट सबसे खास माना जाता है, लोग इसे किले का सुरक्षा कवच कहते हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह इसकी जगह है, यह हिस्सा ऊंची चट्टान पर बना है. यह जगह ऐसी है जहां पहुंचना बहुत कठिन है. दुश्मन को ऊपर चढ़ने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती थी. ऊपर से सैनिक हर समय तैयार रहते थे. जैसे ही कोई आगे बढ़ता उस पर हमला किया जाता था. इस कारण यह गेट बाकी हिस्सों से ज्यादा मजबूत और सुरक्षित माना जाता था और किले की रक्षा में सबसे अहम भूमिका निभाता था.

पश्चिमी दरवाजा

लेकिन पश्चिम के दरवाजे तक पहुंचना उनके लिए आसान नहीं था. वहां तक जाने का रास्ता सही नहीं था. जमीन ऊबड़ खाबड़ थी और ऊपर से किले के सैनिक हर समय नजर रखते थे. जैसे ही कोई आगे बढ़ता उस पर हमला हो जाता था, तोप लगाना भी मुश्किल था क्योंकि जगह समतल नहीं थी. सैनिकों को छिपने की जगह भी नहीं मिलती थी. इस कारण उन्हें पीछे हटना पड़ता था और दूसरी दिशा से हमला करने की योजना बनानी पड़ती थी.

पश्चिमी दरवाजा

झांसी का किला जिसे Jhansi Fort  कहा जाता है अपने मजबूत निर्माण के लिए जाना जाता है. यह किला पुराने समय की समझ और मेहनत का अच्छा उदाहरण है. इसकी बनावट ऐसी है कि दुश्मन के लिए इसे जीतना आसान नहीं था, हर दीवार सोच समझ कर बनाई गई थी. पत्थर इतने मजबूत लगाए गए थे कि तोप के हमले भी आसानी से असर नहीं करते थे. किले की ऊंचाई भी इसकी ताकत थी, दूर से ही दुश्मन को देख लिया जाता था. यही कारण है कि यह किला लंबे समय तक सुरक्षित रहा और अपनी खास पहचान बनाता रहा.

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पश्चिमी दरवाजा

जब British East India Company ने झांसी पर हमला किया तब उन्होंने किले के कई हिस्सों को घेर लिया, उनके पास तोप और बड़ी सेना थी. उन्होंने चारों तरफ से किले को कमजोर करने की कोशिश की, लेकिन उन्हें हर जगह बराबर सफलता नहीं मिली. कुछ हिस्सों में उन्हें आगे बढ़ने का मौका मिला, लेकिन पश्चिम दिशा उनके लिए सबसे कठिन साबित हुई. वहां पहुंचने में ही उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ा और उनकी योजना पूरी तरह सफल नहीं हो पाई.

पश्चिमी दरवाजा

इतिहासकार बताते हैं कि यह पश्चिम गेट सिर्फ दीवार नहीं था. यह पूरी सोच के साथ बनाया गया था. रास्ते ऐसे बनाए गए थे कि दुश्मन अगर पास भी आ जाए तो फंस जाए. जगह जगह मोड़ और संकरे रास्ते रखे गए थे. ऊपर से हमला करना आसान बनाया गया था. एक इतिहासकार कहते हैं कि यह हिस्सा उस समय की समझ को दिखाता है. यहां प्रकृति और मेहनत दोनों का सही उपयोग किया गया था. इसी कारण इसे सुरक्षा कवच कहा जाता है और यह किले की सबसे बड़ी ताकत बन गया था.

पश्चिमी दरवाजा

भारत में Indian Rebellion of 1857 के समय रानी लक्ष्मी बाई ने इसी किले से लड़ाई लड़ी. यह दीवार उस समय भी मजबूती से खड़ी रही, इसने किले की रक्षा में अहम भूमिका निभाई. आज भी यह दीवार उस बहादुरी और समझ की कहानी बताती है. जब लोग इसे देखते हैं तो उन्हें उस समय की ताकत का एहसास होता है. यही कारण है कि इसे आज भी किले का असली सुरक्षा कवच कहा जाता है और इसकी खास पहचान बनी हुई.

पश्चिमी दरवाजा

इसी कारण यह दीवार हमेशा किले की रक्षा करती रही, यहां तक पहुंचना ही बहुत मुश्किल काम था. इसलिए यह गेट बाकी हिस्सों से ज्यादा सुरक्षित माना जाता था. इस हिस्से में पहरा भी बहुत कड़ा रखा जाता था. सैनिक हर समय तैयार रहते थे, जैसे ही किसी हलचल की खबर मिलती तुरंत जवाब दिया जाता था. यह दीवार सिर्फ पत्थर की नहीं थी बल्कि पूरी योजना का हिस्सा थी. इसी कारण इसे किले का मजबूत कवच माना गया और यह लंबे समय तक अटूट सुरक्षा देती रही.

पश्चिमी दरवाजा

 नीचे की तरफ बहुत गहरी ढलान है, कोई भी दुश्मन सीधे ऊपर नहीं चढ़ सकता था. रास्ता इतना कठिन था कि वहां तक पहुंचना ही बड़ी चुनौती बन जाता था. पत्थर फिसलन भरे थे और पकड़ बनाना आसान नहीं था, कई जगहों पर रास्ता बिल्कुल सीधा ऊपर जाता था. ऐसे में सैनिकों के लिए चढ़ाई करना लगभग नामुमकिन हो जाता था, ऊपर से किले के लोग आसानी से नीचे देख सकते थे. इस कारण दुश्मन हर बार असफल हो जाता था और इस दिशा से हमला करना छोड़ देता था.

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