झांसी पुराने और नए शहर का है अनोखा संगम, जहां इतिहास और आधुनिकता की दिखती है झलक
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समय बीतता गया और झांसी में लोगों की संख्या बढ़ने लगी. कारोबार बढ़ा तो लोगों को नई जगह की जरूरत भी महसूस हुई. इसके बाद शहर की दीवारों के बाहर नए घर बनने लगे. धीरे धीरे नई दुकानें खुलीं और नए बाजार बस गए. फिर अंग्रेजों के समय नई सड़कें बनाई गईं, रेलवे आई, सरकारी दफ्तर बने. इन सबके बाद झांसी तेजी से फैलने लगा. लोग पुराने शहर से बाहर आकर बसने लगे. सिपरी, सिविल लाइंस, सदर और दूसरे कई इलाके धीरे धीरे आबाद हो गए. जहां पहले खाली जमीन दिखाई देती थी वहां अब घर, दुकानें, स्कूल और दफ्तर बन गए. इसी वजह से आज का झांसी पहले से कई गुना बड़ा दिखाई देता है. पुराने और नए शहर का फर्क आज भी साफ नजर आता है.
झांसीः झांसी में जैसे दो शहर बसे हुए दिखाई देते हैं. एक पुराना झांसी और दूसरा नया झांसी. बहुत समय पहले झांसी आज की तरह बड़ा शहर नहीं था. उस समय पूरा शहर ऊंची और मजबूत दीवारों के अंदर बसा हुआ था. शहर में आने जाने के लिए बड़े बड़े दरवाजे बने थे. लोग अपनी सुरक्षा के लिए इन्हीं दीवारों के अंदर रहते थे. बाजार भी यहीं लगते थे. घर भी यहीं बने थे. बाहर ज्यादा आबादी नहीं थी. रात होने पर शहर के दरवाजे बंद कर दिए जाते थे. इससे बाहर के लोग आसानी से अंदर नहीं आ सकते थे. उस समय यही छोटा सा इलाका पूरा झांसी माना जाता था. आज भी पुराने शहर में घूमने पर उस समय की झलक साफ दिखाई देती है. कई पुराने रास्ते और कुछ पुराने दरवाजे आज भी उस दौर की याद दिलाते हैं.
धीरे धीरे बढ़ता गया शहर
समय बीतता गया और झांसी में लोगों की संख्या बढ़ने लगी. कारोबार बढ़ा तो लोगों को नई जगह की जरूरत भी महसूस हुई. इसके बाद शहर की दीवारों के बाहर नए घर बनने लगे. धीरे धीरे नई दुकानें खुलीं और नए बाजार बस गए. फिर अंग्रेजों के समय नई सड़कें बनाई गईं, रेलवे आई, सरकारी दफ्तर बने. इन सबके बाद झांसी तेजी से फैलने लगा. लोग पुराने शहर से बाहर आकर बसने लगे. सिपरी, सिविल लाइंस, सदर और दूसरे कई इलाके धीरे धीरे आबाद हो गए. जहां पहले खाली जमीन दिखाई देती थी वहां अब घर, दुकानें, स्कूल और दफ्तर बन गए. इसी वजह से आज का झांसी पहले से कई गुना बड़ा दिखाई देता है. पुराने और नए शहर का फर्क आज भी साफ नजर आता है.
पुराने शहर की दिखती हैं झलकियां
अगर आप आज झांसी घूमने जाएं तो आपको दोनों तरह का शहर देखने को मिलेगा. पुराने शहर में आपको तंग गलियां. पुराने मकान और इतिहास की झलक मिलेगी. वहीं नए झांसी में चौड़ी सड़कें. बड़े बाजार. नई कॉलोनियां और आधुनिक इमारतें दिखाई देंगी. यही बात झांसी को दूसरे शहरों से अलग बनाती है. यहां पुराना समय और नया समय साथ साथ चलते हुए नजर आते हैं. पुराने दरवाजे और दीवारों के बचे हुए हिस्से आज भी लोगों को बताते हैं कि कभी पूरा शहर इन्हीं के अंदर बसता था. वहीं बाहर फैला नया झांसी बदलते समय की कहानी सुनाता है. इसलिए जब भी कोई झांसी आता है तो उसे ऐसा लगता है जैसे वह एक नहीं बल्कि दो अलग अलग शहरों को एक साथ देख रहा हो. यही झांसी की सबसे खास बात है.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें