झांसी किले की शान है पंचमहल! रानी लक्ष्मीबाई के फैसलों से 1857 की क्रांति तक रहा है गवाह

0
झांसी किले की शान है पंचमहल! रानी लक्ष्मीबाई के फैसलों से 1857 की क्रांति तक रहा है गवाह


Last Updated:

Panch Mahal Jhansi: झांसी किले के भीतर स्थित पंचमहल बुंदेलखंड के गौरवशाली इतिहास की एक बेहद अनूठी और भव्य निशानी है. ओरछा के राजा बीर सिंह देव द्वारा बनवाई गई यह इमारत कभी पांच मंजिला हुआ करती थी, जो शाही निवास के साथ-साथ दुश्मनों पर नजर रखने का एक मजबूत सामरिक केंद्र भी थी. रानी लक्ष्मीबाई और राजा गंगाधर राव के जीवन तथा 1857 के स्वतंत्रता संग्राम की गवाह रही इस ऐतिहासिक धरोहर की बची हुई दीवारें आज भी सैलानियों को हैरान कर देती हैं. आइए जानते हैं इस ऐतिहासिक महल की वास्तुकला और इससे जुड़े दिलचस्प किस्से.

झांसी किले के अंदर बना पंचमहल अपने आप में एक खास ऐतिहासिक इमारत है. इस महल का नाम सुनते ही लोगों के मन में यह सवाल आता है कि आखिर इसे पंचमहल क्यों कहा जाता है. इसका कारण यह है कि यह महल पहले पांच मंजिल का हुआ करता था. आज इसकी सभी मंजिलें सुरक्षित नहीं बची हैं. लेकिन जो हिस्सा आज भी मौजूद है वह इसकी पुरानी भव्यता की झलक दिखाता है. यह महल झांसी किले की सबसे आकर्षक इमारतों में गिना जाता है. यहां आने वाले पर्यटक इसकी बनावट और इतिहास को जानने के लिए जरूर रुकते हैं. पुराने समय में यह सिर्फ रहने की जगह नहीं था बल्कि शाही जीवन का अहम हिस्सा भी था. इसकी मजबूत दीवारें और ऊंची बनावट आज भी लोगों को कई सदियों पुराने समय की याद दिलाती हैं. यही कारण है कि पंचमहल झांसी के गौरवशाली इतिहास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है.

इतिहासकारों के अनुसार पंचमहल का निर्माण ओरछा के राजा बीर सिंह देव ने कराया था. बीर सिंह देव अपने समय के शक्तिशाली शासकों में गिने जाते थे. उन्होंने कई शानदार इमारतों और किलों का निर्माण कराया. पंचमहल भी उन्हीं की वास्तुकला का एक सुंदर उदाहरण माना जाता है. इस महल को इस तरह बनाया गया था कि यह देखने में सुंदर होने के साथ मजबूत भी रहे. महल की दीवारों और कमरों की बनावट उस समय की कला और इंजीनियरिंग का शानदार नमूना मानी जाती है. यहां की हर मंजिल का अलग उपयोग होता था. महल में रहने वाले शाही परिवार के लिए आराम और सुरक्षा दोनों का पूरा ध्यान रखा गया था. आज भले ही इसका कुछ हिस्सा टूट चुका है लेकिन इसकी बची हुई संरचना आज भी उस समय की शानदार निर्माण कला की कहानी सुनाती है.

पंचमहल का सबसे बड़ा आकर्षण इसकी ऊंचाई थी. जब यह पूरी तरह सुरक्षित था तब इसकी पांचों मंजिलों से दूर तक का नजारा दिखाई देता था. महल की बड़ी खिड़कियों और खुले हिस्सों से पूरे झांसी शहर पर आसानी से नजर रखी जा सकती थी. यही वजह थी कि इसका उपयोग केवल रहने के लिए नहीं बल्कि सुरक्षा के लिए भी किया जाता था. दुश्मनों की गतिविधियों पर नजर रखने में यह महल काफी मददगार माना जाता था. ऊंचाई के कारण सैनिक दूर से आने वाले खतरे को पहले ही देख लेते थे. इस तरह पंचमहल शाही निवास होने के साथ एक महत्वपूर्ण सामरिक स्थान भी था. आज भी जब पर्यटक यहां पहुंचते हैं तो उन्हें इसकी ऊंचाई और बनावट देखकर अंदाजा होता है कि पुराने समय में इसकी कितनी बड़ी उपयोगिता रही होगी.

Add News18 as
Preferred Source on Google

झांसी के राजा गंगाधर राव और रानी लक्ष्मीबाई का नाम इस महल से भी जुड़ा हुआ है. माना जाता है कि उन्होंने पंचमहल का उपयोग शाही निवास के रूप में किया था. इसी महल में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए होंगे और शाही जीवन की अनेक यादें जुड़ी होंगी. रानी लक्ष्मीबाई अपने साहस और वीरता के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध हैं. उनके जीवन का हर हिस्सा झांसी किले से जुड़ा हुआ है. पंचमहल भी उन ऐतिहासिक इमारतों में शामिल है जहां कभी शाही परिवार का जीवन बीतता था. इस महल की दीवारों ने उस दौर की खुशियां और चुनौतियां दोनों देखी हैं. इसलिए यह इमारत केवल पत्थरों का ढांचा नहीं बल्कि इतिहास की एक जीवित निशानी मानी जाती है.

सन 1857 का स्वतंत्रता संग्राम भारत के इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय है. झांसी किला इस क्रांति का प्रमुख केंद्र बना था और पंचमहल भी उस समय की कई घटनाओं का गवाह रहा. जब अंग्रेजों और भारतीय वीरों के बीच संघर्ष हुआ तब किले के कई हिस्सों की तरह इस महल ने भी कठिन समय देखा. माना जाता है कि उस दौर में महल का उपयोग रणनीति बनाने और सुरक्षा के लिए भी किया गया. युद्ध के दौरान कई इमारतों को नुकसान पहुंचा और पंचमहल भी इससे अछूता नहीं रहा. समय के साथ इसकी कई मंजिलें नष्ट हो गईं. लेकिन आज भी इसकी बची हुई दीवारें उस संघर्ष और बलिदान की याद दिलाती हैं जिसने भारत की आजादी की नींव मजबूत की थी.

समय के साथ पंचमहल को काफी नुकसान पहुंचा. मौसम की मार युद्ध और वर्षों तक उचित देखभाल न होने के कारण इसकी कई मंजिलें और हिस्से टूट गए. फिर भी जो संरचना आज मौजूद है वह लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती है. पुरातत्व विभाग और स्थानीय प्रशासन समय समय पर इसके संरक्षण का प्रयास करते रहते हैं ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इस ऐतिहासिक धरोहर को देख सकें. पुराने पत्थरों और दीवारों में आज भी उस दौर की कहानी छिपी हुई है. यहां पहुंचने वाला हर व्यक्ति इस बात को महसूस करता है कि इतिहास को सुरक्षित रखना कितना जरूरी है. यह महल हमें अपनी सांस्कृतिक विरासत की अहमियत भी समझाता है.

झांसी किले की ऐतिहासिक धरोहरों को सुरक्षित रखने में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी एएसआई की अहम भूमिका है. किले में तैनात एएसआई के अधिकारी अभिषेक कुमार अपने कार्य के प्रति पूरी लगन और जिम्मेदारी के साथ जुड़े हुए हैं. टीम न केवल किले और पंचमहल जैसी ऐतिहासिक इमारतों के संरक्षण पर ध्यान देते हैं, बल्कि यहां आने वाले पर्यटकों को भी इनके इतिहास से परिचित कराते हैं. उनकी सरल और सहज शैली में दी गई जानकारी लोगों को झांसी के गौरवशाली अतीत को समझने में मदद करती है. इतिहास और विरासत के प्रति उनका समर्पण सराहनीय है. ऐसे अधिकारी हमारी सांस्कृतिक धरोहर को आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंचाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं. उनके प्रयासों की बदौलत झांसी किला आज भी अपनी ऐतिहासिक पहचान और गौरव के साथ लोगों को आकर्षित कर रहा है.

न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। उत्तर प्रदेश की ताजा खबरें पढ़ने के लिए क्लिक करें|



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *