झांसी के 10 ऐतिहासिक दरवाजों पर आज भी देवी-देवता करते हैं पहरेदारी, जाने रहस्य
Last Updated:
झांसी में ओरछा गेट, उन्नाव गेट, दतिया गेट, सैंयर गेट, लक्ष्मी गेट, खंडेराव गेट, भांडेरी गेट और अन्य ऐतिहासिक दरवाजों के पास आज भी अलग अलग देवी देवताओं के मंदिर और प्रतिमाएं देखने को मिलती हैं. व्यापारी हों या यात्री. सैनिक हों या स्थानीय निवासी. शहर में प्रवेश करने से पहले लोग इन मंदिरों में माथा टेकते थे. लोगों का विश्वास था कि नगर की रक्षा सिर्फ मजबूत दीवारें और विशाल दरवाजे नहीं बल्कि देवी देवताओं का आशीर्वाद भी करता है. यही वजह थी कि आस्था और सुरक्षा एक दूसरे से जुड़ी हुई मानी जाती थी.
झांसीः झांसी के 10 ऐतिहासिक दरवाजों पर आज भी पहरेदार मौजूद हैं, लेकिन ये कोई सैनिक नहीं बल्कि देवी देवता हैं. पुराने समय में जब झांसी परकोटे से घिरा हुआ शहर था तब शहर में प्रवेश केवल तय दरवाजों से ही होता था. ये दरवाजे सिर्फ आने जाने का रास्ता नहीं थे बल्कि पूरे नगर की सुरक्षा का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माने जाते थे. इनके आसपास धार्मिक स्थल भी बनाए गए ताकि शहर में प्रवेश करने वाला हर व्यक्ति पहले देवी देवताओं का आशीर्वाद लेकर आगे बढ़े.
गेट पर देवी देवताओें का वास
ओरछा गेट, उन्नाव गेट, दतिया गेट, सैंयर गेट, लक्ष्मी गेट, खंडेराव गेट, भांडेरी गेट और अन्य ऐतिहासिक दरवाजों के पास आज भी अलग अलग देवी देवताओं के मंदिर और प्रतिमाएं देखने को मिलती हैं. व्यापारी हों या यात्री. सैनिक हों या स्थानीय निवासी. शहर में प्रवेश करने से पहले लोग इन मंदिरों में माथा टेकते थे. लोगों का विश्वास था कि नगर की रक्षा सिर्फ मजबूत दीवारें और विशाल दरवाजे नहीं बल्कि देवी देवताओं का आशीर्वाद भी करता है. यही वजह थी कि आस्था और सुरक्षा एक दूसरे से जुड़ी हुई मानी जाती थी.
समय बदला और शहर का विस्तार हुआ. कई ऐतिहासिक दरवाजे क्षतिग्रस्त हो गए. कुछ दरवाजे आधुनिक विकास के बीच अपनी पुरानी पहचान खो बैठे. लेकिन उनके पास बने मंदिर आज भी उसी श्रद्धा के साथ मौजूद हैं. आज भी यहां नियमित पूजा होती है और बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचते हैं. यही कारण है कि पुराने झांसी की पहचान आज भी इन मंदिरों और ऐतिहासिक दरवाजों से जुड़ी हुई है.
नगर की सांस्कृतिक और सामाजिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा
लोकल 18 से बात करते हुए इतिहासकार सुनील तिवारी बताते हैं कि झांसी के प्रमुख प्रवेश द्वारों के पास देवी देवताओं की स्थापना केवल धार्मिक परंपरा नहीं थी बल्कि यह नगर की सांस्कृतिक और सामाजिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा थी. यही वजह है कि झांसी के इन ऐतिहासिक दरवाजों को सिर्फ सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा नहीं बल्कि इतिहास. आस्था और संस्कृति के अद्भुत संगम के रूप में भी देखा जाता है. इसलिए यह कहना गलत नहीं होगा कि झांसी के दरवाजों पर पहरा आज भी जारी है. फर्क सिर्फ इतना है कि अब यह पहरा सैनिकों का नहीं बल्कि लोगों की आस्था का है.
About the Author
मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें